डायबिटीज के शिकार लोगों को इसकी जटिलताओं से बचे रहने के लिए लाइफस्टाइल और आहार पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है। आहार में मीठी चीजों और कार्ब्स की मात्रा को कम करने के साथ दिनचर्या में शारीरिक सक्रियता वाले तरीकों को शामिल करना ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने में आपके लिए सहायक माना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि इन कारकों के अलावा डायबिटीज को कंट्रोल करने में हवा की गुणवत्ता का भी विशेष योगदान होता है?
World Diabetes Day: मधुमेह रोगियों की जटिलताएं बढ़ा रही है जहरीली हवा, इंसुलिन उत्पादन पर भी इसका दुष्प्रभाव
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वायु प्रदूषण और मधुमेह के बीच संबंध
अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने वायु प्रदूषण और मधुमेह के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला। बोल्डर स्थित कोलोराडो यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर तान्या एल्डरेटे कहती हैं, प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने वाले टाइप-2 डायबिटीज के शिकार लोगों में कई प्रकार की जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम देखा गया है। प्रदूषण की स्थिति इंसुलिन संवेदनशीलता में कमी और अधिक वजन वाले या मोटे बच्चों में इंसुलिन उत्पादन से संबंधित जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। मधुमेह को नियंत्रित करने के अन्य कारकों पर ध्यान देने के साथ प्रदूषण से बचाव करते रहना भी आवश्यक है।
वायु प्रदूषण का डायबिटीज पर असर
शोधकर्ताओं ने इनवायरमेंटल इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया कि प्रदूषित हवा में मेटल और अन्य विषाक्त पदार्थों सहित सूक्ष्म कणों की मौजूदगी देखी गई है। सांस के माध्यम से ये हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश करके न सिर्फ फेफड़ों के लिए मुश्किलों को बढ़ा देते हैं साथ ही ये ब्लड शुगर बढ़ने का भी कारण हो सकता है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि सूक्ष्म कणों के कारण शरीर में होने वाली इंफ्लामेशन की स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का खतरा और इसकी जटिलताएं बढ़ा सकती है।
प्रदूषण का आंतों पर दुष्प्रभाव
प्रोफेसर तान्या एल्डरेटे कहती हैं, वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों के आंतों में अस्वास्थ्यकर तरीके के बदलाव देखे गए हैं, जिनके कारण भी मधुमेह की जटिलताओं के बढ़ने का जोखिम हो सकता है। दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के युवाओं पर किए अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण आंत के माइक्रोबायोम में दिक्कतें आ गईं। गट माइक्रोबायोम, बैक्टीरिया सहित सूक्ष्मजीवों का वह समूह है, जो आपके शरीर को भोजन को तोड़ने में मदद करता। इसमें होने वाली समस्याओं के कारण इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है जिसके कारण कई प्रकार के जोखिम बढ़ सकते हैं।
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में प्रदूषण बढ़ा है, ऐसे में मधुमेह वाले लोगों को अपने परिवेश और हवा की गुणवत्ता के बारे में जागरूक होने की जरूरत है। मधुमेह वाले लोगों को धुएं में मौजूद महीन कणों के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया है,यह उनमें हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ा सकता है।
प्रदूषण से बचे रहने के लिए अनावश्यक रूप से घर से बाहर जाने से बचें। घर से बाहर जाना पड़ रहा है तो एन-95 मास्क का प्रयोग करें, जिससे हवा को आसानी से फिल्टर किया जा सके। इसके साथ डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले अन्य उपायों का भी ध्यान देते रहना बहुत आवश्यक है।
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स्रोत और संदर्भ
Air pollution exposure is associated with the gut microbiome as revealed by shotgun metagenomic sequencing
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