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क्या है नागरिकता कानून जिसे बदलना चाहती है मोदी सरकार, अब संसद में होगा पेश
Wed, 04 Dec 2019 11:51 AM IST
Priyesh Mishra
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Priyesh Mishra
Updated Wed, 04 Dec 2019 11:51 AM IST
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पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह चर्चा करते हुए (फाइल)
- फोटो : पीटीआई
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नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। संसद भवन के एनक्सी बिल्डिंग में हुई कैबिनेट की बैठक में फैसला किया गया कि इस विधेयक को दो-तीन दिनों के अंदर संसद में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा । सरकार शीतकालीन सत्र में ही इस बिल को पारित करवाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
संसद का शीतकालीन सत्र
- फोटो : PTI
एनआरसी के बाद नागरिकता संशोधन विधेयक के कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष पुरजोर विरोध करने की तैयारी में लगा हुआ है। पूर्वोत्तर के कई राज्यों के नेताओं ने इसे लेकर विरोध जाहिर किया है। इस मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह ने एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी लेकिन उसमें भी कोई सहमति नहीं बन सकी।
Narendra Modi- Amit Shah
- फोटो : self
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई सभाओं के दौरान भी नागरिकता कानून में संशोधन की बात कर चुके हैं। इस कानून के विरोध में सबसे मुखर आवाज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की है। वे पहले से ही पश्चिम बंगाल में एनआरसी को लागू करने से इनकार करती रही हैं।
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पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह
- फोटो : PTI
इस विधेयक के पास होने से वर्तमान कानून में बदलाव आएगा। जानिए, इसका फायदा किसे मिलेगा और देश में रह रहे करोड़ों लोगों पर इसका क्या असर होगा।
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नागरिकता संशोधन बिल
- फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव?
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।
नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रस्ताव है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्मों के शरणार्थियों के लिए नागरिकता के नियमों को आसान बनाना है।