आर्थराइटिस की समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही है। इसका खतरा कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है। जोड़ों में होने वाली इस समस्या के कारण लोगों के लिए सामान्य रूप से चलना और दिनचर्या के आसान कामों को करना भी कठिन हो जाता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को आर्थराइटिस से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
सावधान: घुटनों में ही नहीं, हाथों-उंगलियों में भी हो सकता है आर्थराइटिस, ऐसे दर्द को अनदेखा करने की न करें भूल
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हाथों में आर्थराइटिस की दिक्कत
पैरों की तरह ही, हाथों में भी आर्थराइटिस की समस्या किसी को हो सकती है। डॉक्टर्स बताते हैं, हाथों में कई जोड़ होते हैं जिनमें गठिया की समस्या के विकसित होने का खतरा हो सकता है। यह आपके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो समय के साथ इसके गंभीर रूप लेने का भी जोखिम हो सकता है। हालांकि अगर शुरुआत में ही स्थिति को पहचान कर इसका इलाज कर लिया जाए तो इसकी जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
हाथों में आर्थराइटिस के लक्षणों की करें पहचान
पैरों की तरह हाथों में होने वाली आर्थराइटिस की समस्या भी तेज दर्द और सूजन का कारण बनती है। इसमें सुबह के समय हाथों में दर्द और जकड़न अधिक देखी जाती है। हाथों में आर्थराइटिस की समस्या उंगलियों के जोड़ों या फिर कलाइयों में हो सकती है। इस तरह के संकेतों पर सभी लोगों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है।
- दर्द के कारण कुछ भी उठाने में दिक्कत महसूस होना।
- उंगलियों को पूरी तरह से खोलने और बंद करने में परेशानी होना।
- प्रभावित हिस्से में तेज दर्द के साथ सूजन और लालिमा बनी रहना।
- लिखने या कंप्यूटर पर टाइप करने तक में तेज दर्द का एहसास होते रहना।
हाथों में आर्थराइटिस की पहचान और इलाज
लक्षणों के आधार पर स्थिति की सही पता लगाने के लिए डॉक्टर एक्स-रे जैसे परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। एक्स-रे में हड्डी के कार्टिलेज को होने वाली क्षति का पता लगाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ अन्य मार्करों की पहचान के लिए ब्लड टेस्ट भी कराने का आवश्यकता हो सकती है। उपचार के माध्यमों में थेरेपी और दवाइयों को प्रयोग में लाया जाता है जिससे कि लक्षणों को कंट्रोल कर के दर्द को कम करने में मदद मिल सकती है।
डॉक्टर्स कहते हैं वैसे तो आर्थराइटिस से बचाव नहीं किया जा सकता है, हालांकि कुछ कारक हैं जो इसके जोखिम को आपमें बढ़ा सकते हैं। लाइफस्टाइल को ठीक रखने के लिए नियमित रूप से योग-व्यायाम की आदत बनाएं, धूम्रपान से परहेज करें। कुछ समय से बने रहने वाले दर्द को हल्के में न लें और इसकी समय रहते इलाज कराएं।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।