{"_id":"5fbf6d03a04af65c0a1eb171","slug":"coronavirus-new-study-know-what-influences-covid-19-survival-on-different-surfaces","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Coronavirus: ठोस सतहों पर लंबे समय तक कैसे जिंदा रहता है कोरोना वायरस? शोध में हुआ खुलासा","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
Coronavirus: ठोस सतहों पर लंबे समय तक कैसे जिंदा रहता है कोरोना वायरस? शोध में हुआ खुलासा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 26 Nov 2020 02:31 PM IST
विज्ञापन
1 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
Link Copied
कोरोना वायरस के बारे में अधिक से अधिक जानकारी लेने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार शोध कर रहे हैं। पहले हुए शोधों से ये बात पता चली है कि यह वायरस ठोस सतहों पर कई घंटे या कई दिनों तक जिंदा रह सकता है, लेकिन ये कैसे संभव हो पाता है, इसके बारे में भी अब वैज्ञानिकों ने पता लगा लिया है। हाल ही हुए एक अध्ययन में ये कहा गया है कि कोरोना वायरस पतली तरल परतों से चिपककर सतह पर लंबे समय जीवित बना रहता है। यह शोध आईआईटी मुंबई के शोधकर्ताओं ने किया है। इस अध्ययन रिपोर्ट को 'फिजिक्स ऑफ फ्लूइड्स' नामक पत्रिका में भी प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि विभिन्न सतहों पर कोरोना वायरस के जीवित बने रहने से संबंधित यह जानकारी कोविड-19 पर नियंत्रण में मदद कर सकती है।
2 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
शोधकर्ताओं का कहना है कि हाल में हुए प्रयोगों में यह पाया गया है कि सांस के जरिए निकले सामान्य कण जहां कुछ सेकेंड के भीतर ही सूख जाते हैं, वहीं कोरोना वायरस लंबे समय तक अस्तित्व में बना रहता है। उन्होंने शोध में इस बात का भी उल्लेख किया है कि किस तरह नैनोमीटर- तरल परत 'लंदन वान डेर वाल्स फोर्स' की वजह से सतह से चिपकती है और इसी कारक की वजह से कोरोना वायरस घंटों तक किसी सतह पर जिंदा रह पाता है।
3 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर रजनीश भारद्वाज कहते हैं कि छोटी बूंद के अंदर वायरस का अस्तित्व इस बात पर निर्भर करता है कि यह कितनी तेजी से सूखता है। आईआईटी बॉम्बे के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर रजनीश के मुताबिक, जब कोई माध्यम नहीं होता है, तो बूंदों के वाष्पीकरण के कारण वायरस के जिंदा रहने की संभावना बहुत कम होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
4 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं की टीम में शामिल प्रोफेसर अमित अग्रवाल कहते हैं कि हमारे अध्ययन से पता चलता है कि स्मार्टफोन स्क्रीन और लकड़ी जैसी सतहों को कांच और स्टील की सतहों की तुलना में अधिक बार साफ करने की जरूरत होती है, क्योंकि कांच या स्टील जैसी सतहों की तुलना में इन सतहों के वाष्पीकरण का समय 60 फीसदी तक धीमा होता है।
विज्ञापन
5 of 6
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
प्रोफेसर रजनीश भारद्वाज के मुताबिक, मुंबई की तुलना में दिल्ली में उच्च तापमान कोरोना के संक्रमण दर को धीमा कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी है कि एक संभावना है कि नमी वायरस को लंबे समय तक बूंदों में जीवित रहने में मदद कर सकती है। उन्होंने उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मास्क का उपयोग करने के लिए कड़े नियम को लागू करने का अधिकारियों से आग्रह किया है।
सबसे विश्वसनीयहिंदी न्यूज़वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ेंलाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसेहेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health and fitness news), लाइवफैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्टफूड न्यूज़इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) औरयात्रा (travel news in Hindi) आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।