अपने देश में एक कहावत खूब प्रचलित है कि 'हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई, आपस में हैं भाई-भाई'। हालांकि ऐसा बहुत कम ही देखने को मिलता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में एक व्यक्ति ने इस कहावत को हकीकत में बदल कर दिखाया है। यहां एक मुस्लिम शिक्षक ने पूरे हिंदू रीति-रिवाजों से अपने एक हिंदू साथी का अंतिम संस्कार किया है। उसने ऐसा करने के पीछे बेहद ही भावुक वजह बताई है।
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Hindu funeral
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दरअसल, जलपाईगुड़ी जिले के बनरहट के रहने वाले अशफाक एक सरकारी स्कूल में पढ़ाते हैं। उनके हिंदू दोस्त संजन कुमार विश्वास भी यहीं पढ़ाते थे। हालांकि वो उम्र में अशफाक से काफी बड़े थे। हाल ही में उनकी मृत्यु हो गई। अब चूंकि संजन कुमार के परिवार में सिर्फ उनकी तीन बेटियां ही हैं, इसलिए उन्होंने एक साथी और एक बेटे की तरह फर्ज निभाते हुए उनका अंतिम संस्कार किया। इतना ही नहीं, उन्होंने इसके लिए अपना सिर और मूंछें भी मुड़वा लीं। साथ ही वो परिवार के साथ 11 दिन का शोक भी मनाएंगे।
अशफाक का कहना है कि संजन कुमार उनके पिता के समान थे। उनसे उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने बताया कि संजन कुमार साल 2005 में रिटायर हो गए थे और उनका स्कूल आना-जाना बंद हो गया था, लेकिन उनकी दोस्ती हमेशा बरकरार थी, क्योंकि उनसे उन्हें जो सबसे बेहतरीन चीज सीखने को मिली थी, वो है मानवता।
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Hindu-Muslim unity
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अशफाक ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया, 'जिस साल स्कूल अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा था, उसी साल स्कूल में मेरी नियुक्ति हुई थी। स्कूल में ऐसे कई लोग थे, जो धर्म के आधार पर मेरी नियुक्ति का विरोध कर रहे थे, लेकिन संजन कुमार हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। सिर्फ यही नहीं, जब तक मुझे वहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल गया, मैं उन्हीं के घर पर रूका रहा।' अशफाक ने कहा कि वो धर्म में नहीं बल्कि मानवता में विश्वास करते थे और ये चीज मैनें उन्हीं से सीखी है और इसीलिए उनका अंतिम संस्कार करने का फैसला किया।
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Humanity
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अशफाक ने कहा कि मैं उदारवादी विचारों वाला व्यक्ति हूं और ये सब मैंने सिर्फ और सिर्फ संजन सर से ही सीखा है। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा कहता हूं कि मेरे तीन पिता है- एक वो जिन्होंने मुझे जन्म दिया, दूसरे वो जिन्होंने मुझे शिक्षा दी और इस काबिल बनाया और तीसरे संजन सर, जिन्होंने मुझे दुनिया की सबसे बड़ी चीज मानवता सिखाई। उन्होंने कभी किसी बात की परवाह नहीं की और जो सही था, वही किया और आज मैं भी वही कर रहा हूं।