कोरोना वायरस को लेकर पूरी दुनिया में तनाव की स्थिति है। भारत भी अपनी पूरी हिम्मत से इस समस्या को हराने में लगा है। देश में 21 दिन का लॉकडाउन भी किया गया है, लोग घरों में बंद हैं और वहीं से अपना कामकाज संभाल रहे हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर निर्भरता भी ज्यादा बढ़ गई है और सोशल प्लेटफॉर्म ही खबरों का मुख्य आधार बन गए हैं। सही सूचनाओं के साथ फर्जी सूचना भी जमकर वायरल हो रही हैं।
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सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है,जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि यह तस्वीर इंडोनेशिया के डॉक्टर हादिओ अली की है जो अपने अंतिम समय में बच्चों से मिलने के लिए आए हैं। डॉक्टर हादिओ अली कोरोना पीड़ितों का इलाज कर रहे हैं जिस वजह से उन्हें भी संक्रमण हुआ। सीरिया के राजनेता ‘@Omar_Madaniah’ ने अपने ट्विटर हैंडल पर ये तस्वीर शेयर की और इसको इंडोनेशिया के डॉक्टर हादिओ अली की तस्वीर बताते हुए ट्वीट किया।
अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की और पाया यह फेक न्यूज है और गलत दावे के साथ वायरल हो रही है।
दावाकर्ता- सोशल मीडिया यूजर्स।
दावे का आधार- इस तस्वीर में एक शख्स गेट के बाहर खड़ा है और सामने दरवाजे की दूसरी तरफ दो छोटे बच्चे खड़े हुए हैं।
क्या किया जा रहा दावा- यह तस्वीर इंडोनेशिया के डॉक्टर हादिओ अली की है जो अपने अंतिम समय में बच्चों से मिलने के लिए आए हैं।
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हो रही है जिसमें एक शख़्स दूर से अपने बच्चों को देख रहा है, इस पोस्ट पर दावा किया जा रहा है कि यह डॉ, कोरोना की वजह से मर चुका है, जबकि वह जिंदा है। वह इलाज कर रहा है उसकी तस्वीर कोरोना वायरस से मरने वाले डॉक्टर की बताकर खूब शेयर हो रही है।
पड़ताल के चरण: तस्वीर में दिख रहे डॉक्टर की मौत का सच
- सबसे पहले इस तस्वीर को डाउनलोड करके सेव किया, उसके बाद इसको गूगल पर रिवर्स इमेज सर्च किया,
- उसमें खोजने पर एक फेसबुक यूजर पोस्ट मिली, जो अहमद एफेंडी जैलानुद्दीन नाम के व्यक्ति की थी
- अहमद एफेंडी जैलानुद्दीन मलेशिया के रहने वाले हैं और उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर ये तस्वीर 21 मार्च को पोस्ट की थी।
- इस पोस्ट में वहीं की लोकल भाषा में डिस्क्रिप्शन लिखा हुआ था,
- जिसको दो तरह से आप डिकोड कर सकते हैं,
- पहला किसी ट्रांसलेटर की मदद से और
- दूसरा गूगल ट्रांसलेटर की सहायता से,
इसके गूगल ट्रांसलेशन से पता चलता है कि, पोस्ट में यह लिखा है ,
अहमद एफेंडी जैलानुद्दीन तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति के भाई हैं।
मेसेज में जैलानुद्दीन ने लिखा हुआ है कि उनके भाई पेशे से एक डॉक्टर हैं और वो कोरोना के मरीजों की देखभाल और इलाज करते हैं। इसी वजह से उन्हें अपने बच्चों से कुछ समय तक दूर रहना पड़ेगा।
जानिए आखिरकार ये तस्वीर है किसकी
इसके बाद हमने, अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इस खबर को तलाशा, जहां पर हमें इंडोनेशिया की समाचार वेबसाइट ‘टेम्पो’ की फैक्ट-चेक विंग ‘cekfakta’ के तथ्य मिले जहां पर इस तस्वीर की पड़ताल की थी और इस बात को गलत साबित किया था।
‘cekfakta’ के आर्टिकल में अहमद एफेंडी जैलानुद्दीन का बयान भी है जिसके मुताबिक, उनके भाई जीवित हैं और वो डॉक्टर हादिओ नहीं हैं, वह एक डॉक्टर हैं और अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मलयेशिया की कुछ वेबसाइट Kerjaayabaru.com और Pama Magazine ने भी इस तस्वीर के बारे में अपनी रिपोर्ट छापी है।
जब इस तरह की पोस्ट के नीचे लिखे कमेंट्स को अगर आप ध्यान से पड़ेंगे तो इसका अंदाजा लग जायेगा कि पोस्ट के फैक्ट्स में गलत तथ्य हैं। यह कमेंट्स लोकल भाषा के हैं, जब इनको गूगल ट्रांसलेट पर चेक किया तो यह बात सामने निकलकर आई कि यह दावा भ्रामक और गलत है।
कोरोना वायरस की फेक न्यूज से सावधानी ही बचाव है।
इस तरह की वायरल पोस्ट में किन बातों का ख्याल रखें-
- किस व्यक्ति ने शेयर की है,
- किस वेबसाइट पर पब्लिश हुई है,
- उस वेबसाइट की प्रामाणिकता कितनी है,
- अगर आर्टिकल अन्य भाषा में है तो उसके लिए अनुवादक और गूगल ट्रांसलेटर की मदद भी ले सकते हैं,
- संबंधित व्यक्ति के अकाउंट में जाकर डिटेल्स चेक करें,
- या फिर उससे जुड़े व्यक्ति से संपर्क करें।
- उस पोस्ट के नीचे दिए गए कमेंट्स को भी ध्यान से पढ़ें और उनमे छिपे संदेशों को भी ध्यानपूर्वक डिकोड करें।
- कोरोना वायरस से जुड़े मामले प्रामाणिक साइट्स पर ही देखें, और उनके दिए डाटा पर विश्वास करें।
पड़ताल का परिणाम- इन सब तथ्यों के आधार पर यह साफ हो जाता है कि घर के बाहर खड़े होकर बच्चों को देखने वाले व्यक्ति की तस्वीर मयलेशिया के डॉक्टर की है न कि कोरोना की वजह से मरने वाले डॉक्टर हादिओ अली की। गलत दावे के साथ इस तस्वीर को वायरल किया जा रहा है। इस तरह की फेक न्यूज से सतर्क रहिए और किसी भी खबर को फॉरवर्ड, शेयर करते वक्त ख्याल रखिए।
कोरोना वायरस से सावधानी ही बचाव है।