छोटा-मोटा संक्रमण होते ही अगर आप भी एंटीबायोटिक दवा लेना शुरू कर देते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। पहले के भी कई अध्ययनों में दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के चलते एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खतरे को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि इसके जोखिम और भी गंभीर हो सकते हैं?
Alert: बच्चों के लिए इतना खतरनाक हो सकता है एंटीबायोटिक, सोचा भी नहीं होगा आपने; अध्ययन में डराने वाला खुलासा
फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों ने दो साल की उम्र से पहले एंटीबायोटिक्स ली थी, उनमें 12 साल की उम्र तक मोटापे (हाई बॉडी मास इंडेक्स) की आशंका 20 प्रतिशत अधिक देखी गई। मोटापा के कारण हृदय रोग-डायबिटीज सहित कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
बच्चों में मोटापा बढ़ा रही हैं ये दवाएं
एक नए अध्ययन में पाया गया है कि बचपन में संक्रमण से लड़ने वाली आम दवाओं के अधिक इस्तेमाल के कारण बच्चों में मोटापे की आशंका बढ़ सकती है।
फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों ने दो साल की उम्र से पहले एंटीबायोटिक्स ली थी, उनमें 12 साल की उम्र तक मोटापे (हाई बॉडी मास इंडेक्स) की आशंका 20 प्रतिशत अधिक देखी गई। वहीं जिन बच्चों ने इस उम्र तक कभी भी या फिर एंटीबायोटिक्स दवाओं का बहुत कम इस्तेमाल किया उनमें मोटापे का खतरा कम था।
इतना ही नहीं, दो साल से कम उम्र के जिन बच्चों को एंटीबायोटिक्स दी गई, उनमें पांचवी कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते अधिक वजन का जोखिम काफी अधिक था।
गले में खराश-संक्रमण के लिए होता है एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले यूके में हर साल 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को एंटीबायोटिक्स के लगभग 4 मिलियन (40 लाख) प्रिस्क्रिप्शन दिए जाते हैं। ये दवाएं आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण जैसे कि गले में खराश, निमोनिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस, त्वचा और कान के संक्रमण के इलाज के लिए दी जाती हैं।
विशेषज्ञों ने पहले भी एंटीबायोटिक्स की लिमिट तय करने की मांग की थी, इसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर इनका अधिक इस्तेमाल किया जाता रहा तो ये दवाएं समय के साथ अपनी शक्ति खो सकती हैं और एक समय ऐसा भी आ सकता है कि इनसे आम संक्रमणों का इलाज करना भी मुश्किल हो सकता है।
अब, फिनिश वैज्ञानिकों का कहना है कि दवा लेने से और भी स्वास्थ्य जोखिम हैं जिसे भी ध्यान में रखना चाहिए।
(वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा')
अध्ययन में क्या पता चला?
शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि 24 महीने तक के बच्चों को एंटीबायोटिक्स देने से 7 साल की उम्र तक बीएमआई अधिक हो सकता है। यह बाद के जीवन में और भी कई समस्याओं का कारण बन सकती है।
अध्ययन के लिए विशेषज्ञों ने फिनलैंड में 12 वर्ष की आयु तक 33,095 बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया। इनमें जीवन के पहले दो वर्षों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नजर रखी गई। शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान, जन्म के समय भी एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर भी नजर रखा।
निष्कर्ष में पाया गया कि गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान या जन्म के समय एंटीबायोटिक दवा लेने से बच्चे के वजन में कोई अंतर नहीं आया। हालांकि जिन बच्चों ने पहले दो वर्षों में ये दवाएं लीं उनमें मोटापे का जोखिम अधिक था।
डॉक्टर भी ये दवाएं लिखते समय बरतें सावधानी
फिनलैंड स्थित ओउलू विश्वविद्यालय के लेखकों ने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे छोटे बच्चों के लिए एंटीबायोटिक्स लिखते समय सावधानी बरतें, खासकर ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण के दौरान। इसके अलावा मात-पिता को भी खुद से छोटी-छोटी समस्याओं में इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर अलर्ट रहना चाहिए। ये बच्चों को मोटापे का शिकार बना सकती हैं, जिसके कारण भविष्य में उनमें हृदय रोग-डायबिटीज सहित कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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