कहते हैं प्यार का कोई मजहब, जाति या समुदाय नहीं होता है। इसके कई उदाहरण हमें अपनी आप-पास की जिंदगी में देखने को मिलते हैं। इस समय जहां प्यार के त्योहार वैलेंटाइन डे के आगोश में दुनिया सराबोर है। वहीं आज हम आपको देश के उन नेताओं के बारे में बताते हैं जिन्होंने धर्म और जाति के बंधनों को तोड़कर अपने प्यार को हासिल किया है। ऐसा करने में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, उनकी यह लव स्टोरी काफी दिलचस्प रही है।
भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन के प्यार की कहानी बड़ी मजेदार है। पहली बार दोनों की मुलाकात दिल्ली की डीटीसी बस में हुई थी, जिसके बाद दोनों एक दूसरे को चाहने लगे। दोनों की दोस्ती आठ साल तक चली और फिर दोनों शादी के बंधन में बंध गए। उनकी पत्नी का नाम रेणु है और उनके दो बच्चे हैं।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह टीवी एंकर अमृता राय के करीब अपनी पहली पत्नी आशा की मौत के बाद आए थे। उनके इस रिश्ते के बारे में जब बच्चों को पता चला तो उन्होंने विरोध जताया। मगर इसका कोई फायदा नहीं हुआ और दोनों ने शादी कर ली।
पप्पू यादव की लव स्टोरी सबसे हटकर है। एक मर्डर के मामले में जब वह जेल में सजा काट रहे थे, तब उन्हें रंजीता से प्यार हुआ था। रंजीता की एक झलक के लिए वह टेनिस कोर्ट पहुंच जाया करते थे जहां वह टेनिस खेलने के लिए आती थीं। यादव को अपने प्यार से शादी करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। इसकी एक वजह रंजीता का सिख और पप्पू का हिंदू होना भी था। इतना ही नहीं एक बार पप्पू यादव ने सुसाइड करने की भी कोशिश की थी।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की डिंपल रावत से मुलाकात इंजीनियरिंग के दिनों में हुई थी। उस समय अखिलेश 21 के तो डिंपल 17 साल की थीं। पहली ही मुलाकात में ही दोनों के बीच अच्छी दोस्ती हो गई थी जो समय के साथ प्यार में बदल गई। परिवार वालों को मनाने में अखिलेश यादव को थोड़ी परेशानी हुई थी और इसके लिए उन्होंने अपनी दादी का सहारा लिया। जिसके बाद दोनों शादी के बंधन में बंध गए।