पटना में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आज से शुरू हुई। इस बीच पटना में लगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के होर्डिंग ने मीडिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इन होर्डिंग्स में नीतीश की फोटो के साथ लिखा है, 'प्रदेश में दिखा, देश में दिखेगा।'
कहा जा रहा है कि नीतीश विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दौड़ में हैं। भाजपा से अलग होने के बाद खुद नीतीश कुमार कई बार बोल चुके हैं कि 2024 के लिए वह पूरे विपक्ष को एकजुट करेंगे। 2003 में अस्तित्व में आई जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू के पास अभी बिहार विधानसभा में कुल 45 सदस्य हैं। इसके अलावा 16 लोकसभा और पांच राज्यसभा सदस्य हैं।
पिछले चुनावों में जदयू का प्रदर्शन कैसा रहा है? नीतीश कुमार कैसे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में खुद को शामिल कराने में जुटे हैं? आइए जानते हैं…
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लालू यादव और नीतीश कुमार
- फोटो : एएनआई
कैसे सिकुड़ी जदयू?
बीते विधानसभा चुनावों में जदयू के प्रत्याशी बिहार, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश में जीतने में सफल रहे। बिहार में जदयू के 45 विधायक हैं। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के सात और मणिपुर के पांच विधायक नीतीश कुमार की पार्टी का साथ छोड़ चुके हैं। अब ये सभी भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं। मणिपुर में अब केवल एक विधायक जदयू के पास है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश में जदयू का अब एक भी विधायक नहीं रह गया है।
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नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
- फोटो : अमर उजाला
बिहार के अलावा अन्य राज्यों में क्या रहा है जदयू का इतिहास?
बिहार के अलावा जदयू झारखंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर ही ऐसे राज्य हैं जहां जदयू को कुछ सफलता मिलती रही है। झारखंड में 2005 में जदयू को छह सीटें मिली थीं। जो 2009 में घटकर दो रह गईं। 2014 और फिर 2019 में जदयू ने यहां 11 और 45 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन एक पर भी जीत नहीं मिली। अरुणाचल प्रदेश में 2019 विधानसभा चुनाव के दौरान 14 सीटों पर जदयू के प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इनमें सात पर पार्टी को जीत मिली। हालांकि, अब ये सभी भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसी तरह मणिपुर में इस साल हुए चुनाव में 38 सीटों पर जदयू के प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से छह पर नीतीश कुमार की पार्टी को जीत मिली। शुक्रवार को इनमें से पांच विधायक भाजपा में शामिल हो गए।
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नीतीश कुमार
- फोटो : अमर उजाला
कैसे नीतीश प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे?
ये समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने कहा, 'नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री का सपना राजद ने दिखाया है। ऐसा संभव है कि इस बार महागठबंधन इसी शर्त पर हुआ हो कि 2024 लोकसभा चुनाव में नीतीश कुमार को विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। नीतीश को राजद के अलावा उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी का साथ दिलाने का भी वादा किया गया होगा। मतलब नीतीश को केंद्र की राजनीति में भेजकर बिहार की कमान पूरी तरह से तेजस्वी अपने हाथ में लेने का प्लान कर रहे हैं।'
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Bihar Politics: नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव शपथ लेते हुए
- फोटो : Agency
अशोक आगे कहते हैं, 'विपक्ष में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए इसी शर्त पर सहमति बन सकती है कि जिसके पास ज्यादा पार्टियों का समर्थन होगा, उसे ही चेहरा बना दिया जाएगा। जदयू, राजद और सपा उत्तर भारत के तीन बड़े विपक्षी दल हैं। बगैर इनकी सफलता के विपक्ष की सफलता मुश्किल होगी।'