5 मार्च 2018 को शुरू हुआ संसद का बजट सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। इसे बीते एक दशक में संसद का सबसे खराब सत्र माना जा रहा है। इस दौरान पांच दर्जन से ज्यादा बिल संसद में पेश ही नहीं हो सके।
विपक्ष अपने ही हंगामे के कारण अपना ही अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं कर पाया। इस दौरान सरकार की सहयोगी पार्टियां तेदेपा और अन्नाद्रमुक भी विपक्ष के साथ खड़ी नजर आईं। विपक्ष का ज्यादातर समय चर्चा के बजाय नारेबाजी और वेल में बीता।
इस दौरान लोकसभा में 127 घंटे से ज्यादा कामकाज नहीं हुआ। राज्यसभा के करीब 121 घंटे बर्बाद कर दिए गए। बता दें कि हर घंटे संसद की कार्यवाही पर 1.5 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। बात करें लोकसभा की तो यहां 29 बैठकों में कुल 34 घंटे 5 मिनट ही कार्यवाही चली। जबकि राज्यसभा में 30 बैठकों के जरिये कुल 44 घंटे ही कामकाज हो सका।
उल्लेखनीय है कि लोकसभा में 28 बिल पेश किए जाने थे। वहीं राज्यसभा में 39 बिल पर चर्चा होनी थी। हालांकि ऐसा नहीं सदन का काम बिल्कुल ठप रहा। लोकसभा में वित्त विधेयक सहित पांच बिल भी पारित हुए हैं।
वहीं राज्यसभा में सिर्फ एक बिल ही पारित किया जा सका। इस दौरान अन्य पांच विधेयक भी लोकसभा में पेश किए गए। विपक्ष अपने ही हंगामे के कारण अपना ही अविश्वास प्रस्ताव पेश नहीं कर पाया। अविश्वास प्रस्ताव लोकसभा में पेश नहीं हो सका।