देश में कोरोना संक्रमण के मामले कम तो आ रहे हैं, लेकिन उतार-चढ़ाव जारी है। पिछले 24 घंटे में 62 हजार से अधिक नए मामले सामने आए हैं, जबकि बुधवार को 67 हजार से अधिक नए मरीज मिले थे। फिलहाल देश में संक्रमितों की संख्या दो करोड़ 97 लाख से अधिक है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कोरोना के उपचाराधीन मरीजों की संख्या आठ लाख से भी कम है, वही मरीजों के ठीक होने की दर 96 फीसदी से अधिक हो गई है। लेकिन यहां समस्या पोस्ट कोविड सिंड्रोम की भी है, यानी कोरोना से ठीक होने के बाद भी काफी संख्या में लोग बीमार पड़ रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम में लोगों को किडनी में भी समस्या आ रही है। इसलिए वायरस से सतर्क रहने की जरूरत है। आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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कोरोना: पोस्ट कोविड सिंड्रोम में लोगों को किडनी में भी आ रही समस्या, रहें सावधान
Fri, 18 Jun 2021 03:18 PM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 18 Jun 2021 03:18 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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वायरस जब म्यूटेट होता है तो एक स्ट्रेन से दूसरे स्ट्रेन में बदलने में कितना वक्त लगता है?
- दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार कहते हैं, 'सार्स कोविड-19 वायरस एक आरएनए वायरस है। हम जानते हैं कि इंफ्लूएंजा वायरस, फ्लू वायरस होते हैं, ये भी म्यूटेट होते हैं। वायरस जब रेप्लिकेट होता है, तब वह म्यूटेट होता है और रेप्लिकेट के साथ होस्ट यानी मानव शरीर में जब इम्यूनिटी बन जाती है, तो वह शरीर में सर्वाइव (जीवित रहने) करने के लिए बहुत तेजी से बदलाव लाता है, ताकि इम्यूनिटी से बच सके। कोविड के अंदर एक ग्लाइकोप्रोटीन होता है, यह आउटर प्रोटीन होता है और ज्यादातर वैरिएशंस इसी में देखी जा रही हैं। दूसरी लहर सबसे घातक इसलिए हुई, क्योंकि डेल्टा प्लस वैरिएंट की वजह से डबल म्यूटेशन आया था। इसकी दूसरे को संक्रमित करने की क्षमता 40-70 प्रतिशत ज्यादा थी। हालांकि इन सबसे बचने का वही उपाय है, मास्क लगाएं और वैक्सीन लगवाएं।'
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पोस्ट कोविड सिंड्रोम में लोगों को किडनी में भी समस्या आ रही है, इसे कैसे देखते हैं?
- दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के डॉ. अनूप कुमार कहते हैं, 'जब वायरस का अटैक (हमला) होता है तो अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट (ऊपरी श्वसन पथ) सिस्टम पर जाता है। उसके बाद फेफड़ों को प्रभावित करता है, उसके बाद मल्टीपल सिस्टम पर असर करता है, जिसमें किडनी भी आती है। वायरस के साइटोकाइन निकलते हैं, जो कि शरीर में ब्लड क्लॉट बढ़ा देते हैं। ऐसे में किडनी की ब्लड सप्लाई रुकने लगती है, उसके अलावा उसमें इंफ्लेमेशन शुरू हो जाता है। इसी वजह से किडनी में समस्या आने लगती है और कई बार ठीक होने के बाद भी इसका असर बना रहता है। इस पर बहुत ध्यान देने की जरूरत होती है।'
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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अगर किसी का किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है, तो कब तक वैक्सीन लगवा सकते हैं?
- डॉ. अनूप कुमार कहते हैं, 'अगर किसी का ट्रांसप्लांट हो गया है तो कई दवाइयां चलती हैं, स्टेरॉयड आदि, ऐसे में तीन महीने के बाद वैक्सीन लगवाएं। इस समय तक स्टेरॉयड का असर लोवर लेवल पर आ जाता है। अगर अभी ट्रांसप्लांट नहीं हुआ है, सांस नहीं फूल रही है, बुखार नहीं है यानी स्थिर हैं, तो वैक्सीन लगवा सकते हैं।'
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अभी जिस तरह से लोग अनलॉक में बाहर आ रहे हैं, उससे तीसरी लहर में और खतरा हो सकता है?
- डॉ. अनूप कुमार कहते हैं, 'जिस तरह से पहली लहर के बाद देखा गया कि लोगों ने मास्क लगाना छोड़ दिया था। वह बेपरवाह हो गए थे, उसके बाद भयंकर दूसरी लहर सामने आ गई। अब जब दूसरी लहर का पीक जा रहा है, तो हमें बिल्कुल लापरवाही नहीं करनी है। बाहर निकलें, अपने काम को करें, लेकिन जो कोविड के खिलाफ नियम बनाए गए हैं, उनका पालन करें, अन्यथा तीसरी लहर आ सकती है और हो सकता है लापरवाही से काफी हानिकारक भी हो जाए।'