स्वस्थ जीवन के लिए आहार और निद्रा, दोनों बेहद आवश्यक माने जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इन दोनों में किसी तरह की कमी, आपके बीमार होने के खतरे को कई गुना तक बढ़ा देती हैं। यही कारण है कि इन दोनों का सामंजस्य बनाकर रखना बेहद आवश्यक माना जाता है। हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने कम नींद लेने वाले लोगों को सावधान किया है। अध्ययन के निष्कर्ष में शोधकर्ताओं ने बताया है कि महज तीन रातों तक लगातार अच्छी नींद न ले पाने का आपके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
सावधान: आपको शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार बना रही है यह छोटी सी गलती, अध्ययन में दावा
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नींद और सेहत का कनेक्शन
खराब नींद का सेहत पर कितना गंभीर असर पड़ सकता है? इस बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं ने आठ रातों तक छह घंटे से कम की नींद लेने वाले लोगों पर अध्ययन किया। विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों को रोजाना न्यूनतम छह घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। इस संबंध में दक्षिण फ्लोरिडा विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एजिंग स्टडीज में सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की प्रमुख लेखक सूमी ली कहती हैं, अध्ययन के पहली ही रात नींद न पूरी कर पाने वाले लोगों में कई तरह के लक्षण देखे गए। तीन दिनों तक खराब नींद के कारण लोगों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में कई तरह की समस्याएं आ गईं।
कुछ दिन ही नींद न पूरी होने के हो सकते हैं गंभीर दुष्प्रभाव
एनल्स ऑफ बिहेवियरल मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ता बताते हैं, कुछ दिनों तक लगातार खराब नींद के कारण पांचवे-छठे दिन तक लोग इसके अभ्यस्त जरूर हो गए लेकिन छठे दिन प्रतिभागियों ने शारीरिक लक्षणों में गंभीरता के बारे में सूचित किया। प्रोफेसर सूमी ली कहती हैं, ''हम में से कई लोगों को लगता है कि हफ्ते भर कम सो कर हम वीकेंड में इस नींद को पूरा कर सकते हैं, पर उनकी यह सोच न सिर्फ गलत है, साथ ही स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक भी है। हमें अध्ययन में पता चला है कि केवल एक रात की नींद की कमी दैनिक कामकाज के साथ शारीरिक और मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ सकता है बुरा असर
अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में मध्यम आयु वर्ग के स्वस्थ और अच्छी तरह से शिक्षित करीब दो हजार लोगों के डेटा का अध्ययन किया गया। इनमें से 42 फीसदी लोग ऐसे थे जिन्हें कुछ दिनों तक अपनी रोजाना की नींद से सिर्फ एक से डेढ़ घंटे तक कम सोने को कहा गया। अध्ययन पूरा होने पर प्रतिभागियों ने नींद की कमी के परिणामस्वरूप गु्स्सा, घबराहट, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में सूचित किया। इसके अलावा प्रतिभागियों ने बताया कि उनमें ऊपरी श्वसन संबंधी समस्याएं, दर्द, गैस की समस्याओं के साथ कई अन्य स्वास्थ्य संबंधी विकार भी काफी बढ़ गए हैं।
प्रोफेसर ली के नेतृत्व में किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि रोजाना सिर्फ 16 मिनट की नींद कम लेने का असर दैनिक कार्यों के प्रदर्शन पर पड़ सकता है। उस अध्ययन के निष्कर्ष में बताया गया कि नींद में थोड़ी सी भी कमी दिमाग की सक्रियता को कम कर सकती है। इसके चलते लोगों में तनाव की समस्या बढ़ने के साथ अन्य कई तरह के विकार जन्म ले सकते हैं। प्रोफेसर ली कहती हैं, शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए सभी लोगों को रोजाना सोने के लिए छह घंटे से अधिक का समय जरूर निकालना चाहिए। नींद में कमी या इसमें बाधा आपको गंभीर रूप से बीमार बना सकती है।
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स्रोत और संदर्भ:
Naturally Occurring Consecutive Sleep Loss and Day-to-Day Trajectories of Affective and Physical Well-Being
अस्वीकरण नोट: यह लेख एनल्स ऑफ बिहेवियरल मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।