फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

सोशल मीडिया पर महिलाओं से भूलकर ना करें अभद्र व्यवहार, वरना जेल तक हो सकती है आपको

Tue, 17 Mar 2020 05:31 PM IST
Rama Solanki रमा सोलंकी
Updated Tue, 17 Mar 2020 05:31 PM IST
सार

अगर आप कर रहीं हैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल तो रहें सावधान!
अगर नहीं रखा ख्याल तो हो सकती हैं साइबर क्राइम का शिकार
ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा
महिलाएं रखें सोशल मीडिया पर इन बातों का ख्याल
जानिए अपराधी कैसे कर सकते हैं आपको टारगेट

विज्ञापन
Social media can be dangerous for women, know these laws if you are a user
ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा - फोटो : Amar Ujala

सोशल मीडिया जहां एक तरफ हम सबको जोड़ता है और वर्चुअल दुनिया में एक दूसरे से परिचय कराता है वहीं दूसरी ओर उसकी बहुत सारी चुनौतियां भी हैं जैसे ऑनलाइन, सोशल मीडिया सुरक्षा खासकर महिलाओं के लिए। सोशल मीडिया का प्रयोग करते हुए महिलाओं को अधिक सतर्क और जागरूक रहना चाहिए। इसके लिए उन्हें डिजिटल स्वच्छता और इससे जुड़े कानूनों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए।  

महिलाएं रखें सोशल मीडिया पर इन बातों का ख्याल

Social media can be dangerous for women, know these laws if you are a user
ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा - फोटो : Amar Ujala

जानिए साइबर क्राइम से कैसे बचें महिलाएं?
 

  • अपनी निजी तस्वीरों को डालने से बचें।
  • कोशिश करें अपनी पोस्ट पर अपनी लोकेशन अगर आवश्यक ना हो तो शेयर ना करें।
  • अगर कोई पोस्ट आप शेयर कर रहे हैं तो उसे, किसको और कितना शेयर करना हैं उसका ख्याल रखें।  
  • इंटरनेट या साइबर स्पेस पर अपनी पर्सनल जानकारी देने से बचें।  
  • अनजान और अपरिचित लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने से बचें।
  • अपनी असल जिंदगी में जिसे आप जानती हैं उन्हें ही अपने वर्चुअल वर्ल्ड मेंं फ्रेंड बनाएं।
  • अवांछित और अपरिचित के कॉल्स, एसएमएस, ईमेल, फ्रैंड रिक्वेस्ट को नजरअंदाज करें और ब्लॉक करें।
  • अगर चीजें नहीं संभल रही हैं तो सुरक्षा एजेंसी,पुलिस और साइबर सेल में शिकायत दर्ज करें।
  • ऐसी घटना होने पर परिवार और पुलिस को जानकारी जरूर दें।
  • अपनी तस्वीरों को डालते हुए अपने फेसबुक अकाउंट पर अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स को पब्लिक न करें
  • जिस पासवर्ड का प्रयोग आप सोशल मीडिया अकाउंट के लिए करती हैं उनका पासवर्ड समय- समय पर चेक करते रहना चाहिए।
  • अपने पासवर्ड को बदलते रहना चाहिए और हर अकाउंट का अलग पासवर्ड रखना चाहिए।

'सोशल मीडिया के दुरुपयोग से लड़ने के आईटी अधिनियम की धारा 66A का प्रयोग महिलाएं कर सकती है। यह धारा 66A  ऑनलाइन शब्दों के उपयोग और दुरुपयोग के लिए व्यापक कानूनी सहारा प्रदान करता है।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट 

डिजिटल स्वच्छता और इससे जुड़े कानूनों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए

Social media can be dangerous for women, know these laws if you are a user
ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा - फोटो : Amar Ujala

जागरूकता ही बचाव है -

साइबर अपराधों को लेकर भारत में जागरुकता का अभाव है। महिलाएं अक्सर साइबर अपराध को लेकर चुप रह जाती हैं या फिर कदम नहीं उठा पाती हैं।  सितंबर 2015 में यूनाइटेड स्टेट्स ब्रॉडबैंड कमीशन की एक रिपोर्ट  "कॉम्बेटिंग ऑनलाइन वायलैंस अगेंस्ट वीमेन एंड गर्ल्स: ए वर्ल्डवाइड वेकअप कॉल" के मुताबिक 'इंटरनेट इस्तेमाल करने वाली करीब एक तिहाई महिलाएं किसी-न-किसी रूप में साइबर अपराध का शिकार होती हैं।'

  • संयुक्त राष्ट्र संघ की सितंबर 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक,
  • भारत में केवल 35 फीसदी महिलाओं ने अपने खिलाफ हुए साइबर क्राइम की शिकायत की।
  • साइबर अपराध से पीड़ित करीब 46.7 फीसदी महिलाओं ने कोई भी शिकायत नहीं की।
  • 18.3 फीसदी महिलाओं को इस बात का पता ही नहीं था कि वे साइबर अपराध का शिकार हो रही हैं।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने महिलाओं के मानवाधिकार पर खतरे को लेकर जांच की...जिसके तहत 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं से साइबर एब्यूज पर ऑनलाइन सर्वे किया गया।

सर्वे के मुताबिक हर पांच में से एक महिला सोशल मीडिया पर एब्यूज से प्रभावित है. इसमें 18-24 उम्र वर्ग की महिलाएं ज्यादा एब्यूज का शिकार हुईं...वहीं इसी उम्र वर्ग में से 37% महिलाओं ने कहा कि वो ऑनलाइन एब्यूज और उत्पीड़न का शिकार हैं. सर्वे से ये भी बात पुष्ट हुई कि साइबर एब्यूज करने वालों में पीड़ित महिला के जानने वालों की संख्या 27% है।

'ऑनलाइन गेम, क्विज और अन्य मनोरंजन ऐप मजेदार होते हैं, लेकिन वे अक्सर आपके पेज से जानकारी लेते हैं और इसे आपकी जानकारी के बिना पोस्ट करते हैं। सुनिश्चित करें कि आप किसी भी ऐप, गेम या सेवा के दिशा-निर्देशों को जानते हैं और इसे आपकी जानकारी तक अनफिल्टर एक्सेस की अनुमति नहीं देते हैं'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट 



एमनेस्टी इंटरनेशनल के सर्वे के अनुसार
  • 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं का एक सर्वे कराया जिसका विषय साइबर एब्यूज था।
  • 18-24 साल की उम्र की महिलाएं सबसे ज्यादा एब्यूज की शिकार हुईं।
  •  37% महिलाएं ऑनलाइन एब्यूज और हैरेसमेंट का शिकार हुईं।
  • साइबर एब्यूज करने वालों में परिचित लोगों की संख्या करीब 27% है।


एमनेस्टी इंटरनेशनल ने महिलाओं के मानवाधिकार पर खतरे को लेकर जांच की...जिसके तहत 18 से 55 साल की उम्र की 504 महिलाओं से साइबर एब्यूज पर ऑनलाइन सर्वे किया गया।

सर्वे के मुताबिक हर पांच में से एक महिला सोशल मीडिया पर एब्यूज से प्रभावित है. इसमें 18-24 उम्र वर्ग की महिलाएं ज्यादा एब्यूज का शिकार हुईं...वहीं इसी उम्र वर्ग में से 37% महिलाओं ने कहा कि वो ऑनलाइन एब्यूज और उत्पीड़न का शिकार हैं. सर्वे से ये भी बात पुष्ट हुई कि साइबर एब्यूज करने वालों में पीड़ित महिला के जानने वालों की संख्या 27% है।

'एक आपराधिक मामलों की वकील होने के नाते ... मैं यौन शोषण, हमले में शामिल लोगों से मिलती रहती हूं और उन्होंने कबूल किया है कि उन्होंने इस अपराध को अंजाम देने से ठीक पहले इंटरनेट पर उपलब्ध कामुक वीडियो देखे और मुझे यह जानकर धक्का लगा कि कोई उम्र नहीं , कोई भी संबंध अछूता नहीं है इस तरह के अपराध में, बहन के साथ यौन संबंध, माँ के साथ सेक्स,महिला बच्चे के साथ, पुरुष बच्चे के साथ ... सब कुछ वहाँ उपलब्ध है ... मुझे समझ में नहीं आता .... क्या कोई बाधा नहीं है कोई सुरक्षा उपाय?'
सुनीति सचान त्रिपाठी, वकील, लखनऊ हाई कोर्ट

'ऑनलाइन गेम, क्विज और अन्य मनोरंजन ऐप मजेदार होते हैं, लेकिन वे अक्सर आपके पेज से जानकारी लेते हैं और इसे आपकी जानकारी के बिना पोस्ट करते हैं। सुनिश्चित करें कि आप किसी भी ऐप, गेम या सेवा के दिशा-निर्देशों को जानते हैं और इसे आपकी जानकारी तक अनफिल्टर एक्सेस की अनुमति नहीं देते हैं'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट 

विज्ञापन
विज्ञापन

जानिए उन साइबर अपराधों के बारें में जिनमें महिलाओं को निशाना बनाया जाता है

Social media can be dangerous for women, know these laws if you are a user
ये अधिकार आपको देंगे सुरक्षा - फोटो : Amar Ujala
सोशल मीडिया पर आसानी से महिलाओं को निशाना बनाया जाता है, जैसे

पहला - साइबर स्टाकिंग
  • साइबर वर्ल्ड में आपकी पोस्ट और आपका पीछा करना
  • आपके प्रोफाइल पर बार-बार टारगेट करना
  • आपको टेक्स्ट मैसेज भेजना, मिस्ड कॉल करना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना
  • आपके हर स्टेटस अपडेट पर नजर रखना
  • सोशल मीडिया पर आपके अकाउंट पर मॉनिटरिंग करना

यह सब करना कानूनी अपराध है और आईपीसी की धारा 354डी के तहत यह एक दंडनीय अपराध है।

दूसरा - साइबर स्पाइंग
  • यह भी एक तरह का साइबर अपराध है।
  • इसमें चेंजिंग रूम, लेडीज वॉशरूम, होटल रूम्स और बाथरूम्स आदि स्थानों पर रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाए जाते हैं। और उसको गलत इस्तेमाल के लिए रखा जाता है।
  • आईटी एक्ट की धारा 66ई के तहत यह एक दंडनीय अपराध है।

तीसरा- साइबर स्टाकिंग
  • सबसे ज्यादा महिलाओं को साइबर स्टाकिंग के तहत टारगेट किया जाता है।

चौथा- साइबर पॉर्नोग्राफी
  • इसमें महिलाओं के अश्लील फोटो या वीडियो हासिल करके उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर दिया जाता है और वायरल किया जाता है। ज्यादातर इसका इस्तेमाल किसी को बदनाम करने, परेशान और ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता है।
  • यह जुर्म आईटी एक्ट की धारा 67 और 67ए के अंतर्गत आता है।

पांचवा- साइबर बुलिंग
इसमें साइबर अपराधी सबसे पहले महिलाओं से दोस्ती करता है उनको विश्वास में लेकर नजदीकियां बढ़ाता है और फिर उनकी निजी फोटो हासिल कर लेता है।  उन तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करते है।
 

'महिला और बाल विकास मंत्रालय ने महिलाओं के अश्लील चित्रण से संबंधित 1986 के कानून को संशोधित करने के लिए प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत  सोशल मीडिया और सब्सक्रिप्शन के जरिए इंटरनेट पर जो भी सामग्री देखा जा रही है उनको शामिल किया गया है। प्रस्तावित कानून के मुताबिक 2 लाख रुपए जुर्माना और तीन साल की कैद का प्रावधान है। इस कानून से ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने पर मदद मिलेगी'
सुनीति सचान त्रिपाठी, वकील, लखनऊ हाई कोर्ट

'जिओ- लोकेशन ऐप का प्रयोग करते हुए थोड़ा सावधान रहे और अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार ना करे।'
हरीश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट 




 
विज्ञापन

आईटी (संशोधन) कानून 2009 की धारा 66 (ए) के तहत सजा का प्रावधान है

Social media can be dangerous for women, know these laws if you are a user
महिलाओं को परेशान करना - फोटो : Amar Ujala

सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर महिलाओं को परेशान करना

  • सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर महिलाओं और बच्चों को तंग करना और अश्लील संदेश और धमकाने वाली बात लिखना साइबर अपराध के दायरे में ही आता है।
  • बदनाम करने के लिए पोस्ट डालना या टीका टिप्पणी करना। 
  • आईटी (संशोधन) कानून 2009 की धारा 66 (ए) के तहत सजा का प्रावधान है और मामला दर्ज किया जा सकता है। 
  •  दोष साबित होने पर तीन साल तक की जेल या फिर जुर्माना भी हो सकता है। 

"महिलाओं के साथ साइबर क्राइम बड़ी गंभीर समस्या है ,अपनी निजी जानकारियां देने से बचना चाहिए और पर्सनल तस्वीरें डालने से भी परहेज करना चाहिए, खासकर घर कहां है, कहां गए हैं और कहां जाने वाले हैं ये सब बता देते हैं. ये साइबर अपराधी को अपराध करने का मौका देता है  "
सुतापा सान्याल, पूर्व डीजीपी उत्तर प्रदेश

 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed