कोरोना संक्रमण की रफ्तार पर काबू पाने के लिए भारत सरकार ने देश में टीकाकरण की रफ्तार को तेज कर दिया है। देश में अब तक 18.57 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाया जा चुका है। परिणामस्वरूप जिन हिस्सों में ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो चुका है, वहां पर कोरोना संक्रमण की रफ्तार भी कम होनी शुरू हो गई है। हालांकि मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक कुछ देशों में आबादी के अधिकतम हिस्से के टीकाकरण के बाद भी वहां संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते देखे जा रहे हैं, जबकि कुछ देशों में इसका बिल्कुल उल्टा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल आ रहे हैं कि क्या कोविड के कुछ टीके अन्य टीकों की तुलना में बेहतर काम कर रहे हैं? अगर हां, तो कोविड की कौन सी वैक्सीन सबसे ज्यादा प्रभावी है?
कोरोना: जानिए किस वैक्सीन के देखे जा रहे हैं सबसे प्रभावी परिणाम, क्या कुछ टीके ज्यादा असरदार हैं?
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टीकों के परिणाम में भिन्नता
हालिया मीडिया रिपोर्टस में कुछ देशों का जिक्र मिलता है, जहां वैक्सीनेशन के तुलनात्मक परिणाम एकदम अलग-अलग नजर आ रहे हैं। पहला- इज़राइल जैसे देश जहां टीकाकरण के चलते कोविड के नए मामलों में काफी कमी आई है जबकि सेशेल्स जैसे अन्य देश जहां अधिकतम लोगों का वैक्सीनेशन होने के बाद भी मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका एक मुख्य कारण विभिन्न प्रकार के टीकों को प्रयोग में लाना हो सकता है।
कौन सी वैक्सीन बेहतर?
विश्वस्तर पर टीकाकरण को लेकर प्राप्त साक्ष्य इंगित करते हैं कि मॉडर्ना और फाइजर जैसी वैक्सीन संक्रमण को रोकने में काफी प्रभावी साबित हो रही हैं। विशेषज्ञ इन टीकों को ले चुके लोगों में भविष्य में संचरण के खतरे को भी कम मान रहे हैं। इसके अलावा दुनियाभर में प्रयोग में लाई जा रही अन्य वैक्सीन बीमारी की गंभीरता और इससे होने वाली मौतों को तो कम कर सकती है लेकिन मॉडर्ना और फाइजर की तरह इनमें अन्य प्रभावी परिणाम कम देखे जा रहे हैं।
फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ मेडिसिन एंड पब्लिक हेल्थ में प्रोफेसर निकोलाई पेत्रोव्स्की कहते हैं, ''कुछ टीके, दूसरे की तुलना में बेहतर हैं, इस तरह की बातें शुरू होना स्वाभाविक है। हालांकि हमें जो सबसे महत्वपूर्ण बात याद रखनी है वह यह है कि ऐनी वैक्सीन इज बेटर दैन नथिंग- यानि वैक्सीन कोई भी हो, वह वैक्सीन न लगने से बेहतर ही है। संभव है कि कुछ टीके मृत्यु या गंभीर बीमारी के जोखिम को तो कम सकते हों पर संचरण को रोकने में उस स्तर पर कारगर न हों जितने की दूसरे हैं।
हर्ड इम्यूनिटी पर विशेषज्ञों की राय
फाइजर-बायोएनटेक के टीके लेने वाले इज़राइल के लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है यह वैक्सीन 90 फीसदी से अधिक एसिम्टोमैटिक मामलों को रोकने में भी प्रभावी हैं। इसपर सिडनी में न्यू साउथ वेल्स विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञानी रैना मैकइंटायर कहते हैं कि इस तरह के साक्ष्य इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इसी के आधार पर निर्धारित किया जा सकता है कि कोरोना संक्रमण के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी बनती दिख रही है या नहीं?