कोरोना महामारी अब भी कई देशों के लिए बड़ी समस्या का कारण बनी हुई है। हाल ही में चीन और कुछ यूरोपीय देशों में ओमिक्रॉन के नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स देखे गए हैं, जिन्हें अपेक्षाकृत अधिक संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है। भारत में भी इन वैरिएंट्स के कारण संक्रमण की पुष्टि हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर संक्रमित एक से दो सप्ताह में पूरी तरह से ठीक हो जा रहे हैं, क्योंकि इन नए वैरिएंट्स के कारण गंभीर रोगों का खतरा कम देखा गया है।
रोचक मामला: 411 दिनों तक कोरोना संक्रमित रहने के बाद ठीक हुआ ब्रिटिश नागरिक, जानिए किस वैरिएंट का था संक्रमण?
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लंबे संक्रमण के बाद ठीक हुआ नागरिक
गौरतलब है कि यह दुनिया का पहला ऐसा मामला है जिसमें इतने लंबे समय तक संक्रमित रहने के बाद भी व्यक्ति ठीक हो गया है। इससे पहले ECCMID सम्मेलन में प्रस्तुत एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एक अन्य ब्रिटिश नागरिक निधन से पहले 505 दिनों तक संक्रमण का शिकार रहा था।
जर्नल क्लिनिकल इंफेक्शियस डिजीज में प्रकाशित इस मामले की रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने व्यक्ति के संक्रमण और इलाज के तरीके के बारे में बताया है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
एक साल तक पॉजिटिव आती रही रिपोर्ट
डॉक्टर्स की टीम ने मेडिकल रिपोर्ट में बताया कि इस ब्रिटिश नागरिक को दिसंबर 2020 में कोरोना का संक्रमण हुआ था, इसके बाद से इस साल जनवरी तक कई बार किए गए कोविड टेस्ट में उसे बार-बार पॉजिटिव ही पाया जा रहा था। इस दौरान उस व्यक्ति में लगातार कई तरह के लक्षण देखे जाते रहे। बार-बार टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आते रहने की स्थिति में वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि क्या यह व्यक्ति एक ही वैरिएंट का शिकार है या फिर समय के साथ इसमें अलग-अलग वैरिएंट का संक्रमण हुआ है?
जांच में पाया गया कि शुरुआत में वह बीए.1 वैरिएंट के कारण संक्रमित हुआ था, जिसमें म्यूटेशन के साथ व्यक्ति में संक्रमण का जोखिम बना रहा।
कमजोर प्रतिरक्षा के कारण नहीं ठीक हो रहा था संक्रमण
सेंट थॉमस 'एनएचएस फाउंडेशन ट्रस्ट और किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं की एक टीम ने इस व्यक्ति पर किए गए अध्ययन में पाया कि जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत कमजोर होती है, उनमें कुछ महीनों से लेकर एक साल या अधिक समय तक भी संक्रमण बना रह सकता है, जैसा कि इस व्यक्ति के मामल में 13 महीने तक देखा गया है। चूंकि यह व्यक्ति बीए.1 वैरिएंट से संक्रमित था, ऐसे में इसके इलाज के लिए पैक्सलोविड और रेमेडिसविर, दो एंटीवायरल को प्रयोग में लाया गया। इन दवाओं के साथ सहायक उपचार माध्यमों से व्यक्ति को संक्रमण से मुक्त किया गया है।
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययनकर्ताओं की टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि वैसे तो इन एंटीवायरल का न तो अब प्रयोग किया जा रहा है न ही इन्हें ओमिक्रॉन वैरिएंट्स के खिलाफ असरदार पाया गया है। पर चूंकि इस केस में रोगी में बीए.1 का संक्रमण का संभवत: इसीलिए यह उपचार प्रभावी रहा है। शायद अब यह एक तरीका हो सकता है जिसके आधार पर हम लंबे समय तक संक्रमण का शिकार रहे लोगों को ठीक कर सकते हैं। फिलहाल कोविड के नए वैरिएंट्स के कारण इस प्रकार के लंबे संक्रमण का खतरा कम ही देखा जा रहा है। सभी लोगों को लगातार कोविड से बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है, क्योंकि महामारी अभी भी खत्म नहीं हुई है।
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स्रोत और संदर्भ
Real-time whole genome sequencing to guide patient-tailored therapy of SARS-CoV-2 infection
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