ED: वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताकर 113 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी, गिरफ्तारी से बचने के लिए पहुंचा दुबई
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुंबई ज़ोनल ऑफ़िस ने 12 अगस्त को 'प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002' के तहत मुंबई और ठाणे में कई जगहों पर छापेमारी की है। आरोपियों ने 'मनी ट्रेड कॉइन' नाम की एक अनधिकृत क्रिप्टोकरेंसी बनाई गई। बड़ी संख्या में निवेशकों को धोखाधड़ी से इसमें निवेश करने के लिए उकसाया गया। इसके चलते अगस्त 2017 से अप्रैल 2018 के बीच लगभग 113.10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। मुख्य आरोपी लखनपाल खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताकर निवेशकों को 'मनी ट्रेड कॉइन' में पैसा लगाने के लिए उकसाता था।
जांच एजेंसी ने ठाणे सिटी पुलिस द्वारा अमित मदनलाल लखनपाल, ताहा हाफ़िज़ काज़ी, सचिन वसंत शेलार, कोमल भीमराव शिरसाथ और अन्य के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त केस की जांच शुरू की थी। केस में आरोप लगाया गया था कि 'मनी ट्रेड कॉइन (एमटीसी)' नाम की एक अनधिकृत क्रिप्टोकरेंसी बनाई गई। निवेशकों से झूठ बोलकर उन्हें निवेश करने के लिए उकसाया गया।
आरोपियों ने निवेशकों को गुमराह करने के लिए दिल्ली, पुणे और नासिक में कई सेमिनार आयोजित किए गए थे। इनमें लखनपाल ने खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकारी बताकर एमटीसी कॉइन में निवेश पर भारी रिटर्न का वादा किया था। उसने एमटीसी कॉइन को सरकारी मान्यता दिलाने का वादा करके निवेशकों को लुभाया।
इसके बाद, कॉइन डिपॉजिट रेश्यो, एमटीसी बैंके, एमटीसीएक्स इंडिया और क्रिप्टोज़ानिया जैसी कई योजनाएं/एक्सचेंज शुरू किए गए। इनमें कथित तौर पर एमटीसी कॉइन की कीमतों में हेरफेर की गई। निकासी/ट्रेडिंग की सुविधाएँ रोक दी गईं। इसके चलते निवेशकों को अपनी मूल पूंजी और वादे के अनुसार मिलने वाला रिटर्न गंवाना पड़ा।
ईडी की जांच में यह भी पता चला है कि अमित लखनपाल अपने साथियों के साथ एंटीगुआ और बारबुडा का पासपोर्ट हासिल करके भारत से भाग गया है। फिलहाल वह दुबई में फर्जी पहचान बनाकर रह रहा है। तलाशी अभियान के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों के अलावा लगभग 1 करोड़ रुपये जब्त किए गए।