प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को बिहार के मधेपुरा संयंत्र से 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता के इलेक्ट्रिक इंजन को हरी झंडी दिखाई। इस संयंत्र में ऐसे 800 इंजन के निर्माण की योजना है। उम्मीद की जा रही है कि यह लक्ष्य 11 साल में हासिल कर लिया जाएगा।
तेज रफ्तार-धुआं कम, मोदी ने लगाया भारतीय रेल को नया इंजन
तकनीकि फायदा
फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम के साथ समझौते के तहत पहले पांच इंजन आयात करने हैं। इंजन की अधिकतम रफ्तार 120 किमी प्रति घंटा होगी। बाकी 795 इंजनों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ कार्यक्रम के तहत इसी संयंत्र में किया जाएगा।
ये है उद्देश्य
संयंत्र 250 एकड़ में फैला है। इसमें एक परीक्षण ट्रैक भी है। इस इंजन को रेलवे की परिचालन लागत घटाने और प्रदूषण कम करने के लिए ट्रैक पर उतारा जा रहा है....
बड़ी बातें
-रेलवे में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) किया गया है।
-परियोजना में फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम की 74 फीसदी और भारतीय रेलवे की 26 फीसदी हिस्सेदारी है।
-परियोजना की अनुमानित लागत 20 हजार करोड़ रुपये है।
-अगले 11 साल में संयंत्र में 800 उच्च क्षमता वाले इंजन तैयार होंगे।
-हर इंजन की औसत लागत 25 करोड़ रुपये होगी।
-मधेपुरा निर्माण संयंत्र (बिहार) सहित सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) व नागपुर
(महाराष्ट्र) के मरम्मत डिपो के निर्माण पर 1300 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
बाकी इंजनों को इस साल मिलेगी मंजूरी
-वर्ष 2019-2020 के संयंत्र में 35 इंजन तैयार कर लिए जाएंगे।
-वर्ष 2020-21 में संख्या बढ़ाते हुए संयंत्र से 60 इंजनों का उत्पादन किया जाएगा।
-इसके बाद लक्ष्य हासिल करने तक हर साल 100 इंजनों का निर्माण किया जाएगा।
-इन इंजनों का इस्तेमाल कोयला और लौह अयस्क की ढुलाई में किया जाएगा।
-अब तक भारत के पास सबसे ज्यादा 6,000 हॉर्स पावर क्षमता के इंजन हैं।
-भारत के अलावा रूस, चीन, जर्मनी और स्वीडन के पास 12 हजार हॉर्स पावर क्षमता के रेल इंजन हैं।
-परियोजना से 10 हजार लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।