कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश में त्राहि-त्राहि मचा दी। हालात इस कदर बिगड़ते चले गए कि हर दूसरे शख्स ने इस महामारी में अपना कुछ न कुछ गंवा दिया। हर किसी के पास अपनी दर्दभरी कहानी है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने सबसे ज्यादा नुकसान हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स को उठाना पड़ा। इंडियन मेडिकल असोसिएशन ने भी एक बयान जारी करते हुए कहा कि अब तक 513 चिकित्सकों को हम खो चुके हैं। इनमें दिल्ली के ही 100 से ज्यादा डॉक्टर्स शामिल हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको रूबरू कराते हैं धरती के उन 'भगवानों' से, जिन्होंने हम सबको कोरोना महामारी से बचाते हुए अपनी जान गंवा दी और अपनी आखिरी सांस तक मरीजों का इलाज करते रहे।
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डॉ. अनस मुजाहिद
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मौत से एक दिन पहले तक किया इलाज
महज 26 साल के डॉ. अनस मुजाहिद बेहद शांत स्वभाव के शख्स थे। अपने हंसमुख अंदाज और मेहनत से वह मरीजों की आधी बीमारी पलभर में छू कर देते थे, लेकिन इस उम्दा चिकित्सक को कोरोना के क्रूर पंजों ने 9 मई को हमसे छीन लिया। अनस कोरोना से जान गंवाने वाले सबसे युवा डॉक्टर थे। दरअसल, अनस ईद पर इफ्तारी के लिए अपने परिवार से मिलने घर गए थे। लौटते वक्त वह बुखार की चपेट में आ गए। कोरोना टेस्ट कराया तो वह संक्रमित मिले और उसके बाद अनस की हालत बिगड़ती चली गई। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन कुछ ही घंटे में उनका निधन हो गया। साथी चिकित्सक बताते हैं कि मौत से एक दिन पहले तक अनस मरीजों की सेवा करते रहे।
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डॉ. डिंपल अरोड़ा चावला
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अजन्मे बच्चे को गंवाया और अपनी जिंदगी भी
अपने आखिरी वीडियो में दुनिया से कोरोना से सावधान रहने की अपील करने वाली डॉ. डिंपल अरोड़ा चावला को भी इस महामारी ने हमसे छीन लिया। 11 अप्रैल को वह कोरोना संक्रमित हो गईं। उस वक्त वह गर्भवती थीं। कोरोना से जब उनकी सांसें उखड़ने लगीं तो उन्होंने एक वीडियो बनाया। अपनी कमजोर आवाज में उन्होंने कहा, 'प्लीज एव्रीवन...प्लीज टेक केयर।' डॉ. डिंपल की मौत के बाद यह वीडियो उनके पति डॉ. रवीश चावला ने पोस्ट किया था। 19 अप्रैल को डॉ. डिंपल ने अपने अजन्मे बच्चे को खो दिया और अगले दिन यानी 20 अप्रैल को वह इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
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डॉ. जगदीश मिश्रा
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जहां 50 साल सेवा की, वहां नहीं मिला वेंटिलेटर बेड
प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरु अस्पताल में 50 दशक तक अपनी सेवाएं देने वाले डॉ. जगदीश मिश्रा के साथ जो हुआ, वैसा किसी के साथ भी न हो। उन्हें उसी अस्पताल में वेंटिलेटर बेड नसीब नहीं हुआ, जहां वह मरते दम तक मरीजों की सेवा करते रहे। दरअसल, वह 13 अप्रैल को कोरोना की चपेट में आए और उनकी हालत काफी तेजी से बिगड़ने लगी। उस वक्त स्वरूप रानी नेहरु अस्पताल में कोई भी वेंटिलेटर बेड नहीं था। डॉ. मिश्रा कोविड से जूझते रहे और 25 अप्रैल को उनका निधन हो गया।
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डॉ. केके अग्रवाल
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पिक्चर अभी बाकी है...कहने वाले डॉ. केके अग्रवाल
डॉ. केके अग्रवाल को कौन नहीं जानता...देश के बेहतरीन फिजिशियन और कार्डियोलॉजिस्ट...जब लोग कोरोना से भयभीत थे तो वह घंटों तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोगों से बातचीत करते। उनका डर दूर करते और तमाम सवालों के जवाब देते। यहां तक कि अपने आखिरी दिनों में वह लोगों को कोरोना से लड़ने के तरीके समझाते रहे। अपने आखिरी वीडियो में डॉ. अग्रवाल ऑक्सीजन पाइप लगाए नजर आए थे। उन्होंने कहा था, 'मुझे कोविड निमोनिया है, जो काफी तेजी से फैलता है...लेकिन तब भी राजकपूर की बात याद रखो। पिक्चर अभी बाकी है.. शो मस्ट गो ऑन...'