अल्जाइमर आज के समय में एक आम समस्या बन गई है। साठ साल की उम्र से अधिक वाले लोगों को यह बीमारी होती है, जिसका अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं है। ऐसे में अल्जाइमर एक गंभीर समस्या बना हुआ है। वैसे तो बल्ड प्रेशर, डायबीटिज, खराब लाइफस्टाइल और कभी सिर में चोट लगने के वजह से अल्जाइमर होने की आशंका बढ़ जाती है। अल्जाइमर रोग भूलने वाला रोग है। इस बीमारी के लक्षण याददाशत की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत होना है। पर क्या आपोक पता है कि मसूड़ों में होने वाला संक्रमण अल्जाइमर रोग के संभावित जोखिम को बढ़ा सकता है।
साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया कि मसूड़ों का संक्रमण अल्जाइमर रोग के संभावित जोखिम कारक हो सकता है। यानी कि अस्वस्थ मुख अल्जाइनर रोग की शुरुआत में एक भूमिका निभा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि एक आम प्रकार की मसूड़ों की बीमारी और डिमेंशिया वाले लोगों में बैक्टीरिया के बीच संबंध के प्रमाण मिले हैं।
फार्मास्यूटिकल फर्म कॉटेक्सिम के डॉक्टर स्टीफन डॉमिनी और केसी लिंच द्वारा किए गए शोध के अनुसार अल्जाइमर रोग के 53 मस्तिष्क शवों में से 51 में एक ही बैक्टीरिया सबसे ऊपर पाया गया था। वैज्ञामिकों की टीम ने पीजी को लक्षित करने वाले छोटे अणुओं को संक्रमित करके उसे बाधित करने के लिए चूहों में बैक्टीरिया को अवरुद्ध करने का परीक्षण किया और पाया कि यह अल्जाइमर रोग से निपटने के लिए एक संभावित नया तरीका दिखाते हुए मस्तिष्क में न्यूरोडीजेनेरेशन को कम कर सकता है।
पोरफिरोमोनस जिंजिवलिस यानी कि पीजी बैक्टीरिया मसूड़ों का संक्रमण क्रोनिक पीरियोडोंटाइटिस का कारण बनता है, जिससे क्रॉनिक इंफ्लामेशन और दांतों को संभावित हानि होती है।
शोधकर्ता लिंच के अनुसार उनकी टीम का शोध अल्जाइमर पैथोलॉजी के एक अप्रत्याशित चालक पर जोर डालता है। जीवाणु जो आमतौर पर क्रॉनिक गम डिजीज से जुड़ा होता है।