वैसे तो उन्हें 'आधी आबादी' का दर्जा दिया गया है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था, जब उन्हें सिर्फ घर की चारदीवारी में ही कैद रखा जाता था। ...लेकिन बदलते वक्त के साथ उन्होंने पुरुष प्रधान समाज की हर जंजीर को तोड़ा और अपने रास्ते में आने वाली हर दीवार ढहा दी। आज ट्रेन से लेकर प्लेन चलाने में महिलाएं किसी से पीछे नहीं हैं और राजनीति में भी उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। दरअसल, महिलाओं ने देश की आजादी से लेकर सरकार चलाने तक में अहम भूमिका निभाई है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। ऐसे में हम रूबरू होते हैं उन महिला नेताओं से, जिन्होंने फौलादी इरादों से भारतीय राजनीति का नजरिया ही बदल दिया। साथ ही, हम आपको बताएंगे कि आजादी के बाद कैसे साल-दर-साल राजनीति में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ती चली गई।
राजकुमारी अमृत कौर
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राजकुमारी अमृत कौर
- फोटो : Facebook/Alexander Dean Williams
बात भारतीय राजनीति में महिलाओं की हो और उसमें राजकुमारी अमृत कौर का जिक्र न हो, ऐसा होना नामुमकिन है। दरअसल, राजकुमारी अमृत कौर देश की पहली स्वास्थ्य मंत्री थीं। आजाद भारत में पंडित जवाहर लाल नेहरू की सरकार बनी तो 20 मंत्रियों की कैबिनेट में जगह पाने वाली वह पहली महिला थीं। नेता बनने से पहले राजकुमारी ने आजादी की लड़ाई में भी योगदान दिया था। इसके अलावा महात्मा गांधी के साथ उन्होंने सचिव के रूप में भी काम किया था। वहीं, दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम ने उन्हें साल 1947 की वुमन ऑफ द ईयर भी चुना था। देश में एम्स बनाने का श्रेय भी राजकुमारी अमृत कौर को ही दिया जाता है।
सरोजिनी नायडू
बात साल 1947 की है। देश को आजादी मिली थी और राज्यों का गठन हो रहा था। उस वक्त देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश का निर्माण हुआ तो उसके राज्यपाल की जिम्मेदारी सरोजिनी नायडू को दी गई। वह देश की पहली महिला राज्यपाल थीं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल का पद 1947 से 1949 तक संभाला।
इंदिरा गांधी
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इंदिरा गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके फौलादी इरादों और फैसलों के लिए आज भी याद किया जाता है। उन्होंने तीन बार प्रधानमंत्री पद को संभाला। हालांकि, चौथे कार्यकाल के दौरान उनकी हत्या कर दी गई। हालांकि, उनके राजनीतिक काल में एक वक्त ऐसा भी था, जब उनकी ही पार्टी के नेता उन्हें 'गूंगी गुड़िया' कहकर बुलाते थे, लेकिन अपने फैसलों के दम पर इंदिरा ने न सिर्फ उन नेताओं की बोलती बंद की, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी धमक कायम की।
सुचेता कृपलानी
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सुचेता कृपलानी
- फोटो : अमर उजाला
देश की पहली महिला मुख्यमंत्री सुचेता कृपलानी थीं। प्रसिद्ध गांधीवादी नेता आचार्य कृपलानी की पत्नी सुचेता ने साल 1963 से 1967 तक उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री का पदभार संभाला। बता दें कि देश की आजादी में अहम योगदान निभाने वाली सुचेता अंग्रेजों के शासनकाल में कई बार जेल भी गई थीं।