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बाइपोलर डिसऑर्डर: एक ऐसी बीमारी, जो बन सकती है आत्महत्या की वजह, ऐसे लक्षण दिखें तो हो जाएं सचेत

Sun, 04 Oct 2020 01:03 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sun, 04 Oct 2020 01:03 PM IST
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Bipolar disorder a disease that can cause suicide know the symptoms
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

अनिल( बदला हुआ नाम) जब तकरीबन 11-12 साल के रहे होंगे तो उन्हें इतना गुस्सा आया कि उन्होंने अपनी मां पर हाथ उठा दिया। अनिल का ये बर्ताव उनकी मां ने पहली बार नहीं देखा था। वो पहले भी गुस्से में आकर चीजें फेंक देते थे, छोटे भाई को धक्का देना या थप्पड़ मारना भी होता था। कभी इतने हिंसक हो जाते थे कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। स्कूल से भी दूसरे दोस्तों के साथ झगड़े और मारपीट की शिकायत आती थी। वहीं कभी उनके मूड का दूसरा रूप भी देखने को मिलता था, जब वो एकदम शांत हो जाते थे, किसी भी बात का जवाब ही नहीं देते थे। कई बार बिना किसी कारण के रोने लग जाते थे और खुद को कमरे में बंद कर लेते थे।  



पहले तो मां ने बच्चा समझ कर इस बर्ताव को नजरअंदाज किया, फिर लगा कि इस उम्र में हार्मोन में बदलाव होना शायद इसकी वजह है। लेकिन धीरे-धीरे मां को ये अंदाजा तो होने लगा था कि अनिल का बर्ताव कुछ अलग है। उनके मूड के उतार-चढ़ाव में उन्हें एक पैटर्न दिखने लगा था और ऐसा अब बार-बार हो रहा था। जिस दिन अनिल ने उन पर हाथ उठाया तो वो समझ गई अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। वो डरने लगी थीं कि कहीं आवेश में आकर उनका बेटा खुद को ही नुकसान न पहुंचा ले। वे घबराने लगीं और उन्होंने डॉक्टरी सलाह लेने की सोची। मनोचिकित्सक डॉक्टर मनीषा सिंघल से बात करने पर मां को पता चला कि उनके बेटे को बाइपोलर डिसऑर्डर है। 

Bipolar disorder a disease that can cause suicide know the symptoms
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

क्या है बाइपोलर डिसऑर्डर?

डॉक्टरों के अनुसार, बाइपोलर डिसऑर्डर एक तरह का मानसिक विकार होता है जो डोपामाइन हार्मोन में असंतुलन होने के कारण होता है। इस असंतुलन की वजह से एक व्यक्ति के मूड या बर्ताव में बदलाव आने लगते हैं। अगर कोई व्यक्ति बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित होता है तो उसे मेनिया या डिप्रेशन के दौरे पड़ते हैं यानी उसका मूड या तो बहुत हाई या लो रहता है। 

बाइपोलर वन में मेनिया यानी तेजी के दौरे आते हैं। इस डिसऑर्डर में व्यक्ति बड़ी-बड़ी बातें करता है, लगातार काम करता है, उसे नींद की न के बराबर जरूरत महसूस होती और उसके बावजूद वो चुस्त-दुरुस्त रहता है। इस डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खर्च करता है और कोई भी फैसला बिना सोचे समझे ले लेता है। उसका मन एक जगह पर स्थिर नहीं रहता है। 

Bipolar disorder a disease that can cause suicide know the symptoms
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

मनोचिकित्सक डॉक्टर पूजाशिवम जेटली इसी डिसऑर्डर से पीड़ित एक मरीज का जिक्र करते हुए बताती हैं कि वो व्यक्ति कारोबारी परिवार से थे और उन्होंने बिजनेस में कई अतार्किक फैसले लेने शुरू कर दिए थे। वो बहुत बड़ी-बड़ी बातें करने लगे थे और बहुत खर्चीले हो गए थे। उन्हें नींद आनी बंद हो गई थी और खुद को सबसे ताकतवर समझने लगे थे। इन सबके साथ ही उनकी 'सेक्स ड्राइव' भी बढ़ गई थी। जब उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वहां भी वो लोगों को नौकरी देने और अपनी संपत्ति उनके नाम करने जैसी बड़ी-बड़ी बातें करते थे। वो बताती हैं कि ऐसे लोगों का वास्तविकता से नाता बिल्कुल टूट जाता है। ऐसे में अगर ऐसे लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा रहते हैं तो उसे 'मेनिया' या तेजी का दौरा कहा जाता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

टाइप टू बाइपोलर(हाइपोमेनिया) - इसमें उदासी के दौरे आते है। इस डिसऑर्डर में मन उदास रहता है और बिना किसी कारण के रोते रहने का मन करने, किसी काम में बिल्कुल मन नहीं लगने, नींद न आने के बावजूद बिस्तर पर पड़े रहने का मन करने, नींद बहुत कम या ज्यादा आना जैसे लक्षण होते हैं। इससे पीड़ित मरीज ऊर्जा में कमी महसूस करता है। इस डिसऑर्डर से प्रभावित लोग मिलना-जुलना बंद कर देते हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

कब सचेत हो जाना चाहिए?

हालांकि आम जीवन में आप और हम इसी तरह के भाव से अक्सर गुजरते होंगे, लेकिन इससे आप और हम दो या तीन दिन में उबर जाते हैं लेकिन अगर ऐसी स्थिति दो हफ्ते तक बनी रहती है तो ये हाइपोमेनिया में बदल सकता है। डॉक्टर मनीषा सिंघल के अनुसार, इनमें से अगर किसी भी लक्षण का दौरा एक बार पड़ता है तो समझ आ जाता है कि वो व्यक्ति बाइपोलर डिसऑर्डर का शिकार है। 

डॉक्टरों के अनुसार, बाइपोलर किसी भी उम्र के व्यक्ति में हो सकता है, लेकिन इस डिसऑर्डर के औसतन 20-30 की उम्र में ज्यादा मामले सामने आते हैं। हालांकि आजकल यह भी देखा जा रहा है कि अब 20 से कम उम्र में या 'अर्ली बाइपोलर डिसऑर्डर' के मामले भी सामने आ रहे हैं। 

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