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कहीं 10 में 8 महिलाएं कामकाजी: कहीं पांच में एक भी नहीं; एनएसओ के जिला आंकड़ों ने दिखाई बड़ी तस्वीर
Sat, 19 Sep 2026 05:00 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sat, 19 Sep 2026 05:00 AM IST
सार
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के पहली बार जारी जिला स्तर के श्रम बाजार आंकड़ों से महिलाओं की रोजगार भागीदारी में बड़ा अंतर सामने आया है। हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला श्रम बल भागीदारी 80.9% रही, जबकि पूर्वी दिल्ली में यह 18.9% थी। समग्र श्रम बाजार में सूरत सबसे आगे रहा। आंकड़ों में गांवों की तुलना में शहरों में बेरोजगारी दर अधिक दर्ज की गई, खासकर महिलाओं में यह अंतर स्पष्ट रहा।
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एनएसओ की रिपोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
महिलाओं की रोजगार में भागीदारी की तस्वीर जिला बदलते ही पूरी तरह बदल जाती है। कहीं 10 में से आठ महिलाएं श्रम बाजार का हिस्सा हैं, तो कहीं यह आंकड़ा पांच में एक से भी कम है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने पूरे देश में पहली जिला स्तर पर श्रम बाजार का सर्वेक्षण जारी किया जिससे ये चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।
संशोधित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के तहत जिला स्तर पर चार श्रेणियों, श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर), कामगार-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), बेरोजगारी दर (यूआर) और 15-29 वर्ष के वे युवा जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण किसी में शामिल नहीं हैं(एनईईटी) का डाटा जुटाया गया है।
एनएसओ के इन आंकड़ों के अनुसार राज्यों के महिला आबादी के लिहाज से 10 सबसे बड़े जिलों में एक हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला श्रम बल भागीदारी 80.9% रही जो देश में सबसे अधिक है। वहीं पूर्वी दिल्ली में यह आंकड़ा सिर्फ 18.9% रहा। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में यह 71.4 फीसदी, ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 फीसदी और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 फीसदी रही। देशभर में करीब 57.8 फीसदी जिलों में महिला एलएफपीआर 40 फीसदी या उससे अधिक रही।
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समग्र श्रम बाजार में सूरत अव्वल
समग्र श्रम बाजार की तस्वीर में गुजरात का सूरत प्रमुख जिलों में सबसे आगे रहा। यहां कुल श्रम भागीदारी 68.6% और डब्ल्यूपीआर 67.8% दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार का अररिया और तमिलनाडु का सलेम रहे, जबकि दोनों मानकों पर बिहार का दरभंगा सबसे निचले स्तर पर रहा।
दक्षिण-पश्चिम जिले में श्रम भागीदारी सबसे अधिक
दिल्ली के चयनित जिलों में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली ने 46.7 फीसदी श्रम बल भागीदारी दर और 45.2 फीसदी कार्यबल जनसंख्या अनुपात के साथ दोनों श्रेणी में सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया। इसी जिले में बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी रही, जो चयनित जिलों में सबसे कम है।
पूर्वी दिल्ली में बेरोजगारी सबसे ज्यादा
पूर्वी दिल्ली में बेरोजगारी दर सबसे अधिक 8.3% रही। एनईईटी दर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में सबसे कम 12.3%, जबकि नॉर्थ दिल्ली में सबसे अधिक 44.3% रही। चयनित जिलों में एलएफपीआर 41.4 से 46.7% और डब्ल्यूपीआर 39.6 से 45.2 प्रतिशत के बीच रहा।
गांवों के मुकाबले शहरों में बेरोजगारी बहुत अधिक
अगस्त में 15 वर्ष और अधिक आयु के पुरुषों में गांवों में बेरोजगारी दर 4.3 जबकि महिलाओं में 3.9 फीसदी थी। शहरों में पुरुषों में यह आंकड़ा 6.1 जबकि महिलाओं में 8.9 फीसदी रहा।
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संशोधित आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण के तहत जिला स्तर पर चार श्रेणियों, श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर), कामगार-जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), बेरोजगारी दर (यूआर) और 15-29 वर्ष के वे युवा जो रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण किसी में शामिल नहीं हैं(एनईईटी) का डाटा जुटाया गया है।
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एनएसओ के इन आंकड़ों के अनुसार राज्यों के महिला आबादी के लिहाज से 10 सबसे बड़े जिलों में एक हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में महिला श्रम बल भागीदारी 80.9% रही जो देश में सबसे अधिक है। वहीं पूर्वी दिल्ली में यह आंकड़ा सिर्फ 18.9% रहा। जम्मू-कश्मीर के बडगाम में यह 71.4 फीसदी, ओडिशा के मयूरभंज में 71.8 फीसदी और छत्तीसगढ़ के सरगुजा में 69 फीसदी रही। देशभर में करीब 57.8 फीसदी जिलों में महिला एलएफपीआर 40 फीसदी या उससे अधिक रही।
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समग्र श्रम बाजार में सूरत अव्वल
समग्र श्रम बाजार की तस्वीर में गुजरात का सूरत प्रमुख जिलों में सबसे आगे रहा। यहां कुल श्रम भागीदारी 68.6% और डब्ल्यूपीआर 67.8% दर्ज किया गया। इसके बाद बिहार का अररिया और तमिलनाडु का सलेम रहे, जबकि दोनों मानकों पर बिहार का दरभंगा सबसे निचले स्तर पर रहा।
दक्षिण-पश्चिम जिले में श्रम भागीदारी सबसे अधिक
दिल्ली के चयनित जिलों में दक्षिण-पश्चिम दिल्ली ने 46.7 फीसदी श्रम बल भागीदारी दर और 45.2 फीसदी कार्यबल जनसंख्या अनुपात के साथ दोनों श्रेणी में सबसे ऊंचा स्तर दर्ज किया। इसी जिले में बेरोजगारी दर 3.2 फीसदी रही, जो चयनित जिलों में सबसे कम है।
पूर्वी दिल्ली में बेरोजगारी सबसे ज्यादा
पूर्वी दिल्ली में बेरोजगारी दर सबसे अधिक 8.3% रही। एनईईटी दर दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में सबसे कम 12.3%, जबकि नॉर्थ दिल्ली में सबसे अधिक 44.3% रही। चयनित जिलों में एलएफपीआर 41.4 से 46.7% और डब्ल्यूपीआर 39.6 से 45.2 प्रतिशत के बीच रहा।
गांवों के मुकाबले शहरों में बेरोजगारी बहुत अधिक
अगस्त में 15 वर्ष और अधिक आयु के पुरुषों में गांवों में बेरोजगारी दर 4.3 जबकि महिलाओं में 3.9 फीसदी थी। शहरों में पुरुषों में यह आंकड़ा 6.1 जबकि महिलाओं में 8.9 फीसदी रहा।