कोरोना वायरस संक्रमण का आंकड़ा हर दिन बढ़ रहा है। सांस से जुड़ी बीमारियां फैलाने वाले कोरोना परिवार के इस नए वायरस Sars Cov2 ने देश में तबाही मचा रखी है। इसके इलाज के लिए अबतक न तो कोई दवा ढूंढी जा सकी है, न ही इसकी वैक्सीन तैयार हो पाई है। हालांकि वैज्ञानिक जल्द ही वैक्सीन उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर कोरोना वायरस के जीन, सिक्वेंस, स्ट्रेन, लक्षणों जैसे विभिन्न पहलुओं पर वैज्ञानिक रिसर्च कर रहे हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के नए ग्रुप का पता लगाया है, जो देश में 41 फीसदी संक्रमण फैलाने का जिम्मेवार है।
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कोरोना वायरस के इस ग्रुप ने मचाई देश में तबाही, 41 फीसदी संक्रमण इसी ने फैलाया: रिसर्च
Fri, 05 Jun 2020 11:04 AM IST
निलेश कुमार
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निलेश कुमार
Updated Fri, 05 Jun 2020 11:04 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
रिसर्च (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
तमिलनाडु और तेलंगाना में ज्यादा पाए गए
- हैदराबाद के सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इस नए ग्रुप का पता लगाया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्रुप के वायरस खास तौर पर तमिलनाडु और तेलंगाना के संक्रमित मरीजों में पाए गए है। मालूम हो कि तमिलनाडु कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले राज्यों में शामिल है।
Research
- फोटो : Pixabay
क्लैड ए3-आई
- वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस ग्रुप में मौजूद कोरोना वायरस थोड़े अलग हैं। उन्होंने वायरस के इस ग्रुप को क्लैड ए3-आई नाम दिया गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, देशभर में जिस कोरोना वायरस से तेजी से संक्रमण फैल रहा है, उनमें वायरस का ये समूह 41 फीसदी तक जिम्मेवार है।
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रिसर्च
- फोटो : Pixabay
64 जीनोम का अध्ययन
- सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्युलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) अपने इस शोध के संबंध में ट्वीट कर जानकारी दी है। शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के 64 जीनोम सिक्वेंस का अध्ययन किया है। उनके मुताबिक, यह कोरोना की ताजा जीनोम रिपोर्ट है।
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Research
वायरस ग्रुप कितना खतरनाक
- वैज्ञानिकों के मुताबिक, अब तक वायरस के इस समूह की पहचान नहीं हो पाई थी, जो देश में तेजी से फैल रहा है। शोधकर्ताओं के मुताबिक वायरस का यह समूह कितना खतरनाक है, इस बारे में परिणाम सामने नहीं आए हैं और आगे शोध की जरूरत है।