गुरुवार रात कांग्रेस ने जो लिस्ट जारी की उसमें महाराजगंज से तनुश्री त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया गया। वही तनुश्री जो जेल में बंद पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी की बेटी और अमनमणि त्रिपाठी की बहन हैं। लेकिन एक रात में फैसला बदल गया। शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे कांग्रेस ने जो नई सूची जारी की उसमें तनुश्री का नाम कट गया और उनकी जगह सुप्रिया श्रीनेत को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। आगे की तस्वीरों में जानिए कौन हैं तनुश्री और उनकी जगह आई सुप्रिया और क्या है ये पूरा मामला।
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तनुश्री त्रिपाठी-शिवपाल यादव
तनुश्री त्रिपाठी को कांग्रेस का टिकट मिलने से पहले शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया ने भी महाराजगंज से ही टिकट दिया था। हालांकि, तनुश्री की चाहत कांग्रेस के टिकट की ही थी। अब जब तनुश्री का टिकट कांग्रेस से काट दिया गया है तो अभी ये साफ नहीं हो पाया है कि वो शिवपाल की पार्टी से ही चुनाव लड़ेंगी या नहीं।
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अमरमणि त्रिपाठी-तनुश्री त्रिपाठी
- फोटो : Amar Ujala
तनुश्री त्रिपाठी उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री और मधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी अमरमणि त्रिपाठी की बेटी हैं। तनुश्री की मां मधुमणि त्रिपाठी भी 2003 में हुई मधुमिता हत्या कांड की दोषी हैं। 2007 में तनुश्री के पिता अमरमणि त्रिपाठी को आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद से अब तक वो जेल में हैं। मालूम हो कि मधुमिता हत्या कांड से पहले अमरमणि और मधुमिता का अफेयर लोगों के बीच चर्चा का विषय था।
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कांग्रेस-प्रसपा- तनुश्री त्रिपाठी
- फोटो : Amar Ujala
तनुश्री की पढ़ाई नैनीताल के सेंट मेरी कॉन्वेंट स्कूल से हुई। इसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए लंदन चली गईं। पढ़ाई के बाद उन्होंने यूके में ही एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी लेकिन घर की परिस्थितियों को देखते हुए 2014 में छोड़ दी। तनुश्री पहले से ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी से प्रभावित थीं और कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से उनकी तारीफ कर चुकी हैं। उनकी करीबी की वजह से शायद उन्हें टिकट मिला भी लेकिन ज्यादा वक्त तक उनके पास रह नहीं पाया।
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बहनों के साथ अमनमणि त्रिपाठी
तनुश्री के भाई अमनमणि त्रिपाठी नौतनवां विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक हैं। 28 साल की तनुश्री ने 2017 में विधानसभा चुनाव के दौरान अपने भाई अमनमणि के लिए भी प्रचार किया था। इस दौरान अमनमणि त्रिपाठी भी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे थे। सपा से टिकट नहीं मिल पाने के कारण अमनमणि त्रिपाठी ने जेल में बंद रहते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था और नौतनवां सीट पर जीत हासिल की थी। इस सीट पर तनुश्री और उनकी दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली बहन अलंकृता ने उस समय भाई के लिए जमकर प्रचार किया था।