तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश में देश ने सीडीएस बिपिन रावत समेत कुल 12 जांबाज जवान गंवा दिए। सीडीएस रावत और ब्रिगेडियर एलएल लिद्दड़ को 10 दिसंबर को दिल्ली में अंतिम विदाई दी गई। वहीं, बाकी जांबाजों के पार्थिव शरीर उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिए गए हैं। इस स्पेशल रिपोर्ट में हम जानते हैं कि ये सभी जवान कहां से ताल्लुक रखते थे। साथ ही, उनके परिवार आदि के बारे में जानते हैं।
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सीडीएस बिपिन रावत
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सीडीएस जनरल बिपिन रावत
तमिलनाडु के कुन्नूर में हुए हेलीकॉप्टर हादसे में उत्तराखंड का सूरज डूब गया। दरअसल, सीडीएस बिपिन रावत उत्तराखंड से ताल्लुक रखते थे। रावत पौड़ी जिले के द्वारीखाल ब्लॉक के सैंण गांव के मूल निवासी थे। उनकी पत्नी उत्तरकाशी जिले से हैं। जानकारी के मुताबिक, देहरादून में भी जनरल बिपिन रावत का घर बन रहा था। इनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत सेना से लेफ्टिनेंट जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। रावत ने 11वीं गोरखा राइफल की पांचवीं बटालियन से 1978 में अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने देहरादून में कैंब्रियन हॉल स्कूल, शिमला में सेंट एडवर्ड स्कूल और भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से शिक्षा ली। आईएमए में उन्हें सर्वश्रेष्ठ स्वोर्ड ऑफ ऑनर सम्मान से भी नवाजा गया था।
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मधुलिका रावत
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मधुलिका रावत
तमिलनाडु में हुए हादसे में जनरल बिपिन रावत की पत्नी मधुलिका रावत का भी निधन हो गया। मधुलिका मध्यप्रदेश के शहडोल के सोहागपुर में पैदा हुई थीं। रीवा घराने से ताल्लुक रखने वाले उनके पिता कुंवर मृगेंद्र सिंह दो बार विधायक भी रहे। बिपिन रावत और मधुलिका की शादी साल 1986 में हुई थी। वह उस दौरान सेना में कैप्टन के पद पर थे। शादी के दौरान उनकी पोस्टिंग सीमा पर थी। ऐसे में उन्हें अपने परिवार से दूर रहना पड़ा, जिसकी जिम्मेदारी मधुलिका ने ही संभाली।
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एलएस लिद्दड़
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ब्रिगेडियर एलएस लिद्दड़
ब्रिगेडियर लिद्दड़ अपने परिवार में दूसरी पीढ़ी के सेना अधिकारी थे। मूलरूप से पंजाब निवासी उनके पिता मेहंदी सिंह कर्नल थे। वह 1989 में पंचकूला आए और सेक्टर-12 में घर बनाया। लिद्दड़ की पत्नी गीतिका टीचर हैं, जबकि उनकी 16 वर्षीय बेटी आसना दिल्ली में रहती है। उनकी मां इस वक्त बहन सुखविंदर चीमा के साथ रह रही हैं। सुखविंदर कसौली के पास सनावर स्थित लॉरेंस स्कूल में मैट्रन हैं।
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लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह
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लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह
हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह का राजस्थान के अजमेर से नाता रहा है। दरअसल, उनकी दादी अजमेर में रहती थीं, जिनसे वह मिलते आते थे। वैशाली नगर में उनके रिश्तेदारों का मकान आज भी है। हरजिंदर के पिता भी फौज में थे। उनकी पढ़ाई अजमेर के राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल में हुई थी। उनके परिवार के कई लोग सेना में सेवारत हैं।