जलवायु परिवर्तन वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। जिस तरह से दुनियाभर में तापमान बढ़ रहा है, इसने कई तरह के जोखिम खड़े कर दिए हैं। वैज्ञानिक लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बढ़ती गर्मी इंसानों की सेहत बिगाड़ रही है। गर्भवती महिलाओं, नवजात और छोटे बच्चों में इसका सबसे ज्यादा संकट देखा जा रहा है।
Climate Change: जलवायु परिवर्तन का नया खतरा, सभी माता-पिता को अलर्ट कर रही है अध्ययन की ये रिपोर्ट
गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी सहने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन के इस बेहद संवेदनशील दौर में बढ़ता तापमान भविष्य में बच्चों के व्यवहार पर भी असर डालता है।
छोटे बच्चों के लिए बढ़ती गर्मी खतरनाक
अध्ययनकर्ताओं ने बताया, नवजात और छोटे बच्चों के लिए बढ़ती गर्मी बहुत खतरनाक हो सकती है। उनके शरीर में तापमान को नियंत्रित करने की क्षमता पूरी तरह विकसित नहीं होती, इसलिए तेज गर्मी उनके लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकती है।
जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल मौसम, पर्यावरण और शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रह गया है। नए अध्ययन में संकेत मिले हैं कि गर्भावस्था और जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में अत्यधिक गर्मी सहने वाले बच्चों के मस्तिष्क का विकास प्रभावित हो रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जीवन के इस बेहद संवेदनशील दौर में बढ़ता तापमान भविष्य में बच्चों के व्यवहार पर भी असर डालता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
एनवायरमेंट इंटरनेशनल में प्रकाशित अध्ययन बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किया गया है।
- शोध में पाया गया कि अत्यधिक गर्मी का प्रभाव मस्तिष्क के उस हिस्से पर पड़ता है जो शरीर से मिलने वाले संकेतों को संसाधित (प्रोसेस्ड) करने और उन्हें मस्तिष्क के अन्य भागों तक पहुंचाने का काम करता है।
- यही हिस्सा सीखने भावनाओं को समझने, निर्णय लेने और व्यवहार को नियंत्रित करने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है।
- वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि इसका विकास सामान्य गति से नहीं हो पाता, तो आगे चलकर बच्चों के व्यवहार में बदलाव देखने को मिलते हैं।
- उनमें किशोरावस्था पड़ तक पहुंचने पर चिड़चिड़ापन, लिए आक्रामक व्यवहार और नियमों का विव उल्लंघन करने जैसी प्रवृत्तियां अपेक्षाकृत बढ़ जाता है।
गर्भावस्था पर गर्मी का असर
वैज्ञानिकों का मानना है कि अत्यधिकगर्मी गर्भवती महिला के शरीर में तनाव संबंधी हार्मोन बढ़ा सकती है। इसके साथ ही प्लेसेंटा की कार्यप्रणाली, भ्रूण तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति तथा मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाले जैविक संकेत भी प्रभावित हो सकते हैं। गर्मी से होने वाली सूजन और ऑक्सीडेटिव तनाव भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभा सकते हैं।
अध्ययन की एक महत्वपूर्ण बात यह रही कि कम तापमान या ठंड के संपर्क में रहने से बच्चों के मस्तिष्क पर ऐसा कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। शोधकर्ताओं के अनुसार समस्या विशेष रूप से लंबे समय तक रहने वाली अत्यधिक गर्मी से जुड़ी दिखाई दी।
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स्रोत:
Early life ambient temperature and brain volumes change throughout childhood
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