फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

कोरोना वायरसः  चीन की इस किताब की भविष्यवाणी सोशल मीडिया पर वायरल, जानिए कितना सच्चा है दावा? 

Tue, 17 Mar 2020 07:05 PM IST
Rama Solanki रमा सोलंकी
Updated Tue, 17 Mar 2020 07:05 PM IST
सार

'द आय ऑफ डार्कनेस’ किताब का सच
किताब में COVID-19  यानी कोरोना वायरस का सच
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत
क्या सच में चीन ने बायोलॉजिकल हथियार किया तैयार ?
अमर उजाला पड़ताल,कितना सच कितना झूठ 
 

विज्ञापन
coronavirus fact check and eye of darkness book is author dean Koontz really predict covid-19
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत - फोटो : Amar Ujala

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट जमकर वायरल हो रही है जिसमें कोरोना वायरस को लेकर दावा किया जा रहा है कि यह एक जैविक हथियार है। इस पोस्ट में एक किताब का आधार दिया गया है जिसका नाम है ‘द आय ऑफ डार्कनेस’। इस किताब और उसके कुछ पन्नों की तस्वीर के साथ यह अलग-अलग माध्यमों से फैलाई जा रही है। जानिए अमर उजाला पड़ताल में इस वायरल पोस्ट का सच,


दावाकर्ता- सोशल मीडिया यूजर्स।
दावे का आधार- डीन कूंट्ज की किताब ‘द आय ऑफ डार्कनेस’। किताब के एक हिस्से में चीन के एक वैज्ञानिक द्वारा बनाए गए नाम ‘वुहान-400’ का उल्लेख मिलता है।
इस उपन्यास में बायोलॉजिकल हथियार कोरोना वायरस (COVID-19) के दुनिया भर में फैलने की ‘भविष्यवाणी’ की गई है।

क्या किया जा रहा दावा- 1981 के चाइनीज नॉवेल ‘द आय ऑफ डार्कनेस’ में कोरोना वायरस के फैलने की भविष्यवाणी की गई है।
पड़ताल का परिणाम- 1981 के चाइनीज नॉवेल ‘द आय ऑफ डार्कनेस’ में कोरोना वायरस के फैलने की भविष्यवाणी नहीं की गई है, यह फेक न्यूज है।

किताब -
  • वर्ष 1981 में लिखी गई
  • लेखक- डीन कूंट्ज
  • किताब का नाम- ‘द आय ऑफ डार्कनेस’

जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत

coronavirus fact check and eye of darkness book is author dean Koontz really predict covid-19
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत - फोटो : Amar Ujala
पड़ताल के चरण
  • सबसे पहले गूगल रिवर्स सर्च पर इस खबर को खोजा और इसके लिए 'कोरोना', 'कोरोना वायरस' और COVID-19 की-वर्ड्स का प्रयोग किया।
  • इससे जुड़ी तमाम खबरें सामने आकर खुल गईं जिसमें 'फेक न्यूज' की भरमार ज्यादा थी।
  • उसके बाद प्रामाणिक समाचार पत्र और सरकारी गाइडलाइन्स भी मिली।

पड़ताल का पहला चरण-
एक मेडिकल जर्नल द लैंसेट में पब्लिक हेल्थ साइंटिस्ट्स द्वारा दिए गए स्टेटमेंट में साफ कहा गया है,

“हम सभी मिलकर उन सभी दावों को सिरे से गलत साबित करते हैं जिसमें यह कहा गया हैं कि COVID-19 को इंसानों द्वारा बनाया गया है एक जैविक हथियार है। SARS कोरोनावायरस 2 (SARS-CoV-2) का भी अध्ययन किया गया है और यह परिणाम सामने आया है कि बैक्टीरिया और वायरस से पैदा होने वाली तमाम बीमारियों के सामान ही इसकी उत्पत्ति भी जीवों के अंदर से ही हुई है।"

पड़ताल का दूसरा चरण

coronavirus fact check and eye of darkness book is author dean Koontz really predict covid-19
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत - फोटो : Amar Ujala
पड़ताल का दूसरा चरण-
अमर उजाला पड़ताल टीम के हाथ अल-जजीरा की एक रिपोर्ट लगी जिसमें लिखा था कि,
अल-जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार – “चीन के हेल्थ संस्थान इस कोरोना वायरस की उत्पत्ति की खोज कर रहे हैं। और इसमें उन्होनें यह माना कि बहुत हद तक इसकी उत्पत्ति वुहान में सी फूड बाजार से हुई हैं। इस बाजार में गैर-कानूनी तरीके से जानवर बेचे जा रहे थे”

दावा फर्जी- यह उस दावे को गलत साबित करता है कि कोरोना वायरस केवल इंसानों में रह सकता है बल्कि यह दोनों में रहता हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

पड़ताल का तीसरा चरण

coronavirus fact check and eye of darkness book is author dean Koontz really predict covid-19
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत - फोटो : Amar Ujala

पड़ताल का तीसरा चरण-
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार,

“कोरोना वायरस एक बड़े वायरस समूह का हिस्सा है जिसके तहत आम खांसी-जुकाम से लेकर MERS-CoV और SARS-Cov जैसी खतरनाक बीमारियां भी पैदा हो सकती हैं।”

  • कोरोना वायरस जूनोटिक है, यह किसी अन्य प्रजाति से भी इंसानों में आ सकती है।  
  • इससे पहले कभी भी नोवेल कोरोना वायरस (nCoV) से इंसानों को संक्रमण नहीं हुआ था।
विज्ञापन

जानिए सत्य क्या है: क्या सच में चीन ने बायोलॉजिकल हथियार किया तैयार ?

coronavirus fact check and eye of darkness book is author dean Koontz really predict covid-19
जानिए वायरल पोस्ट की हकीकत - फोटो : Amar Ujala
जानिए सत्य क्या है -
पहला, डीन कूंट्ज ने अपनी किताब में कहीं पर भी वुहान में बनाए जा रहे जैविक हथियार की चर्चा नहीं की है, असल किताब में ऐसा विवरण कहीं नहीं मिलता है।  
दूसरा, डीन कूंट्ज ने अपनी किताब में COVID-19 ( कोरोना वायरस ) के फैलने से जुड़ी कोई भी भविष्यवाणी नहीं की थी।
तीसरा, उन्होंने अपनी किताब में गोर्की-400 शब्द ( टर्म) का इस्तेमाल किया था जिसका बाद में नाम बदलकर वुहान-400 कर दिया गया था।

सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स पर किताब का एक पन्ना वायरल हो रहा है जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि इस किताब में पहले ही COVID-19 ( कोरोना वायरस ) के बारें में खुलासा कर दिया गया था।

वायरल हो रहा मेसेज लिखा है- “चीन में ये किताब पहले ही आ गई थी जिसमें कहा गया था सरकार गरीबी हटाने के लिए इस वायरस का उपयोग करेगी। ऐसा वॉट्सएप पर कहा जा रहा है ”


साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के एक आर्टिकल के अनुसार,
  • कूंट्ज ने अपने उपन्यास में वायरस की उत्पत्ति रूस में हुई, इस बारे में बताया है।
  • इस किताब को जब दोबारा लिखा गया तो इसकी कहानी सोवियत यूनियन के गिरने के बाद शुरू हुई। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि वहां गोर्की शहर में कम्युनिज्म जैसा कुछ भी नहीं पता चल रहा था।
  • इस लेख में ये भी बताया गया कि इस किताब को जब सबसे पहली बार लिखा गया था तो लेखक ने अपना दूसरे नाम 'लाइ निकोलस' इस्तेमाल किया था।  
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed