यूपी, पंजाब और हरियाणा समेत उत्तर भारत में शनिवार को हुई बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्रेटर नोएडा, दनकौर, जेवर, दादरी में बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवा से गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई है। अंबाला, यमुनानगर, जींद, सिरसा, पानीपत, कुरुक्षेत्र व करनाल में भी हवा-बारिश से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है।
ओलावृष्टि से,दलहन और तेलहन को नुकसान की आशंका
पंजाब में मालवा के छह जिलों में गेहूं की हजारों एकड़ फसल को नुकसान हुआ है। बठिंडा, फिरोजपुर, फतेहगढ़ साहिब, मोगा, संगरूर, मानसा और राजपुरा में भी तेज आंधी और बारिश से गेहूं-सरसों की फसल जमीन पर बिछ गई है। भिवानी, रोहतक, सोनीपत और झज्जर में ओलावृष्टि से खड़ी फसल को भारी नुकसान हुआ है। राजस्थान के कई इलाकों ओले गिरने से खड़ी व काट कर रखी गई फसलों को नुकसान पहुंचा।
दलहन और तेलहन की फसल को भी नुकसान
उत्तर प्रदेश में दलहन और तेलहन की फसल को भी नुकसान की आशंका जताई गई है। पश्चिमी यूपी खासकर गाजियाबाद और मेरठ से सटे क्षेत्रों में तेज अंधड़ के साथ सुपारी के आकार के ओले बरसे। इससे गई जगह गेहूं, सरसों की फसलें बिछ गई हैं। एक हफ्ते के भीतर तीसरी बार मौसमी उठापठक ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
कुछेक इलाकों में ओले पड़ने की चेतावनी
मौसम विज्ञानियों ने रविवार को भी कुछेक इलाकों में ओले पड़ने की चेतावनी जारी की है। प्रदेश में वाराणसी, इलाहाबाद, फुर्सतगंज, झांसी, मेरठ, चुर्क, बाराबंकी, कानपुर आईएएफ, लखनऊ, बांदा समेत कई स्थानों पर 0.3 मिमी. से 2.8 मिमी. तक बारिश दर्ज की गई। वहीं, रात को मेरठ, जौनपुर समेत तराई क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बौछारों ने दोबारा दस्तक दी। मेरठ, उरई, हमीरपुर, मुजफ्फरनगर में कई स्थानों पर बिजली गिरने की भी सूचना है। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के निदेशक जेपी गुप्त ने बताया कि पहाड़ों पर सक्रिय हुये पश्चिमी विक्षोभ और राजस्थान के पास बने साइक्लोनिक सिस्टम केचलते मौसम में यह बदलाव आया है।
बादलों की आवाजाही के बीच बूंदाबांदी हो सकती है
रविवार को भी प्रदेश के कई इलाकों में बादलों की आवाजाही के बीच बूंदाबांदी हो सकती है। कुछेक स्थानों पर ओले गिर सकते हैं। सोमवार से मौसम सामान्य होना शुरू हो जाएगा। दूसरी तरफ, उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। बारिश से उत्तराखंड में पांच फीसदी फसल प्रभावित हुई है। हालांकि टमाटर, शिमला मिर्च, लीची, आडू जैसी फसलों के लिए राज्य में यह बारिश फायदेमंद रही है। लेकिन पूरे पंजाब और हरियाणा में किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं।