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एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते, फिर भी सियासी मजबूरी में बनी 'जबरिया जोड़ी'

Thu, 28 Nov 2019 10:48 PM IST
अमित कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित कुमार Updated Thu, 28 Nov 2019 10:48 PM IST
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Maharashtra Swearing in ceremony: When anti parties come together to form government
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके परिवार के साथ शरद पवार - फोटो : PTI

राजनीति में न कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही दोस्त। महाराष्ट्र में बनी उद्धव सरकार से यह बात एक बार फिर से साबित हो गई। भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए उसी के पुराने दोस्त शिव सेना ने अपने विरोधी दल एनसीपी और कांग्रेस का दामन थाम लिया। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है, जब सत्ता के लिए एक-दूसरे को फूटी आंख भी न सुहाने वाले दल एक साथ आ गए और सियासी मजबूरी में बेमेल 'जबरिया जोड़ी' बना ली। 


 

कश्मीर में महबूबा और मोदी साथ : 

Maharashtra Swearing in ceremony: When anti parties come together to form government
Mehbooba Mufti-Narendra Modi

28 दिसंबर, 2014। जम्मू व कश्मीर में हुए विधानसभा चुनावों के परिणाम सामने आए। मगर किसी भी दल को सरकार बनाने का जनादेश नहीं मिला। 87 सीटों में से पीडीपी को 28, भाजपा को 25, नेशनल कॉन्फ्रेंस को 15 और कांग्रेस को 12 सीटें मिलीं। 

नतीजतन प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। मगर एक मार्च को मुफ्ती मोहम्मद सईद ने भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। मगर एक साल बाद 7 जनवरी, 2016 को उनका निधन हो गया। राज्य में फिर से राष्ट्रपति शासन लग गया। 

22 मार्च को महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और चार अप्रैल को वह जम्मू—कश्मीर की पहली महिला सीएम के रूप में शपथ ले ली। मगर घाटी में जारी हिंसा के बीच जून 2018 को यह बेमेल गठबंधन टूट गया।

कर्नाटक में कांग्रेस ने जेडीएस को लगाया गले 

Maharashtra Swearing in ceremony: When anti parties come together to form government
महागठबंधन (फाइल फोटो)

ऐसा ही एक बेमेल जोड़ी पिछले कर्नाटक में भी बनी। यहां भी लक्ष्य भाजपा को सत्ता से दूर रखना था। वर्ष 2018 में भाजपा ने 104 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम रह गईं। भाजपा बहुमत नहीं जुटा पाई और कुछ ही दिनों येदियुरप्पा को इस्तीफा देना पड़ा। 

इसके बाद कांग्रेस के 78 विधायकों की मदद से महज 38 सीटें जीतने वाली जनता दल सेक्युलर ने सरकार बना ली। कांग्रेस ने सीएम पद पर दावेदारी नहीं की और एचडी कुमारास्वामी को मुख्यमंत्री बनवा दिया। 

इस मौके पर विपक्षी एकता भी देखने को मिली। शपथ ग्रहण समारोह में मायावती, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और विपक्ष के तमाम दिग्गज पहुंचे। मगर कुछ ही दिनों में मतभेद खुलकर सामने आने लगे। यहां तक कि कुमारास्वामी के सार्वजनिक मंच पर आंसू भी छलक उठे। लोकसभा चुनावों में इस गठबंधन को करारी हार मिली और जल्द ही कुमारास्वामी की कुर्सी भी चली गई। 


 
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बिहार में लालू-नीतीश मिले 

Maharashtra Swearing in ceremony: When anti parties come together to form government
nitish kumar and lalu yadav

बिहार में 2015 के विधानसभा चुनावों में भाजपा से मुकाबले के लिए जदयू, राजद और कांग्रेस एक ही मंच पर आ गए। उन्होंने महागठबंधन तैयार किया। महागठबंधन ने 243 में से 178 सीटें जीतीं और नीतीश मुख्यमंत्री बने। मगर जुलाई 2017 में उन्होंने इस्तीफा देकर फिर से एनडीए का दामन थाम लिया। बताया कि लालू प्रसाद के बेटों की मनमर्जी के चलते उन्होंने यह फैसला लिया। 

 
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सपा और बसपा गठबंधन 

Maharashtra Swearing in ceremony: When anti parties come together to form government
24 साल बाद एक साथ माया और मुलायम

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सपा और बसपा एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते, लेकिन एक नहीं बल्कि दो-दो बार दोनों साथ आए। पहली बार 1993 में बाबरी मस्जिद गिरने के बाद भाजपा से लड़ने के लिए मुलायम सिंह यादव और कांशीराम साथ आए। दोनों ने मिलकर 167 सीटें जीतीं। 

मुलायम सिंह यादव 4 दिसंबर, 1993 से 3 जून 1995 तक मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद मायावती ने सीएम पद संभाला, लेकिन चार महीने में ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 

बुआ-भतीजे का गठबंधन हुआ फेल

पिछले लोकसभा चुनावों में एक बार फिर सपा और बसपा साथ आए। अखिलेश ने मायावती के साथ गठबंधन किया, लेकिन फिर भी वह भाजपा की लहर को नहीं रोक पाए। 

मायावती को मिला था भाजपा का साथ  

2002 में बनी मायावती ने भाजपा के समर्थन से सरकार बनाई थी। मगर एक साल के भीतर ही उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। 
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