अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दो दिवसीय भारत यात्रा के दौरान मंगलवार को हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सौदे पर मुहर लग गई। तीन अरब डॉलर के इस रक्षा सौदे के तहत भारत को अमेरिका अपने दो हेलीकॉप्टर बेचेगा। इनमें पहला हेलीकॉप्टर है एएच 64ई अपाचे और दूसरा है एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर। इस सौदे के तहत भारत को छह अपाचे और 23 रोमियो हेलीकॉप्टर मिलेंगे, जो देश की थलसेना और नौसेना की ताकत को बढ़ाने में मददगार होंगे। आइए जानते हैं इनके आने से भारत की सैन्य शक्ति में कितना इजाफा होगा...
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एमएच 60 रोमियो सी हॉक हेलीकॉप्टर
- फोटो : Twitter/@NATO_MARCOM
कैसा है 'रोमियो' हेलीकॉप्टर?
आइए सबसे पहले जानते हैं अमेरिका से मिलने वाले 23 एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर की खासियत के बारे में। लॉकहीड मार्टिन कंपनी का बनाया हुआ एमएच-60 रोमियो सीहॉक हेलीकॉप्टर इतना घातक है कि पानी की गहराई में मौजूद पनडुब्बी से लेकर पानी की सतह पर मौजूद पोत पर अचूक निशाना साधकर उन्हें तबाह कर सकता है। ये हेलीकॉप्टर समुद्री सीमा में तलाश एवं बचाव कार्यों में भी उपयोगी है। ये दुश्मन की नावों को ट्रैक कर उनके हमलों को रोकने के लिए परिष्कृत लड़ाकू प्रणालियों- सेंसर, मिसाइल और टॉरपीडो से लैस है।
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एमएच-60 'रोमियो' सी हॉक हेलीकॉप्टर
- फोटो : Lockheedmartin.com
दुनियाभर की नौसेनाओं की पसंद है 'रोमियो'
एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना में एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वेपन के रूप में तैनात है। यह भारतीय रक्षा बलों को सतह रोधी और पनडुब्बी रोधी युद्ध जैसे मिशन में सफलता दिलाने की क्षमता रखता है। इसकी खासियत का इस बात से ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह हेलीकॉप्टर दुनियाभर की नौसेनाओं का पसंदीदा है। रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी तक ने इसे अपनी सीमा की रक्षा के लिए तैनात कर रखा है।
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एमएच-60 'रोमियो' सी हॉक हेलीकॉप्टर
- फोटो : Lockheedmartin.com
हिंद प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में दिखेगी भारत की रक्षा क्षमता
एमएच 60 रोमियो हेलीकॉप्टर के आने से भारत की रक्षा क्षमता में इजाफा होगा। साथ ही हिंद प्रशांत और दक्षिण एशिया क्षेत्र में राजनीतिक स्थिरता, शांति एवं आर्थिक प्रगति में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
- एक नजर में: मौजूदा हेलीकॉप्टरों में से सबसे आधुनिक इस हेलीकॉप्टर को जंगी जहाज, क्रूजर्स और एयरक्राफ्ट करियर से ऑपरेट किया जा सकता है। ये हेलीकॉप्टर एंटी-सबमरीन के अलावा निगरानी, सूचना, मालवाहक, निजी वाहन, सर्च और बचाव, गनफायर और लॉजिस्टिक सपोर्ट में कारगर है।
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भारतीय वायुसेना का अपाचे
- फोटो : PTI
दुश्मन को तबाह करके ही छोड़ता है 'अपाचे'
अब बात करते हैं दुनिया के सबसे घातक लड़ाकू विमान 'अपाचे' की, जो कि एक खूंखार शिकारी है, यह दुश्मन को पूरी तरह से नेस्तोनाबूत करके ही छोड़ता है। इसे एक तरह से ‘फ्लाइंग टैंक’ कहा जाता है। इस नाम से यह पूरी दुनिया में मशहूर है।
हालांकि भारत और अमेरिका के बीच पहले हो चुके एक समझौते के तहत 17 ‘अपाचे एएच-64 ई’ हेलीकॉप्टर मिल चुके हैं, जो फिलहाल इंडियन एयरफोर्स के पास हैं। यूएस की बोइंग कंपनी ने इसे बनाया है। इस हेलीकॉप्टर की स्कॉवड्रन ‘ग्लेडिएटर’ को पंजाब स्थित अति संवेदनशील एयरफोर्स स्टेशन पठानकोट में तैनात किया गया है।