बीते कुछ दिन में विपक्षी एकता को लेकर कई बयान सामने आए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस को जल्द निर्णय लेने के लिए कहा तो कपिल सिब्बल ने कहा सब चाहते हैं बस इतनी सी बात है कि पहले आई लव यू कौन कहेगा। सपा के एक नेता ने तो अखिलेश यादव के 2024 में प्रधानमंत्री बनने तक की भविष्यवाणी कर दी।
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इन बयानों से ये तो साफ दिख रहा है कि कांग्रेस, जदयू समेत तमाम विपक्षी दल 2024 लोकसभा चुनाव एकसाथ मिलकर लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, ये कैसे होगा, हो पाएगा भी या नहीं? इससे भाजपा को नुकसान होगा या फायदा? ये सारे सवाल अभी सवाल ही हैं।
इन सवालों के बीच विपक्ष के चेहरे को लेकर भी चर्चा जारी है। हर कोई अपनी पार्टी के नेता को प्रधानमंत्री का दावेदार बता रहा है। विपक्ष से पीएम पद का चेहरा कौन हो सकता है? आइए इसे समझने की कोशिश करते हैं...
विपक्ष से कौन-कौन कर रहा पीएम पद की दावेदारी?
1. राहुल गांधी: कांग्रेस विपक्ष का सबसे बड़ा दल है। पार्टी के नेता राहुल गांधी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद के सबसे मजबूत दावेदार माने जाते हैं। विपक्ष के कई दलों ने उनका समर्थन भी किया, लेकिन कई दलों ने उनसे दूरी बना रखी है। कांग्रेस ने कभी आधिकारिक तौर पर राहुल को पीएम उम्मीदवार नहीं बताया है, हालांकि समय-समय पर कई कांग्रेसी नेता जरूर ये बात कहते रहे हैं।
राहुल गांधी अगर विपक्ष को एकजुट करने में सफल रहे तो उनकी दावेदारी सबसे मजबूत होगी। ऐसा इसलिए भी क्योंकि विपक्ष में कांग्रेस इकलौती ऐसी पार्टी है, जिसका जनाधार उत्तर भारत से लेकर दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक है। अगर कांग्रेस लोकसभा चुनाव में विपक्ष के अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब होती है तो पीएम पद के लिए राहुल की दावेदारी काफी मजबूत हो जाएगी।
2. ममता बनर्जी: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भी विपक्ष को साथ लाने की कोशिश करती रही हैं। हालांकि, इस वक्त वो थोड़ी शांत दिखाई दे रही हैं। ममता बनर्जी ने कभी खुद ये बात नहीं कही है, लेकिन उनके पार्टी के कई नेताओं ममता को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बताया है। अभी लोकसभा में टीएमसी के 23 लोकसभा सदस्य और 13 राज्यसभा सदस्य हैं। ममता ने 2024 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कई राज्यों में पार्टी का विस्तार शुरू कर दिया है। अगर लोकसभा चुनाव में टीएमसी अच्छा प्रदर्शन कर लेती है तो ममता की दावेदारी और मजबूत हो जाएगी। ये जीती हुई सीटों के आंकड़ों पर ही निर्भर करेगा।
3. नीतीश कुमार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी भाजपा से अलग होने के बाद से विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हैं। नीतीश की पार्टी के पास अभी 16 लोकसभा सदस्य और पांच राज्यसभा सदस्य हैं। नीतीश कुमार को राजद का भी साथ मिला हुआ है। राजद के पास अभी छह राज्यसभा सदस्य हैं। अगर दोनों मिलकर 2024 लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो नीतीश कुमार की दावेदारी और मजबूत हो सकती है। हालांकि, बिहार के बाहर उनके लिए समर्थन जुटाना बड़ी चुनौती होगी। नीतीश खुद तो पीएम पद की दावेदारी से इंकार कर चुके हैं, लेकिन उनके पार्टी के नेता हमेशा इसको लेकर बयान देते रहे हैं। हालांकि, नीतीश के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां हैं। पहला ये कि भाजपा से अलग होने के बाद से नीतीश की पार्टी में बगावत तेज हो गई है। कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। दूसरी बड़ी चुनौति ये है कि नीतीश अकेले दम पर कभी भी पीएम पद की दावेदारी नहीं कर सकते। इसके लिए उन्हें राजद व अन्य दलों का साथ चाहिए होगा।
4. शरद पवार: विपक्ष के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक शरद पवार भी पीएम पद के दावेदारों में हैं। शरद पवार की पार्टी एनसीपी 90 प्रतिशत महाराष्ट्र तक ही सीमित है। ऐसे में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, टीएमसी, जेडीयू जितनी सीटें मिलना तो मुश्किल है, लेकिन इसके बावजूद पवार पीएम पद की रेस में उन चंद दावेदारों में शामिल हैं, जो काफी मजबूत माने जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण ये है कि पवार के रिश्ते विपक्ष के सभी दलों के नेताओं के साथ काफी अच्छे हैं। ऐसे में अगर चुनाव के बाद विपक्ष सरकार बनाने की स्थिति में आती है और अगर किसी एक नाम पर विपक्ष की सहमति नहीं बनती है तो पवार का नाम आगे हो सकता है।