स्ट्रोक, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। सेंटर फार डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक हर 40 सेकेंड में यूनाइटेड स्टेट्स में स्ट्रोक से एक व्यक्ति की मौत हो जाती है। भारत में भी स्ट्रोक एक बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इससे बचाव के लिए प्रयास करते रहना चाहिए। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण इसका जोखिम बढ़ता देखा गया है। इस बीच एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दिल्ली जैसे वायु प्रदूषण वाले शहरों में रहने वाले लोगों को अलर्ट किया है।
Alert: दिल्ली-एनसीआर वालों में स्ट्रोक का खतरा हो सकता है अधिक, घट रही है औसत आयु, जानिए क्या है इसका कारण
वायु प्रदूषण का सेहत पर असर
न्यूरोलॉजी जर्नल में वायु प्रदूषण के कारण होने वाले जोखिमों को लेकर अलर्ट किया गया है। अध्ययन के निष्कर्षों से मानव स्वास्थ्य पर इस खतरे के गहरे प्रभाव का पता चला है। रिपोर्ट के मुताबिक गैसीय और कणीय वायु प्रदूषकों के कारण स्ट्रोक और इसके कारण मृत्यु दर के बीच एक संबंध पाया गया है।
वायु प्रदूषण, वैश्विक स्तर पर बड़ा स्वास्थ्य जोखिम रहा है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि अगर पांच दिन भी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों का संपर्क रहें तो स्ट्रोक का जोखिम लगभग 30% अधिक हो सकता है।
तमाम गैस और इसके कारण होने वाले जोखिम
अध्ययन की रिपोर्ट में अलग-अलग गैसों के संपर्क के कारण स्ट्रोक की समस्याओं को लेकर चर्चा की गई है। इसमें कार्बन मोनोऑक्साइड गैसे से जोखिम 26%, सल्फर डाइऑक्साइड के कारण 15% और ओजोन एक्सपोजर के कारण 5% बढ़ा हुआ खतरा देखा गया है। विशेषज्ञों ने बताया रोजाना की जिंदगी में गाड़ियों से निकलने वाले धुंए, अपशिष्टों के जलने, प्लास्टिक आदि के कारण वायुमंडल में इन गैसों का स्तर बढ़ता जा रहा है। इन गैसों के संपर्क में रहना आपके लिए कई प्रकार के स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है।
घट रही है लोगों की आयु
इससे पहले के अध्ययनों में भी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के जोखिमों को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। शिकागो विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में दिल्ली को विश्व स्तर पर सबसे प्रदूषित शहरों में से एक बताया गया था। साल-दर साल इसका जोखिम बढ़ता जा रहा है।
शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि जिस तरह से यहां पिछले कुछ वर्षों में प्रदूषण के स्तर बढ़ा है इसका दुष्प्रभाव ये है तो यहां के निवासियों की उम्र करीब 11 साल कम हो सकती है। दिल्ली ही नहीं, वायु प्रदूषण का खतरा राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ा जोखिम है। देश की बड़ी आबादी उन क्षेत्रों में रहती है जहां का प्रदूषण स्तर वार्षिक औसत 5 μg/m3 से अधिक है।
पीएम 2.5 और इसका खतरा
शोधकर्ताओं ने बताया, दिल्ली नहीं देश के कई राज्यों में भी प्रदूषण का बढ़ता स्तर गंभीर चिंताकारक है। अगर प्रदूषण के कारण ऐसे ही हालात जारी रहे और इसमें सुधार नहीं होता है तो ये जीवन प्रत्याशा को कम करने वाली स्थिति हो सकती है। वायु प्रदूषण और पीएम 2.5 के स्तर को फेफड़ों और हृदय की सेहत के लिए गंभीर समस्याकारक रहा है, इसका मानव स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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