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MHA: शाह बोले- ब्रह्मपुत्र, कावेरी और गोदावरी को जोड़ने से भारत में अगले 100 वर्षों तक पानी की नहीं होगी कमी
Thu, 20 Aug 2026 07:52 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 20 Aug 2026 07:52 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को मामल्लापुरम के पास कोवलम के होटल में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें दक्षिणी राज्यों के नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों ने अंतर्राज्यीय विवादों, सुरक्षा और विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और तमिलनाडु के सीएम विजय।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दक्षिणी राज्य देश की तरक्की के मुख्य आधार हैं। इन राज्यों की तरक्की पानी पर निर्भर करती है। चाहे खेती हो, उद्योग हों, स्वस्थ नागरिक हों या पर्यावरण—इन चारों क्षेत्रों में पानी इस इलाके की जान है। अपने राज्य के हितों की रक्षा करना गलत नहीं है, लेकिन अगर हितों की रक्षा की प्रक्रिया में राज्यों को वर्षों तक पानी न मिले और वह बस समुद्र में बह जाए, तो इससे कोई असल फायदा नहीं होता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ब्रह्मपुत्र से लेकर कावेरी और गोदावरी तक बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने से यह पक्का हो सकता है कि भारत में अगले 100 वर्षों तक पानी की कमी न हो।
इन मामलों को सुलझाने पर बनी सहमति
शाह ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही है। उन्होंने कहा, इस पहल से कई जलमार्ग भी बन सकते हैं। इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण बेहतर होगा, बल्कि एक सस्ता ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय, अंतर-राज्य परिषद और संबंधित राज्यों की संयुक्त बैठकों के ज़रिए दक्षिणी राज्यों से जुड़े पानी के लंबित मुद्दों को जल्द सुलझाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। दक्षिणी राज्य, आपसी बातचीत और रचनात्मक समाधानों के ज़रिए पानी से जुड़े इन लंबित विवादों को जल्द सुलझाने के गृह मंत्री के सुझाव से सहमत हुए। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच संपत्ति और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर, दोनों राज्य गृह मंत्रालय के साथ बातचीत करके इन मामलों को सुलझाने पर सहमत हुए।
दक्षिण भारत ने हर क्षेत्र में योगदान दिया
शाह ने कहा कि दक्षिण भारत का यह क्षेत्र देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चाहे साहित्य, अनुसंधान और विकास, अंतरिक्ष, आईटी, एआई, औद्योगिक विकास या कृषि हो, दक्षिण भारत ने हर क्षेत्र में योगदान दिया है। दक्षिण भारत ने देश के आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और बुनियादी ढांचे के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और इसीलिए दक्षिण में भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आया है। दक्षिण भारत की पूरी विकास यात्रा तीन स्तंभों पर आधारित रही है। उच्च साक्षरता दर, प्रशिक्षित कार्यबल और गहरे समुद्र के उपयोग में तकनीकी विशेषज्ञता। इन तीन स्तंभों ने दक्षिण भारत को देश के विकास में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनाया है। दक्षिण भारत के लोगों और सरकारों ने नवाचार और राजस्व सृजन के क्षेत्रों में कई बेहतरीन परंपराएं भी स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि पूरे भारत को इन दो क्षेत्रों में दक्षिण भारत से सीखना चाहिए।
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60 साल से लंबित कई मुद्दों को सुलझाया गया
अमित शाह ने कहा कि 2014 से ज़ोनल काउंसिल को एक सार्थक मंच बनाने की कोशिशें की गई हैं। ज़ोनल काउंसिल असल में एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो लंबे समय तक धीरे-धीरे सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह गई थी। 2004-2014 और 2014-2026 के समय की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पहले काउंसिल की साल में औसतन ढाई बैठकें होती थीं, जबकि अब हर साल छह बैठकें होती हैं। 2014 से अब तक ज़ोनल काउंसिल की कुल 70 बैठकें हुई हैं, जिनमें 1,869 में से 1,445 मुद्दों (लगभग 80%) का समाधान किया गया। ज़ोनल काउंसिल की इन बैठकों के ज़रिए 60 साल से लंबित कई मुद्दों को सुलझाया गया है। उत्तर भारत में नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े आठ में से पांच मुद्दे ब्रिटिश काल से पहले से चले आ रहे थे। पांच महीने पहले एक अंतिम समझौता हुआ और कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैले सभी मुद्दों (100%) को सुलझाकर विवाद-मुक्त उत्तर भारत का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
कम करनी होगी स्कूल छोड़ने की दर
गृह मंत्री ने कहा कि कुपोषण, स्टंटिंग (बच्चों का शारीरिक विकास रुकना) और स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेश्यो) हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के मामले में हमें 100 प्रतिशत से कम किसी भी चीज़ से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। अभी पूरे देश में स्कूल छोड़ने की दर 9.5 है, और अगर सभी राज्य थोड़ा-थोड़ा भी सुधार करें, तो हम इसे 3 प्रतिशत से नीचे ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय ड्रॉपआउट दर 3 प्रतिशत से नीचे चली जाती है, तो बच्चे शिक्षित नागरिक बनेंगे और देश में संविधान की भावना को सही मायने में ज़मीनी स्तर तक लागू करने के लिए एक अनुकूल माहौल बनेगा। हम स्टंटिंग, यानी बच्चों का शारीरिक विकास रुकने की और भी खतरनाक समस्या की ओर बढ़ रहे हैं। यह धीरे-धीरे एक राष्ट्रीय समस्या बनती जा रही है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों की क्षमताओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए, हमें कुपोषण और स्टंटिंग को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में रहे मौजूद
इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल (रिटायर्ड) डीके जोशी, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू शामिल हुए। बैठक में राज्य सरकारों के मुख्य सचिव, सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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इन मामलों को सुलझाने पर बनी सहमति
शाह ने गुरुवार को तमिलनाडु के महाबलीपुरम में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही है। उन्होंने कहा, इस पहल से कई जलमार्ग भी बन सकते हैं। इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी और पर्यावरण बेहतर होगा, बल्कि एक सस्ता ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी मिलेगा। केंद्रीय गृह मंत्री ने जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय, अंतर-राज्य परिषद और संबंधित राज्यों की संयुक्त बैठकों के ज़रिए दक्षिणी राज्यों से जुड़े पानी के लंबित मुद्दों को जल्द सुलझाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। दक्षिणी राज्य, आपसी बातचीत और रचनात्मक समाधानों के ज़रिए पानी से जुड़े इन लंबित विवादों को जल्द सुलझाने के गृह मंत्री के सुझाव से सहमत हुए। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच संपत्ति और देनदारियों के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर, दोनों राज्य गृह मंत्रालय के साथ बातचीत करके इन मामलों को सुलझाने पर सहमत हुए।
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दक्षिण भारत ने हर क्षेत्र में योगदान दिया
शाह ने कहा कि दक्षिण भारत का यह क्षेत्र देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चाहे साहित्य, अनुसंधान और विकास, अंतरिक्ष, आईटी, एआई, औद्योगिक विकास या कृषि हो, दक्षिण भारत ने हर क्षेत्र में योगदान दिया है। दक्षिण भारत ने देश के आईटी, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और बुनियादी ढांचे के विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और इसीलिए दक्षिण में भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भी आया है। दक्षिण भारत की पूरी विकास यात्रा तीन स्तंभों पर आधारित रही है। उच्च साक्षरता दर, प्रशिक्षित कार्यबल और गहरे समुद्र के उपयोग में तकनीकी विशेषज्ञता। इन तीन स्तंभों ने दक्षिण भारत को देश के विकास में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनाया है। दक्षिण भारत के लोगों और सरकारों ने नवाचार और राजस्व सृजन के क्षेत्रों में कई बेहतरीन परंपराएं भी स्थापित की हैं। उन्होंने कहा कि पूरे भारत को इन दो क्षेत्रों में दक्षिण भारत से सीखना चाहिए।
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60 साल से लंबित कई मुद्दों को सुलझाया गया
अमित शाह ने कहा कि 2014 से ज़ोनल काउंसिल को एक सार्थक मंच बनाने की कोशिशें की गई हैं। ज़ोनल काउंसिल असल में एक संवैधानिक व्यवस्था है, जो लंबे समय तक धीरे-धीरे सिर्फ़ एक औपचारिकता बनकर रह गई थी। 2004-2014 और 2014-2026 के समय की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि पहले काउंसिल की साल में औसतन ढाई बैठकें होती थीं, जबकि अब हर साल छह बैठकें होती हैं। 2014 से अब तक ज़ोनल काउंसिल की कुल 70 बैठकें हुई हैं, जिनमें 1,869 में से 1,445 मुद्दों (लगभग 80%) का समाधान किया गया। ज़ोनल काउंसिल की इन बैठकों के ज़रिए 60 साल से लंबित कई मुद्दों को सुलझाया गया है। उत्तर भारत में नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े आठ में से पांच मुद्दे ब्रिटिश काल से पहले से चले आ रहे थे। पांच महीने पहले एक अंतिम समझौता हुआ और कश्मीर से लेकर उत्तर प्रदेश तक फैले सभी मुद्दों (100%) को सुलझाकर विवाद-मुक्त उत्तर भारत का लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।
कम करनी होगी स्कूल छोड़ने की दर
गृह मंत्री ने कहा कि कुपोषण, स्टंटिंग (बच्चों का शारीरिक विकास रुकना) और स्कूल छोड़ने की दर (ड्रॉपआउट रेश्यो) हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के मामले में हमें 100 प्रतिशत से कम किसी भी चीज़ से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। अभी पूरे देश में स्कूल छोड़ने की दर 9.5 है, और अगर सभी राज्य थोड़ा-थोड़ा भी सुधार करें, तो हम इसे 3 प्रतिशत से नीचे ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर राष्ट्रीय ड्रॉपआउट दर 3 प्रतिशत से नीचे चली जाती है, तो बच्चे शिक्षित नागरिक बनेंगे और देश में संविधान की भावना को सही मायने में ज़मीनी स्तर तक लागू करने के लिए एक अनुकूल माहौल बनेगा। हम स्टंटिंग, यानी बच्चों का शारीरिक विकास रुकने की और भी खतरनाक समस्या की ओर बढ़ रहे हैं। यह धीरे-धीरे एक राष्ट्रीय समस्या बनती जा रही है जो हमारी आने वाली पीढ़ियों की क्षमताओं को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए, हमें कुपोषण और स्टंटिंग को बहुत गंभीरता से लेना चाहिए।
दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में रहे मौजूद
इस बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन, पुडुचेरी के उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के उपराज्यपाल एडमिरल (रिटायर्ड) डीके जोशी, लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू शामिल हुए। बैठक में राज्य सरकारों के मुख्य सचिव, सलाहकार और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।