लोकसभा चुनाव का पांचवां चरण खत्म हो चुका है। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें होने के कारण सभी पार्टियों की निगाहें इस राज्य पर टिकीं हैं। वहीं भाजपा के पांच मंत्रियों का भी भविष्य दांव पर है जिसमें रविशंकर प्रसाद, राधा मोहन सिंह, अश्विनी चौबे जैसे मंत्री शामिल हैं। इनके संसदीय क्षेत्र में 12 और 19 मई को मतदान होना है।
बिहार के इन पांच केंद्रीय मंत्रियों की किस्मत दांव पर, पाटलिपुत्र से बक्सर तक छिड़ी है जंग
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राधामोहन सिंह
राधामोहन सिंह 2014 लोकसभा चुनाव में बिहार के पूर्वी चंपारण से चुनाव जीते थे। उन्हें भाजपा ने 2014 में कृषि मंत्री बनाया। वह 2006-2009 के दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सिंह पांच बार लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं और छठी बार फिर पूर्वी चंपारण से किस्मत आजमा रहे हैं।
रामकृपाल यादव
ग्रामीण विकास मंत्रालय का जिम्मा संभालने वाले रामकृपाल यादव पहली बार 1993 में पटना से लोकसभा का चुनाव जीते थे। इस सीट पर उनकी 1996 और 2004 में भी जीत हुई थी। 2014 में वो पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। उन्होंने 2014 में पाटिलपुत्र सीट पर मीसा भारती को हराया था। 2009 में उन्होंने यह सीट राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद के लिए छोड़ दी थी।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद भाजपा से राज्यसभा सांसद हैं। रविशंकर प्रसाद पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। वह 2000 से 2018 तक लगातार तीन बार राज्यसभा के सदस्य रहे हैं। चौथी बार उन्हें पिछले वर्ष राज्यसभा का सदस्य बनाया गया है। भाजपा ने प्रसाद को शत्रुघ्न सिन्हा के खिलाफ पटना साहिब से उम्मीदवार बनाया है।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह 2014 में आरा सीट से लोकसभा चुनाव जीते थे। केंद्र में वह मंत्री भी हैं। इस बार उनके खिलाफ भाकपा (माले) के राजू यादव मैदान में हैं। राजू यादव महागठबंधन के उम्मीदवार हैं।