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Hindi News ›   India News ›   Goa Assembly Election 2022: Will the mining industry in Goa come to life again, why is it an issue for political parties?

Goa Assembly Election 2022: क्या गोवा में बंद पड़े खनन उद्योग में फिर आएगी जान, सियासी पार्टियों के लिए क्यों बना मुद्दा

Thu, 18 Nov 2021 05:21 PM IST
प्रतिभा ज्योति प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली।
प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 18 Nov 2021 05:21 PM IST
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सार
जैसे-जैसे गोवा चुनाव नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों के लिए खनन का मुद्दा गरमाता जा रहा है। टीएमसी ने तो टिकाऊ खनन शुरू करने के लिए गोवा फाउंडेशन के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। 
 
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Goa Assembly Election 2022: Will the mining industry in Goa come to life again, why is it an issue for political parties?
खनन फिर से शुरू करने की मांग करते लोग (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter : @ParasharGoa

विस्तार

क्या 2022 में होने वाले गोवा विधानसभा चुनाव के साथ ही खनन उद्योग से जुड़े हुए लोगों के भाग्य का भी फैसला हो सकता है? यह सवाल इसलिए वाजिब हैं क्योंकि कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत तमाम पार्टी फिर से खनन उद्योग को चालू करने को बड़ा चुनावी मुद्दा बना रही है।  


गोवा का खनन उद्योग, पर्यटन के साथ-साथ वहां के लोगों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण साधन थी। 2018 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से यह ठप है। हालांकि अवैध खनन की मुकद्मेबाजी के कारण राज्य में खनन गतिविधि, 2012 से ही बंद है। तब से खनन क्षेत्र में काम करने वाले हजारों श्रमिक इस क्षेत्र के पुनरुद्धार का इंतजार कर रहे हैं। लिहाजा इस बार चुनाव में गोवा में यह शीर्ष चुनावी मुद्दों में एक हो गया है, क्योंकि एक बड़ा वोट बैंक उनका इंतजार कर रहा है।  हर राजनीतिक पार्टी खनन उद्योग को फिर से शुरू करने की पेशकश कर रही है। फरवरी 2021 यानी जब गोवा में चुनाव होने वाले होंगे तब राज्य में खनन पर रोक के तीन साल पूरे हो जाएंगे। 


कितने लोग प्रभावित हैं
बताया जा रहा है कि गोवा में खनन क्षेत्र एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि और आय का स्रोत रहा है जिससे  करीब 60 हजार से अधिक परिवारों का घर चल रहा था। यानी करीब राज्य की 25 फीसदी आबादी इसी क्षेत्र पर निर्भर थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2014 में  सुप्रीम कोर्ट मे सुनवाई के दौरान गोवा में 33 ग्राम पंचायतों की तरफ से पेश हुए एक वरिष्ठ वकील ने करीब डेढ़ लाख लोगों के सीधे खनन कार्य से जुड़ने के बारे में बताया था। हालांकि इस दावे को गोवा फाउंडेशन ने चुनौती दी और गोवा विधानसभा में उठाए गए सवालों के जवाब और अन्य संसाधनों के हवाले से गोवा फाउंडेशन ने कहा था कि खनन पर प्रतिबंध के परिणामस्वरूप लगभग सात हजार लोग बेरोजगार हुए।
 

गोवा में खनन क्यों बंद हुआ?

supreme court, सुप्रीम कोर्ट
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani
गोवा में पुर्तगाली शासन के तहत लौह अयस्क और मैंगनीज अयस्क के लिए खनन रियायतें दी गई थीं। 1961 में राज्य की मुक्ति के बाद,  खनन पट्टे दिए जाने लगे जिसकी मियाद 2007 में खत्म हो गई। जब 2007 के बाद भी खनन गतिविधि जारी रही, तो गोवा फाउंडेशन ने "अवैध खनन" के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की। सितंबर 2012 में, केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने इन पट्टा धारकों को दी गई पर्यावरणीय मंजूरी को स्थगित रख दिया और गोवा सरकार ने खनन गतिविधियों को रोक दिया। 

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में सालाना दो करोड़ टन तक लौह अयस्क खनन की अनुमति देते हुए राज्य में पिछले 18 महीने से जारी खनन प्रतिबंध हटा लिया। सुप्रीम कोर्ट ने पांच अक्तूबर 2012 को जारी अपने अंतरिम आदेश को निष्प्रभावी करते हुए सर्वोच्च अदालत की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक खनन गतिविधियों पर कड़ाई से निगरानी रखने को लेकर पर्यावरण और वन मंत्रालय तथा गोवा सरकार को कड़े निर्देश दिए। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के एक किलोमीटर के दायरे में खनन के पट्टे नहीं दिए जाएंगे।

2015 में, गोवा सरकार ने इनमें से 88 पट्टों का नवीनीकरण किया, जिन्हें फिर से शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई। जिसे 2018 में रद्द कर दिया गया, जिसके बाद राज्य में कोई खनन गतिविधि नहीं हुई है। 2018 के आदेश के खिलाफ गोवा सरकार की समीक्षा याचिका को भी शीर्ष अदालत ने जुलाई में खारिज कर दिया था।
 

राहुल गांधी ने किया खनन गतिविधियों को शुरु करने का वादा

गोवा में ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
गोवा में ममता बनर्जी (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
2017 के चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद हारने वाली कांग्रेस सत्ताधारी पार्टी को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है। कांग्रेस ने दोबारा खनन गतिविधियों को शुरू करने का बड़ा चुनावी वादा किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते 30 अक्तूबर को राहुल गांधी ने पणजी में खनन उद्योग के बंद होने से प्रभावित लोगों से श्रमिक सम्मेलन में मुलाकात की। जिसमें गांधी ने आश्वासन दिया कि सत्ता में आने पर कांग्रेस कानूनी तरीके से गोवा में खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करेगी

ममता ने भी किया एलान 
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी ने भी घोषणा की है कि गोवा में सत्ता में आने के बाद उनकी पार्टी की प्राथमिकताओं की सूची में यह कार्यक्रम सबसे ऊपर रहेगा। टीएमसी ने कहा है कि राज्य में खनन लॉबी को खत्म करना उनकी पार्टी का प्रमुख चुनावी मुद्दा है। पार्टी ने टिकाऊ खनन शुरू करने के लिए गोवा फाउंडेशन के प्रस्ताव को स्वीकार किया है।

पर्यावरणविद् और गोवा फाउंडेशन’ के निदेशक क्लाउड अल्वारेस ने कहा “टिकाऊ खनन कैसे किया जाए, इस पर हमारे अधिकांश प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए हम टीएमसी का स्वागत करते हैं। फाउंडेशन ने खनन के नियमन में व्यापक सुधार की बात कही है और अवैध खनन के कारण हुए नुकसान से बकाया 35,000 करड़ रुपये की वसूली जैसे कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
 

आप की सरकार बनी तो छह महीने के भीतर शुरू होगा खनन

गोवा में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
गोवा में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो) - फोटो : ANI
खनन रोक के खिलाफ आंदोलन की अगुवाई कर रहे ट्रेड यूनियन नेता पुती गांवकर ने सात नवंबर को आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया है। पुती मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ सेंक्वेलिम विधानसभा क्षेत्र से आप के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। उनका कहना है कि वे राज्य में खनन को फिर से शुरू करना चाहते हैं।

पुति गांवकर के पार्टी में शामिल होने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, गांवकर ने मेरे साथ कई मुद्दों पर चर्चा की और उन्होंने मुझे खनन पर आश्रित परिवारों के साथ हो रही नाइंसाफी के बारे में बताया। मैं यकीन दिलाता हूं कि अगर आप सत्ता पर काबिज़ होती है, तो छह महीने के अंदर गांवकर की देखरेख में खनन फिर से शुरू करेंगे। केजरीवाल ने कहा कि हम खनन पर आश्रित और उन परिवारों से मिलने जा रहे हैं जो अपने हक के लिए कई दशकों से लड़ रहे हैं।

भाजपा का क्या?
मार्च में, गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार राज्य में अवैध खनन पर न्यायमूर्ति एम बी शाह आयोग की रिपोर्ट के अनुसार खदान मालिकों से अपना बकाया वसूल करेगी। आयोग का गठन केंद्र सरकार ने 2010 में किया था। सावंत ने कहा कि राज्य सरकार ने गोवा में बॉम्बे के उच्च न्यायालय में एक हलफनामा दायर किया था और मामले की जांच के लिए नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक 16 प्राथमिकी दर्ज की हैं। 
 
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