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Climate Change: जलवायु परिवर्तन का नया खतरा, सभी माता-पिता को अलर्ट कर रही है अध्ययन की ये रिपोर्ट

Fri, 24 Jul 2026 06:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 24 Jul 2026 06:04 PM IST
सार

गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी सहने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन के इस बेहद संवेदनशील दौर में बढ़ता तापमान भविष्य में बच्चों के व्यवहार पर भी असर डालता है।    
 

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children exposed to extreme heat during pregnancy and the early months linked to slower brain development
बच्चों का दिमागी विकास खतरे में - फोटो : Amarujala.com/AI

जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जिस तरह से दुनियाभर में तापमान बढ़ रहा है, इसने कई तरह के जोखिम खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ती गर्मी इंसानों की सेहत बिगाड़ रही है। गर्भवती महिलाओं, नवजात और छोटे बच्चों में इसका सबसे ज्यादा संकट देखा जा रहा है।



हाल के वर्षों में दुनिया के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव देखने को मिली हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। लंबे समय तक रहने वाली गर्मी, उमस भरा मौसम और बढ़ती हीट इंडेक्स जैसी परिस्थितियां गर्भावस्था के दौरान कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक गर्मी शरीर के सामान्य कार्यों को प्रभावित कर सकती है, जिससे गर्भवती महिलाओं में थकान, डिहाइड्रेशन, ब्लड प्रेशर में बदलाव और हीट एक्सहॉशन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।  कुछ शोधों में इसे समय से पहले प्रसव, जन्म के समय कम वजन और अन्य गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं को बढ़ाने वाला बताया गया है।

इसी से संबंधित एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि भीषण गर्मी सहने वाले बच्चों का दिमागी विकास भी प्रभावित हो सकता है।

children exposed to extreme heat during pregnancy and the early months linked to slower brain development
ब्रेन हेल्थ पर क्या असर होता है? - फोटो : Freepik.com

छोटे बच्चों के लिए बढ़ती गर्मी खतरनाक

अध्ययनकर्ताओं ने बताया, नवजात और छोटे बच्चों के लिए बढ़ती गर्मी बहुत खतरनाक हो सकती है। उनके शरीर में तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए तेज गर्मी उनके लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती है।

जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम, पर्यावरण और शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया है। नए अध्ययन में संकेत मिले हैं कि गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी सहने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो रहा है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन के इस बेहद संवेदनशील दौर में बढ़ता तापमान भविष्य में बच्चों के व्यवहार पर भी असर डालता है।

children exposed to extreme heat during pregnancy and the early months linked to slower brain development
बच्चों के ब्रेन डेवलमेंट पर असर - फोटो : Freepik.com

अध्ययन में क्या पता चला?

एनवायरमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित अध्ययन बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया है। 
 

  • शोध में पाया गया कि अत्यधिक गर्मी का प्रभाव मस्तिष्क के उस हिस्से पर पड़ता है जो शरीर से मिलने वाले संकेतों को संसाधित (प्रोसेस्ड) करने और उन्हें मस्तिष्क के अन्य भागों तक पहुंचाने का काम करता है। 
  • यही हिस्सा सीखने भावनाओं को समझने, निर्णय लेने और व्यवहार को नियंत्रित करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। 
  • वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इसका विकास सामान्य गति से नहीं हो पाता, तो आगे चलकर बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं। 
  • उनमें किशोरावस्था पड़ तक पहुंचने पर चिड़चिड़ापन, लिए आक्रामक व्यवहार और नियमों का विव उल्लंघन करने जैसी प्रवृत्तियां अपेक्षाकृत बढ़ जाता है।
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children exposed to extreme heat during pregnancy and the early months linked to slower brain development
गर्मी का गर्भावस्था पर असर - फोटो : Adobe Stock

गर्भावस्था पर गर्मी का असर

वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिकगर्मी गर्भवती महिला के शरीर में तनाव संबंधी हार्मोन बढ़ा सकती है। इसके साथ ही प्लेसेंटा की कार्यप्रणाली, भ्रूण तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाले जैविक संकेत भी प्रभावित हो सकते हैं। गर्मी से होने वाली सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं।

अध्ययन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि कम तापमान या ठंड के संपर्क में रहने से बच्चों के मस्तिष्क पर ऐसा कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार समस्या विशेष रूप से लंबे समय तक रहने वाली अत्यधिक गर्मी से जुड़ी दिखाई दी।





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स्रोत: 
Early life ambient temperature and brain volumes change throughout childhood


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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