कोरोना वायरस महामारी ने भारत ही नहीं बल्कि लगभग पूरी दुनिया को बुरी तरह प्रभावित किया। हर किसी का जीवन किसी न किसी तरीके से इस वायरस की वजह से प्रभावित हुआ और इसी वायरस की वजह से ही लोगों का जीवन जीने का तरीका भी अब पूरी तरह बदल चुका है। भले ही आज हम पहले से बेहतर स्थिति में खुद को देख रहे हैं, लेकिन हम ये बिल्कुल नहीं भूल सकते कि एक समय था, जब इस कोरोना वायरस से बिना किसी हथियार यानी वैक्सीन के मुकाबला कर रहे थे। वहीं, मौजूदा समय में दुनिया के पास एक से बढ़कर एक कोरोना वैक्सीन है, जिसमें से एक फाइजर भी है। फाइजर वैक्सीन को लेकर हाल ही में एक अध्ययन सामने आया है, जिसे लैंसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है। इसमें बताया गया है कि फाइजर की वैक्सीन डेल्टा वैरिएंट पर काफी कारगर है। हालांकि, अध्ययन ये भी बताता है कि, छह महीने बाद फाइजर की वैक्सीन का असर बड़े स्तर पर कम हो रहा है। तो चलिए जानते हैं इस अध्ययन के बारे में...
अध्ययन: फाइजर वैक्सीन कोरोना के डेल्टा वैरिएंट पर है काफी कारगर, लेकिन छह महीने बाद कम हो रहा असर
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दरअसल, हाल ही में लैंसेट मेडिकल जर्नल में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ। इसमें बताया गया है कि छह महीने बाद फाइजर की वैक्सीन का असर बड़े स्तर पर काम हो रहा है। हालांकि, मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामले में कम से कम 6 महीनों तक वैक्सीन की प्रभावकारिता 90 फीसदी पर बनी हुई है।
अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामले में बेहतर सुरक्षा
- अध्ययन में बताए डेटा के मुताबिक, फाइजर की वैक्सीन का प्रभाव दूसरे डोज के छह महीनों बाद 88 फीसदी से घटकर 47 फीसदी पर आ गया है। लेकिन अच्छी खबर से भी नजरें नहीं हटाई जा सकती है, क्योंकि अध्ययन ये भी बताता है कि डेल्टा वैरिएंट पर ये वैक्सीन अस्पताल में भर्ती होने और मौत के मामले में बेहतर सुरक्षा लोगों को प्रदान कर रही है।
इतने लोगों पर की गई जांच
- फाइजर और कैसर पर्मानेंट ने दिसंबर 2020 से अगस्त 2021 के बीच कैसर पर्मानेंट सदर्न कैलिफोर्निया के लगभग 34 लाख लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड्स की जांच की। अपने इस अध्ययन को लेकर फाइजर वैक्सीन्स में चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट लुई जोडार ने कहा कि, 'हमारा वैरिएंट स्पेसिफिक एनालिसिस ये बताता है कि फाइजर और बायोएनटेक वैक्सीन कोविड-19 के सभी वैरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी है।'
इन देशों में हो रहा है इस्तेमाल
- कोरोना वायरस से खुद को सुरक्षा देने का एक ही रास्ता है और वो है वैक्सीनेशन। ऐसे में हर देश इसमें लगा हुआ है। अमेरिका, मैक्सिको जैसे कई बड़े देशों में फाइजर की वैक्सीन लगाई जा रही है। वहीं, अमेरिका में कुछ बुजुर्ग और कुछ अन्य लोगों को फाइजर का बूस्टर डोज भी दिया जाने लगा है।
स्रोत और संदर्भ:
द लैंसेट
https://www.thelancet.com/journals/lancet/article/PIIS0140-6736(21)02183-8/fulltext
अस्वीकरण नोट: यह लेख पैरासाइट्स एंड वेक्टर्स में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। अमर उजाला राउटर्स के इस अध्ययन और दवा को लेकर कोई दावा नहीं करता है। बिना डॉक्टरी सलाह के दवा का इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है।