दक्षिण भारत की राजनीति के भीष्म पितामह माने जाने वाले एम करुणानिधि ने शाम 6.10 मिनट पर आखिरी सांस ली। करुणानिधि का 94 साल की उम्र में निधन हो गया है। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। द्रमुक अध्यक्ष एम करुणानिधि का इलाज कावेरी अस्पताल में चल रहा था। कावेरी अस्पताल ने बुलेटिन जारी कर उनके निधन की सूचना दी।
दक्षिण भारत की राजनीति में माथुवेल करुणानिधि का नाम बहुत ही महत्वपूर्ण और लोकप्रिय नाम है। द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के मुखिया और पांच बार के मुख्यमंत्री इस समय कावेरी अस्पताल में लबें समय भर्ती थे। उनकी हालत कल से बिगड़ी और बिगड़ती ही गई।
अपने नेता कि बिगड़ती हालत की वजह से राज्य के लोग काफी परेशान हैं और उनका रो-रोकर बुरा हाल है। 94 साल के नेता यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के साथ ही उम्र संबंधी बीमारियों से ग्रसित हैं। करुणानिधि का जन्म 3 जून 1924 को नागपट्टिनम जिले के थिरुक्कुवलाई गांव में मुथुवेलु और अंजू के घर हुआ था। आज हम आपको बताते हैं उनकी जिंदगी के अनछुए पहलुओं के बारे में।
केवल 14 साल की उम्र में करुणानिधि ने स्थानीय युवाओं के लिए एक संस्थान की स्थापना की थी। जिसके जरिए वह राजनीतिक विचारधारा वाला हाथों से लिखा हुआ अखबार मानावर नेसान निकाला करते थे। यह बाद में पार्टी का मुखपत्र बन गया।
साल 1957 से 2016 के बीच अपने राजनीतिक करियर के दौरान करुणानिधि ने 13 चुनावों में हिस्सा लिया लेकिन कभी कोई सीट नहीं हारे। उनके नाम यह रिकॉर्ड दर्ज है।
करुणानिधि का असली नाम दक्षिणमूर्ति है। राजनीतिक पारी शुरू करने से पहले वह तमिल फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखा करते थे। उन्होंने 1950 में मंथिरी कुमारी फिल्म लिखी थी। यह फिल्म एक्टर एमजी रामचंद्रन के लिए टर्निंग प्वाइंट था।
करुणानिधि ने 1952 में आई शिवाजी गणेशन की डेब्यू फिल्म परशक्ति की स्क्रिप्ट लिखी थी। यह फिल्म ना केवल तमिल इतिहास की महान फिल्म बनी बल्कि इसके डायलॉग भी काफी मशहूर हुए। इस फिल्म ने काफी अच्छी कमाई की लेकिन इसे काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा।