अपना देश इस बार 70वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहा है। हर बार की तरह इस बार हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया जाएगा। वर्तमान में तिरंगे का जो स्वरूप है, दरअसल वह पहला नहीं है, बल्कि राष्ट्र ध्वज के रूप में यह इसका छठा स्वरुप है। जानना दिलचस्प होगा कि आखिर किस तरह बदलता गया अपना तिरंगा।
हर स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। अभी जो अपना तिरंगा है, उसे 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। यह बैठक 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से देश के आजाद होने से कुछ दिन पहले हुई थी। तिरंगे को 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बीच भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया और इसके बाद भारतीय गणतंत्र ने इसे अपनाया।
आजादी के लड़ाई के दौरान हुआ राष्ट्रध्वज का विकास
यह जानना अत्यंत रोचक है कि हमारा राष्ट्रीय ध्वज अपने आरंभ से किन-किन परिवर्तनों से गुजरा। इसे हमारे स्वतंत्रता के राष्ट्रीय संग्राम के दौरान खोजा गया या मान्यता दी गई। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौरों में से गुजरा। एक रूप से यह राष्ट्र में राजनीतिक विकास को दर्शाता है।
पहला राष्ट्रीय ध्वज: 1906 में भारत का गैर आधिकारिक ध्वज
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छह चरणों में बदला है अपना तिरंगा
- फोटो : Amar Ujala
7 अगस्त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता में फहराया गया था जिसे अब कोलकाता कहते हैं। इस ध्वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था।
दूसरा राष्ट्रीय ध्वज: 1907 में भीकाजीकामा द्वारा फहराया गया
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इस ध्वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907(कुछ के अनुसार 1905 में) में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। यह भी पहले ध्वज के समान था, सिवाय इसके कि इसमें सबसे ऊपरी की पट्टी पर केवल एक कमल था, लेकिन सात तारे सप्तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।
तीसरा राष्ट्रीय ध्वज: 1917 में घरेलू शासन आंदोलन के दौरान अपनाया
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तृतीय ध्वज 1917 में आया जब हमारे राजनीतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड़ लिया। डॉ. एनी बेसेंट और लोकमान्य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बाईं और ऊपरी किनारे पर (खंभे की ओर) यूनियन जैक था। एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।
चौथा राष्ट्रीय ध्वज: 1921 में गैर अधिकारिक रूप से अपनाया गया
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अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र के दौरान जो 1921 में बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में किया गया यहां आंध्र प्रदेश के एक युवक ने एक झंडा बनाया और गांधी जी को दिया। यह दो रंगों का बना था। लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है।
गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।