लोकसभा चुनाव 2019ः बिहार की इन सीटों पर छिड़ेगा 'महासंग्राम', किसमें कितना है दम
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सुपौलः रंजीत रंजन बनाम दिलेश्वर कामत
सुपौल बिहार की हाईप्रोफाईल सीट है। यहां से कांग्रेस की प्रवक्ता रंजीत रंजन सांसद हैं। कांग्रेस ने इस बार भी उन्हे सुपैल से चुनावी संग्राम में उतारा है, जबकि जदयू ने अपने पुराने प्रत्याशी दिलेश्वर कामत को एक बार फिर मौका दिया है। यहां दोनों उम्मीदवारों में जोरदार मुकाबला है।
पिछले चुनाव में भाजपा और जदयू ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था, लेकिन वो इस बार एक साथ मैदान में हैं। इस कारण रंजीत रंजन की राह कठिन हो सकती है। रंजीत रंजन बिहार के मधेपुरा से सांसद बाहुबली नेता राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पत्नी हैं। कहा जाता है कि पिछली बार के नजदीकी मुकाबले में पप्पू यादव का यादव कार्ड चल गया था, जिस कारण मोदी लहर के बावजूद रंजीत रंजन जीत गई थीं।
नवादा से भाजपा सांसद गिरिराज सिंह का टिकट इस बार काट दिया गया। यह सीट लोजपा के हिस्से है, जहां से चंदन कुमार उम्मीदवार हैं। इधर, महागठबंधन में राजद ने जेल में बंद राजबल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी को नवादा से चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर मुकाबला हर बार भाजपा बनाम राजद ही रहा है। नवादा की सीट भूूमिहार बाहुल्य मानी जाती है, जबकि यादव वोटर के साथ साथ दलित-महादलित मतदाता यहां प्रभावी साबित होते रहे हैं। विभा देवी यादव सुमदाय से आती है। यादव-मुस्लिम वोटरों का माय समीकरण बनने की स्थिति में चंदन कुमार की राह कठिन हो सकती है।
सारणः राजीव प्रताप रूडी बनाम चंद्रिका राय
सारण लोकसभा सीट राजद का गढ़ रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में यहां से भाजपा के राजीव प्रताप रुडी ने जीत दर्ज की थी। रुडी मोदी सरकार में मंत्री भी बने लेकिन उन्हे बाद में किसी कारण मंत्री पद छोड़ना पड़ा था। सारण से रुडी एक बार फिर से ताल ठोक रहे हैं और उनके सामने हैं लालू यादव के समधी चंद्रिका राय। सारण राजपूतों का गढ़ माना जाता है, जो परंपागत रुप से भाजपा के वोटर माने जाते हैं। हालांकि यादव-मुस्लिम वोटरों का समीकरण राजद के पक्ष में जाता रहा है, लेकिन पिछले चुनाव में ये समिकरण बिखर गया था। इस कारण्ज राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी हार गईं थी।
2014 लोकसभा चुनाव में जदयू को जिन दो सीटों पर जीत मिली थी, उनमें से एक पू्र्णिया की सीट है। जदयू, भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ी थी। पूर्णिया के सांसद संतोष कुशवाहा ने मोदी लहर में भी नीतीश कुमार की लाज बचाई थी। संतोष ने करीबी मुकाबले में भाजपा के उदय सिंह को हराया था। इस बार उदय सिंह ने पाला बदल लिया है और कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। मुकाबला नजदीकी होने का अनुमान है, क्योंकि सीमांचल की इस सीट पर राजद का यादव और मुस्लिम वाला समीकरण कांग्रेस के साथ होगा और एनडीए का खेल बिगाड़ सकता है।