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10 Facts: जानिए क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 18 Oct 2016 04:30 PM IST
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समान नागरिक संहिता या यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एक पंथनिरपेक्ष (सेक्युलर) कानून होता है जो सभी धर्म के लोगों के लिये समान रूप से लागू होता है।
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समान नागरिकता संहिता सियासी मुद्दा रहा है, जिससे वोट बैंक बनते-बिगड़ते रहे हैं। इस सिलसिले में 1985 का शाह बानो केस अहम माना जाता है।
इसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि 60 साल की शाह बानो तलाक के बाद अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार हैं। लेकिन, मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कड़े विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद के जरिए इस फैसले को पलटवा दिया।
इसमें सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि 60 साल की शाह बानो तलाक के बाद अपने पति से गुजारा भत्ता पाने की हकदार हैं। लेकिन, मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के कड़े विरोध के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संसद के जरिए इस फैसले को पलटवा दिया।
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यह किसी भी धर्म या जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है। विश्व के अधिकतर आधुनिक देशों में ऐसे कानून लागू हैं।
इसके तहत संपत्ति में अधिकार, शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, बच्चा गोद लेने और वारिस तय करने जैसे विषयों पर सभी के लिए एक कानून होगा।
इसके तहत संपत्ति में अधिकार, शादी, तलाक, गुजारा भत्ता, बच्चा गोद लेने और वारिस तय करने जैसे विषयों पर सभी के लिए एक कानून होगा।
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भारत में इस समय संपत्ति के अधिग्रहण और संचालन का अधिकार, गोद लेना और तलाक के नियम हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों के लिए अलग-अलग हैं।
भारत में मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड इसे इस्लामी नियमों और सिद्धातों में हस्तक्षेप बताते हुए इसका विरोध करते हैं।
भारत में मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड इसे इस्लामी नियमों और सिद्धातों में हस्तक्षेप बताते हुए इसका विरोध करते हैं।
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- फोटो : amar ujala
दूसरा पक्ष तीन तलाक जैसे मुद्दों का विरोध करते हुए कहता है कि ऐसे मुद्दों का एक हल समान नागरिक संहिता ही है।
बाद में एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इद्दत की अवधि के बाद मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता दिए जाने का फैसला सुनाया। बताते चलें कि इद्दत तलाक के बाद की वो अवधि होती है जिसमें महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती।
बाद में एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इद्दत की अवधि के बाद मुस्लिम महिलाओं को गुजारा भत्ता दिए जाने का फैसला सुनाया। बताते चलें कि इद्दत तलाक के बाद की वो अवधि होती है जिसमें महिला दूसरी शादी नहीं कर सकती।