कोरोना संक्रमण के मामलों में जिस तरह से उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है, उससे यह लग नहीं रहा कि यह महामारी इतनी जल्दी खत्म होने वाली है। देश के कई राज्यों में संक्रमण के मामले बहुत ही कम आ रहे हैं, जबकि कई राज्यों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसपर दिल्ली स्थित आरएमएल अस्पताल के डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'वायरस अभी हमारे बीच में ही है, यह कहीं गया नहीं है। कुछ राज्यों में कोरोना के केस बढ़ने का कारण, पीछे जो दो त्योहार हुए, वो हैं। उनमें लोगों ने मिलना-जुलना काफी किया और कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर को छोड़ दिया। इ्सी वजह से वायरस एक से दूसरे में फैल गया। फेस्टिवल जरूर मनाएं, लेकिन सुरक्षित तरीके से। बाजार या भीड़भाड़ वाली जगह न जाएं और कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर को अपनाएं।' आइए जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ की सलाह: कोरोना में ऐसी रखें अपनी लाइफस्टाइल, थोड़ी सी भी लापरवाही पड़ सकती है भारी
Fri, 27 Aug 2021 09:11 AM IST
सोनू शर्मा
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 27 Aug 2021 09:11 AM IST
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कोरोना काल में लोगों की जीवनशैली
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कोरोना में लोगों को अपनी लाइफस्टाइल को कैसे एडजस्ट करना चाहिए?
- डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'जो लोग कंप्यूटर पर काम करते हैं, उनके लिए दिक्कत है। उन्हें काफी लंबे समय तक बैठे रहना पड़ता है। इसका तरीका यह है कि हर 50 मिनट के बाद 10 मिनट का ब्रेक जरूर लें। उन 10 मिनट में आप अपने रूप में टहल सकते हैं। अपने हाथ की, पैरों की या गर्दन की एक्सरसाइज कर सकते हैं। काम के बीच में ब्रेक देना बहुत जरूरी है।'
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की चीफ साइंटिस्ट ने कहा है कि भारत पेंडेमिक से एंडेमिक की ओर बढ़ रहा है, क्या कहेंगे?
- डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'एक साथ जब बहुत सारे केस आते हैं, उसे हम पेंडेमिक स्टेज कहते हैं। जब हमारी नेचुरल (प्राकृतिक) इम्यूनिटी हो या जब ज्यादा संख्या इम्यून होती चली जाती है, तब वायरस फैलना कम हो जाता है। जब छोटे-छोटे केस आते हैं, वह एंडेमिक स्टेज होती है। इसका कहीं न कहीं कारण इम्यूनिटी बढ़ना होता है। भले ही उन्होंने यह स्टेटमेंट (बयान) दिया हो, लेकिन हमें लापरवाही नहीं करनी है। जब तक पूरे देश में केस कम होने शुरू न हों और वैक्सीन न लग जाए, तब तक सावधानी रखें।'
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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लोग वैक्सीन का चुनाव कर रहे हैं, उसमें अच्छी-बुरी देख रहे हैं, ऐसे लोगों को क्या कहेंगे?
- डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'सभी वैक्सीन सुरक्षित हैं। जो भी वैक्सीन उपलब्ध है या जो आपके एरिया (इलाके) में मिल रही है, उसे बिना किसी झिझक के लगवा लें। सभी वैक्सीन समान रूप से सुरक्षा प्रदान करेंगी और उससे कोई खतरा होने वाली बात भी नहीं है।'
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय
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अब बच्चों को वैक्सीन लगाई जाएगी, इसके बारे मे क्या कहेंगे?
- डॉ. ए. के. वार्ष्णेय कहते हैं, 'बच्चों के लिए जायकोव-डी वैक्सीन आई है, यह दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन है। इसमें जो बच्चों पर ट्रायल हुआ, उसमें 88 प्रतिशत एफिकेसी (प्रभावकारिता) पाई गई, मॉडरेट (मध्यम) केस में 65 प्रतिशत और सीवियर (गंभीर) केस में 100 प्रतिशत एफिकेसी (प्रभावकारिता) पाई गई है। यह 12 साल से ऊपर वालों को दी जाएगी। भारत सरकार ने इसे इमरजेंसी अप्रूवल (आपातकालीन मंजूरी) दे दिया है। जब तक वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक बच्चों को भी कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करना सिखाएं।'