दुनियाभर में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट इस समय लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है। कई देशों में हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं, यूरोपीय देशों में कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों के कारण लॉकडाउन जैसे हालात बन गए हैं। भारत के संदर्भ में बात करें तो पिछले दिनों यहां भी कोरोना के मामलों में तेजी से उछाल देखने को मिला है। आलम यह है कि देश में अब तक 350 से अधिक लोगों में इस बेहद संक्रामक वैरिएंट से संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि वैक्सीन की दो डोज गंभीर संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को कम कर सकती हैं, वहीं कुछ अध्ययनों में कहा जा रहा है कि बूस्टर खुराक देकर लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा सकता है।
बड़ा सवाल: क्या बूस्टर डोज भी नहीं है ओमिक्रॉन से सुरक्षा की गारंटी? डॉक्टरों ने साझा की चौंकाने वाली जानकारी
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वैक्सीनेटेड लोगों में संक्रमण के मामले
दिल्ली के लोक नायक अस्पताल में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमितों का इलाज कर रहे डॉक्टर बताते हैं, ज्यादातर रोगी सामान्य उपचार विधि जैसे मल्टी-विटामिन्स और पैरासिटामोल से ही ठीक हो जा रहे हैं। रोगियों में लक्षण भी डेल्टा वैरिएंट की तुलना में हल्के देखे जा रहे हैं, हालांकि एक बड़ी बात यह सामने आई है कि ज्यादातर संक्रमितों का पूरी तरह से वैक्सीनेशन हो चुका है, यानी कि वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों में भी ओमिक्रॉन संक्रमण का खतरा बना हुआ है।
बूस्टर डोज वाले भी हो रहे हैं संक्रमित
एक रिपोर्ट में दिल्ली स्थित लोक नायक अस्पताल के एमडी डॉ सुरेश कुमार बताते हैं, अस्पताल में आ रहे ज्यादातर संक्रमित, हाल ही में विदेश से लौटे हैं, इनमें से ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज मिल चुकी है। वहीं तीन से चार ऐसे लोगों में भी संक्रमण की पुष्टि हुई है, जिन्होंने इंग्लैंड में बूस्टर डोज भी ली है। इस आधार पर अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि क्या बूस्टर डोज भी ओमिक्रॉन से सुरक्षा देने की गारंटी नहीं है? देश में बूस्टर डोज को लेकर जोरों-शोरों से चर्चा की जा रही है।
एस्ट्राजेनेका की बूस्टर वैक्सीन प्रभावी
वहीं दूसरी तरफ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नए अध्ययन में पाया गया है कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की बूस्टर खुराक कोरोनोवायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ सुरक्षा दे सकती है। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस शॉट को देकर एंटीबॉडीज के स्तर को बढ़ाने में सफलता मिल सकती है, जो लोगों को कोरोना के इस खतरे को खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
बढ़ सकती है एंटीबॉडीज का स्तर
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया गया कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की तीसरी खुराक प्राप्त करने के एक महीने बाद लोगों में उस स्तर की एंटीबॉडीज देखने को मिली है जो ओमिक्रॉन वैरिएंट को बेअसर करने में सक्षम हो सकती है। इसके अलावा मॉडर्ना या फाइजर वैक्सीन को लेकर किए गए अध्ययन में भी पाया गया है कि इनकी तीसरी खुराक ओमिक्रॉन संस्करण के खिलाफ अच्छी सुरक्षा प्रदान कर सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है।
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