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कोरोना वायरस: बेकार हो जाते हैं संक्रमित मरीजों के फेफड़े, शोध में बताया गया ये बड़ा कारण

Sat, 10 Apr 2021 04:57 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रकाश चंद जोशी Updated Sat, 10 Apr 2021 04:57 PM IST
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According to research coronavirus effects human lungs
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

एक बार फिर से देश में कोरोना वायरस का संक्रमण काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। आए दिन संक्रमित लोगों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। कोरोना वायरस का गंभीर संक्रमण होने पर व्यक्ति के फेफेड़े बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। साथ ही ये काम तक करना बंद कर सकते हैं। लेकिन ऐसा हम नहीं बल्कि वैज्ञानिकों के एक शोध में सामने आया। वैज्ञानिकों ने फेफड़े के बेकार होने के पीछे के बड़े कारण का पता लगाया। तो चलिए जानते हैं इस शोध के बारे में।

According to research coronavirus effects human lungs
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

दरअसल, पिछले दिनों ब्रिटेन स्थित किंग्स कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों के अंगों के नमूनों का विश्लेषण किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि मामलों में आपस में जुड़ी असामान्य कोशिकाओं की मौजूदगी के कारण व्यक्ति के फेफड़े बेकार हो गए।

According to research coronavirus effects human lungs
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

ये अनुसंधान रिपोर्ट पिछले दिनों पत्रिका 'ईबॉयोमेडिसिन' में प्रकाशित हुई। जहां पता चला कि कोरोना मरीजों के फेफड़े बेकार होने के पीछे क्या कारण है।

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कोरोना टेस्टिंग - फोटो : सोशल मीडिया

ब्रिटेन स्थित किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस से मरने वाले 41 लोगों के फेफड़े, हृदय, यकृत और गुर्दे का विश्लेषण किया। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए शोधकर्ताओं ने ऐसा किया था। वहीं, इस विश्लेषण में शोधकर्ताओं ने पाया था कि फेफड़े काफी क्षतिग्रस्त हैं। 

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According to research coronavirus effects human lungs
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

वैज्ञानिकों के मुताबिक, लगभग 90 प्रतिशत मरीजों में अतिरिक्त तरह के लक्षण पाए गए, जो निमोनिया के अन्य स्वरूपों की तुलना में काफी अलग थे। उन्होंने ये भी कहा था कि इन लोगों के फेफड़ों की धमनियों और शिराओं में खून के थक्के काफी ज्यादा थे। साथ ही फेफड़ों की अनेक कोशिकाएं असामान्य रूप से बड़ी थीं और कई नाभिकों से युक्त थीं। इससे विभिन्न कोशिकाएं आपस में जुड़कर एकल बड़ी कोशिकाओं के रूप में तब्दील हो गईं।

अस्वीकरण नोट:  ये लेख पत्रिका 'ईबॉयोमेडिसिन' में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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