लोकसभा चुनाव 2019 की जंग में इस बार भोपाल की सीट हाई प्रोफाइल सीट बन गई है। यहां जिन दो दिग्गजों का मुकाबला हो रहा है उनमें आपसी अदावत इस कदर गहरी है कि मुकाबला चरम पर पहुंच गया है। कांग्रेस ने यहां से मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को मैदान में उतारा है। जवाब में भाजपा ने अपने भगवा चेहरे साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को टिकट देकर चौंकाया। साध्वी प्रज्ञा आक्रामकता के साथ भावात्मक अंदाज में भी प्रचार कर रही हैं। इसी ने कांग्रेस और दिग्विजय की चिंता बढ़ा दी है। इस मुकाबले में किसका पलड़ा दिख रहा है भारी और किसकी क्या है रणनीति, जानते की कोशिश करते हैं।
दिग्विजय Vs साध्वी प्रज्ञा: भोपाल के हाई प्रोफाइल मुकाबले में किसका पलड़ा भारी?
साध्वी प्रज्ञा 2008 मालेगांव धमाके में आरोपी रह चुकी हैं और फिलहाल जमानत पर हैं। दिग्विजय पर वह कई गंभीर आरोप लगा चुकी हैं और अपने साथ हुई कथित ज्यादतियों के लिए उन्हें ही जिम्मेदार मानती हैं। साध्वी प्रज्ञा के मैदान में उतरते ही यहां की चुनावी जंग हिंदुत्व की हो गई। एक तरफ दिग्विजय का सॉफ्ट हिंदुत्व तो दूसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा का हार्डलाइन हिंदुत्व। मुकाबला जबरदस्त हो चला है। पिछले कुछ समय से दिग्विजय मंदिरों की परिक्रमा कर रहे हैं। भाजपा साध्वी को उतारकर एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है।
साध्वी प्रज्ञा को भोपाल से उतारने की चर्चा काफी पहले से ही चल रही थी। माना जा रहा है कि इसके जरिए भाजपा और संघ मध्य प्रदेश में हिंदुत्व के मुद्दे पर अपनी खोई साख को दोबारा हासिल करना चाहती है। विधानसभा चुनाव 2018 में मिली करारी हार का दर्द अभी मंद नहीं पड़ा है। करीबी अंतर से मिली हार भाजपा और संघ भुला नहीं पा रही। संघ के धुर विरोधी रहे दिग्विजय को हार का स्वाद चखाना नाक का सवाल बन गया है।
कांग्रेस की मुश्किल ये है कि वह भाजपा के हार्डलाइन हिंदुत्व का मुकाबला करने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चल पड़ी है। खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा मंदिरों के दर्शन करते दिख रहे हैं। ये सिलसिला पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान ही शुरू हुआ था। खुद दिग्विजय भी इन दिनों राज्य में मंदिर-मंदिर घूम रहे हैं और खुद को हिंदू हितैषी साबित करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। लेकिन इसमें कई खतरे भी हैं। कांग्रेस के इस स्टैंड से मुस्लिम वोटर पार्टी से छिटक सकते हैं, उधर हिंदू वोटर भी नाराज हो सकते हैं। यही बात कहीं दिग्विजय को भारी न पड़ जाए।
भोपाल में चार लाख से ज्यादा मुस्लिम मतदाता हैं। ये एक बड़ी संख्या है और कांग्रेस के लिए इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। सॉफ्ट हिंदुत्व का मुद्दा कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। हालांकि, कांग्रेस दिग्विजय सिंह को केंद्र में रखकर अपनी रणनीति को आगे बढ़ा रही है। पार्टी ने भोपाल घोषणापत्र अभियान भी शुरू किया है। भोपाल में छठवें चरण में 12 मई को मतदान होगा।