हम सब बचपन से सुनते आए हैं कि जिंदगी एक बार मिलती है, लिहाजा इसे बेहतर तरीके से जीना चाहिए। मगर क्या सच में हम इसका अनुसरण कर रहे हैं? शारीरिक स्वास्थ के साथ बहुत जरूरी है भावनात्मक स्वास्थ्य। अगर छोटी-छोटी बातों से आप परेशान हो जाते हैं और खुद को नकारात्मक विचारों के बीच पाते हैं तो आपके लिए जरूरी हो जाता है कि आप भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) बारे में जानें।
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दरअसल, भारत में जिस तरह से वित्तीय शिक्षा की कमी है वैसे ही भावनात्मक और मानसिक रोगों के प्रति एक तरह की जानकारी का अभाव है। केवल जानकारी का अभाव ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से अस्वस्थता को अक्सर पागल हो जाने की स्थिति में डाल दिया जाता है, जबकि मनोविज्ञान कहता है कि कोई भी व्यक्ति संपूर्ण रूप से मानसिक और भावनात्मक रूप से वैसा ही फिट है जैसा शारीरिक रूप से होता है। यानी की छोटी-मोटी चीजों की स्थिति अक्सर ऊपर-नीचे होती रहती है।
बहरहाल, ऐसे में हमारे लिए यह जानना जरूरी है कि आखिर भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य क्या है और कब कोई व्यक्ति यह समझे कि वह भावनात्मक और मानसिक रूप से फिट नहीं है।
क्या होता है भावनात्मक स्वास्थ्य ?
अमर उजाला - क्या होता है भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) ?
डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- आम भाषा में अगर बात कही जाए, इमोशनल हेल्थ एक तरह की भावनाएं होती है। अच्छा लगना, बुरा लगना , प्यार, नफरत क्रोध आना, चिड़चिड़ेपन होना यह सब हमारी भावनाएं होती हैं और हमारा भावनात्मक स्वास्थ्य इन सब पर निर्भर करता है।
- आप इन सब एहसासों पर कितना नियंत्रण कर पाते हैं और इनके साथ कितना संतुलित रह पाते हैं। यह आपके भावनात्मक स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करता है।
- अगर आप संतुलन बना पाते हैं तो आपका भावनात्मक स्वास्थ्य अच्छा है।
- ठीक इसके विपरीत अगर आप इसमें असंतुलित हो जाते है तो आपका भावनात्मक स्वास्थ्य चिंताजनक है।
1947 में डब्लूएचओ के अनुसार भावनात्मक स्वास्थ्य को पारिभाषित किया गया, जिसके अनुसार, " सम्पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास की बेहतरीन स्थिति"
भावनात्मक स्वास्थ्य के लक्षण
अमर उजाला-ऐसे कौन से लक्षण हैं जिनसे पता चलता है आपका भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional ilness) खराब है ?
डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- जब सामान्य सी बात पर अधिक प्रतिक्रिया हो या फिर 'नार्मल एक्शन' पर 'ओवर रिएक्शन' हो तब इस बात पर जरूर सोचना चाहिए और डॉ की सलाह लेनी चाहिए।
अब तक एनएचएस ने शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्राथमिकता दी है, लेकिन 'ग्रीन- पेपर' हमारा स्वस्थ राष्ट्र संकेत देता है कि इसे बदलने और इस पर ध्यान देने की जरूरत है।
क्या रोना भावनात्मक स्वास्थ्य हानिकारक है ?
अमर उजाला-क्या रोना भावनात्मक स्वास्थ्य ( Emotional health) के लिए हानिकारक है या फिर सही है ?
डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- रोना एक सामान्य सी प्रक्रिया हैं। मगर यह उस वक्त गंभीर हो जाता है जब अति या ज्यादा हो। जब एक व्यक्ति इस पर नियंत्रण ना कर पाए तब यह विषय गंभीर हो जाता है।
जब भी कोई व्यक्ति ऐसे दौर से गुजरे तो उसको सबसे पहले क्या करना चाहिए?
अमर उजाला-जब भी कोई व्यक्ति ऐसे दौर से गुजरे तो उसको सबसे पहले क्या करना चाहिए?
डॉ रोहित शर्मा, मनोचिकित्सक- अगर आपको ऐसा लगे की आप अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं तब निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए,
- एकाग्र होकर विचार करना चाहिए,
- ऐसी कौन सी वजह है जो नियंत्रण से बाहर है और आपको परेशान करती है।
- खुद पर नियंत्रण के उपायों पर काम करना चाहिए।
- सोचना चाहिए मूल कारण क्या हैं जिसकी वजह से आपके ऊपर प्रभाव पड़ता है।