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गाजीपुर सीट: सपा-बसपा गठबंधन का जातीय समीकरण भाजपा के लिए है बड़ी चुनौती
Thu, 09 May 2019 03:43 PM IST
ललित फुलारा
भाषा
भाषा
Published by: ललित फुलारा
Updated Thu, 09 May 2019 03:43 PM IST
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गाजीपुर लोकसभा सीट
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शहीदों की धरती के नाम से विख्यात, पूर्वांचल की गाजीपुर लोकसभा सीट पर केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा द्वारा कराए गए विकास कार्यों की चर्चा तो खूब हो रही है, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन का जातीय समीकरण भाजपा के लिए कड़ी चुनौती बन गया है। इस सीट पर भाजपा उम्मीदवार सिन्हा के खिलाफ गठबंधन की ओर से अफजाल अंसारी उम्मीदवार हैं। पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल 2004 से 2009 तक यहां से सांसद रह चुके हैं।
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
2014 के लोकसभा चुनाव में 'मोदी लहर' के बीच सिन्हा इस सीट पर महज 33 हजार वोटों से जीते थे जबकि सपा और बसपा ने अलग अलग चुनाव लड़ा था। स्थानीय सियासी जानकार कहते हैं कि सपा-बसपा के साथ आने से गाजीपुर सीट पर सामाजिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। इस सीट पर सर्वाधिक संख्या यादव मतदाताओं की है और उनके बाद दलित एवं मुस्लिम मतदाता हैं। यादव, दलित और मुस्लिम मतदाताओं की कुल संख्या गाजीपुर संसदीय सीट की कुल मतदाता संख्या की लगभग आधी है। गठबंधन का यही समीकरण सिन्हा के लिए चुनौती है।
अजीत कुशवाह
गाजीपुर में पिछले कई चुनावों में जाति फैक्टर का असर रहा। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में यह कुछ हद तक टूटता सा दिखा था। जानकारों की मानें तो यादव बहुल सीट पर अतीत में भाजपा की जीत में सवर्ण वोटरों के साथ कुशवाहा वोटरों की बड़ी भूमिका रही है जिनकी आबादी यहां ढाई लाख से अधिक है। इस बार कांग्रेस के टिकट पर अजीत कुशवाहा के उतरने से भाजपा के लिए थोड़ी मुश्किल हो सकती है। इस सीट पर डेढ़ लाख से अधिक बिंद, करीब पौने दो लाख राजपूत और लगभग एक लाख वैश्य भी हार-जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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‘डिजिधन मेले’ के उद्घाटन अवसर पर बोले मनोज सिन्हा
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा को उम्मीद है कि यहां अफजाल अंसारी के बसपा का उम्मीदवार होने से यादव मतदाताओं का एक हिस्सा मनोज सिन्हा की तरफ हो सकता है क्योंकि अखिलेश और अंसारी बंधुओं के बीच रिश्ते अच्छे नहीं माने जाते। दूसरी तरफ सपा का कहना है कि उसका कोर वोटर गठबंधन के साथ मजबूती से खड़ा है। वैसे, रेल राज्य मंत्री सिन्हा क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों में हुए विकास कार्यों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर गठबंधन के जातीय समीकरण को विफल करने की कोशिश में हैं। उनका कहना है, 'जातीय समीकरण की बात वह कर रहे हैं जिन्हें जमीन का अंदाजा नहीं है। यहां के लोग जानते हैं कि पिछले पांच वर्षों में कितना विकास हुआ है। समाज के सभी वर्ग हमारे साथ हैं।' सिन्हा ने दावा किया, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले पांच वर्षों में हुए कार्यों के कारण जातिवाद की दीवार ध्वस्त हो जाएगी।' गत पांच वर्षों में गाजीपुर रेलवे स्टेशन का पुनरोद्धार, रेलवे प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना, गाजीपुर से विभिन्न महानगरों के लिए ट्रेन शुरू होना और सड़कों का निर्माण जैसे प्रमुख कार्य हुए हैं।
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अफजाल अंसारी
- फोटो : amar ujala
दूसरी तरफ, गठबंधन उम्मीदवार अफजाल अंसारी का आरोप है कि मनोज सिन्हा ने भी प्रधानमंत्री मोदी की तरह काम कम और प्रचार ज्यादा किया है। उन्होंने कहा, 'विकास के नाम पर शराब फैक्ट्री खुली है, जबकि नन्दगंज चीनी मिल अब तक नहीं खुल पाई।' अंसारी ने यह भी दावा कि इस बार गरीब वर्ग संविधान बचाने के लिए लड़ रहा है। वैसे, गाजीपुर के स्थानीय लोग यह स्वीकार करते हैं कि जिले में काम हुआ है, हालांकि हार-जीत के बारे में कोई भी कुछ स्पष्ट कहने की स्थिति में नहीं दिखाई देता है। एक स्थानीय स्कूल में शिक्षक अजीत राय कहते हैं, 'गाजीपुर में पहली बार काम दिख रहा है। इसे जिले में ज्यादातर लोग मानते हैं। चुनाव में नतीजा क्या होगा, मैं नहीं कह सकता क्योंकि यहां पर जति के आधार पर वोट पड़ता रहा है।'