भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थली में चांदी के अष्ट कमल पर कान्हा का जन्म हुआ। धर्म और शास्त्र के जानकारों के मुताबिक, इस बार ग्रह-नक्षत्रों का ठीक वैसा ही संयोग है जैसा हजारों साल पहले भगवान के जन्म के वक्त था। द्वापर युग की तरह ही यह मौका भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी का था और तब बने 10 योग में आठ योग इस बार भी रहे।
मध्य रात्रि में ठीक 12 बजे भगवान का प्राकट्य हुआ। कान्हा की नगरी में जन्मोत्सव मनाने जुटे श्रद्धालुओं का उत्साह देखते हुए बन रहा था।
कान्हा के जन्म लेते ही 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की', 'नन्द के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की' के जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
इस बार कृष्ण जन्मोत्सव की थीम बेटी बचाओ रखी गई है। चारों तरफ बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का पोस्टर लगा हुआ है। रियो में मेडल जीतने वाली पीवी सिंधु और साक्षी मलिक की तस्वीरें लगाई गई हैं।
भक्तों ने भगवान की पालकी सिर पर रखकर जमकर डांस किया। जन्माष्टमी के लिए यहां के सभी छोटे-बड़े मंदिरों और राधा-कृष्ण की प्रतिमाओं का भव्य श्रृंगार किया गया था।