Ram Vilas Paswan News: लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के संस्थापक रामविलास पासवान कभी पुलिस फोर्स में जाने वाले थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। बिहार के खगड़िया में एक दलित परिवार में जन्मे रामविलास पासवान ने एमए और एलएलबी करने के बाद ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। उनका चयन डीएसपी के पद पर भी हो गया था। इसी दौरान वह जयप्रकाश नारायण के समाजवादी आंदोलन से जुडे़। यह संयोग ही है कि पासवान का निधन आठ अक्तूबर को हुआ और 41 साल पहले इसी तारीख को जेपी ने भी अंतिम सांस ली थी।
Ram Vilas Paswan Death: कभी पुलिस फोर्स में जाने वाले थे रामविलास पासवान, लेकिन पहुंच गए राजनीति में
जेपी आंदोलन से उपजे पासवान ने जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि पर ली अंतिम सांस
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20 साल की पार्टी को बिहार से ज्यादा केंद्र में मिली जगह
राम विलास पासवान ने साल 2000 में लोक जनशक्ति पार्टी का गठन किया। राम विलास पासवान पार्टी के अध्यक्ष बने और लंबे अरसे तक रहे। दलितों की राजनीति करने वाले पासवान ने 1981 में दलित सेना संगठन की भी स्थापना की थी। पासवान के अनुमान का ही नतीजा माना जाता है कि बिहार की सबसे छोटी पार्टियों की लिस्ट में होने के बावजूद उसकी हमेशा सत्ता में भागेदारी रहती है, लेकिन ये हिस्सेदारी उसे बिहार नहीं, बल्कि केंद्र की सत्ता में मिलती रही है।
50 साल की विधायकी और सांसदी
निजी जीवन को लेकर होने वाली टीका-टिप्पणी के बावजूद पासवान में 1969 से 50 से ज्यादा साल की विधायकी और सांसदी ही नहीं, 1996 से सभी सरकारों में मंत्री रहना भी असाधारण योग्यता थी। पासवान, वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की कैबिनेट की शोभा बढ़ा चुके हैं।
सीवर की साफ-सफाई करने वालों का वेतन आईएएस के बराबर हो
1990 में यह उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि संसद के सेंट्रल हाल में डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का चित्र लगाया गया। यह पासवान ही थे जिन्होंने सरकार को इस बात के लिए राजी किया कि जो दलित बुद्ध धर्म अपना रहे हैं, उन्हें भी आरक्षण का फायदा मिले। उन्होंने यह भी मांग की थी कि सीवरों की साफ-सफाई करने वाले कर्मचारियों का वेतन एक आइएएस अधिकारी के बराबर हो।
रेलमंत्री बने तो अपने निर्वाचन क्षेत्र हाजीपुर में बनवाया रेलवे का क्षेत्रीय मुख्यालय
इसके अलावा, उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं पर ख़ासा ध्यान दिया है और इतने लंबे समय में उनके कार्यकर्ताओं या समर्थकों की नाराजगी की कोई बड़ी बात सामने नहीं आई है, जो मामूली बात नहीं है. वे जब रेल मंत्री बने तो उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र हाजीपुर में रेलवे का क्षेत्रीय मुख्यालय बनवा दिया। 2019 के आम चुनाव से पहले एक और पैंतरा लेकर नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे हार्ड टास्कमास्टरों को भी उन्होंने मजबूर कर दिया। बिहार में लोकसभा की छह सीटों पर लड़ने का समझौता करने के साथ ही असम से खुद राज्यसभा पहुंचने का इंतजाम करना कोई मामूली बात नहीं है।