दुनियाभर में फिलहाल कोरोना संक्रमण के मामले स्थिर दिखाई दे रहे हैं। भारत में भी स्थिति में काफी सुधार देखने को मिल रहा है, यही कारण है कि देश में एक बार फिर से स्कूल-कॉलेज और ऑफिस खुलने लगे हैं। वैक्सीनेशन का इसमें अहम योगदान माना जा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि वैक्सीन, कोरोना संक्रमण के गंभीर खतरे और उसके कारण होने वाली मौत से सुरक्षा देने में काफी मददगार हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों ने कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उन्हें लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए क्योंकि वैक्सीनेटेड लोगों में भी संक्रमण का खतरा हो सकता है।
कोरोनावायरस ब्रेक-थ्रू: वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी हो रहा है संक्रमण, सामने आई इसकी मुख्य वजह
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वैक्सीनेशन के बाद भी क्यों हो रहा है संक्रमण?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण के कुछ मामले जरूर सामने आए हैं, लेकिन अच्छी बात यह है कि लोगों में संक्रमण के लक्षण काफी हल्के देखने को मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक अन्य बीमारियों की तरह ही कुछ लोगों में वैक्सीन की दोनों डोज लेने के बाद भी संक्रमण को जोखिम हो सकता है। कोरोना के नए वैरिएंट्स, वैक्सीनेशन से शरीर में बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने में सफल हो रहे हैं, ऐसे में जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है उनमें दोबारा संक्रमण को जोखिम हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य कारक भी दोबारा संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। आइए उनके बारे में जानते हैं।
वैक्सीनेशन का समय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक देशभर में टीकाकरण अभियान को 8 महीने से अधिक का समय बीत चुका है। हाल में आए कई अध्ययनों से पता चलता है कि वैक्सीनेशन कराने के छह से आठ महीने के बाद शरीर में बनीं एंटीबॉडीज का स्तर कम होने लगता है। वैक्सीनेशन के बाद संक्रमण के खतरे को बढ़ाने में टीकाकरण के बाद बीत चुके समय को भी एक कारक के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इसका खतरा ज्यादातर इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड लोगों में ही देखा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक समय के साथ एंटीबॉडीज का स्तर भले ही कम हो जाता हो लेकिन वैक्सीन फिर भी लोगों को सुरक्षित रखने में कारगर है।
कोरोना के नए वैरिएंट्स ने बढ़ा दी है चिंता
अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स, मूल कोरोना वायरस से ज्यादा खतरनाक और संक्रामक हो सकते हैं। यह शरीर में बनी एंटीबॉडीज को आसानी से चकमा देने की भी क्षमता रखते हैं। कोरोना के डेल्टा, म्यू और लैम्बडा जैसे वैरिएंट्स को स्वास्थ्य विशेष कई मामलों में बेहद खतरनाक मान रहे हैं। कोरोना के नए वैरिएंट्स के खतरे को देखते हुए वैक्सीन निर्माता टीके के अपग्रेटेड वर्जन को तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा कई अध्ययनों पता चला है कि बूस्टर डोज भी इस समस्या को कम करने में सहायक हो सकती है।
ऐसे लोगों को विशेष सावधान रहने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह से टीकाकरण के बाद भी कोविड-19 के जोखिम सामने आए हैं, ऐसे में उन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी की आवश्यकता है जो इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड हैं। मधुमेह, हृदय और फेफड़ों की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को वैक्सीनेशन के बाद भी वैसे ही सुरक्षा के उपायों को प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है जैसा कि वह पहले करते आ रहे थे। इसके अलावा सभी लोगों को वैक्सीनेशन के बाद भी मास्क लगाने, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। हमें यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए- वैक्सीन सिर्फ बीमारी की गंभीरता को कम कर सकती है, संक्रमण से सुरक्षित रहने की जिम्मेदारी हमारी खुद की ही है।
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नोट: यह लेख अध्ययनों से प्राप्त जानकारियों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।