त्योहार के सीजन में सबसे ज्यादा मारामारी रेलवे स्टेशन पर ही होती है। हर व्यक्ति ट्रेन में सफर करने के लिए कन्फर्म टिकट चाहता है। लेकिन जैसे ही बीते बुधवार को 120 दिन यानी पूरे चार महीने पहले ट्रेन रिजर्वेशन की खिड़की खुली तो चंद मिनटों में ही सभी ट्रेनों में वेटिंग या वेटिंग की सीमा भी समाप्त दिखने लगी है।
अबकी बार 7 नवंबर को दिवाली है और इसके 6 दिन बाद छठ है लेकिन ये क्या रेलवे में अभी से सीटों को लेकर मारामारी शुरू हो गई है। तय समय की तो बात छोड़िए आपको सीट ही मिल जाए यही बहुत है। अब देखना होगा इस बार रेलवे दिवाली, छठ को लेकर क्या खास इंतजाम करता है।
इस वक्त हर गाड़ी में वेटिंग मिलेगा
छठ के मौके पर बिहार जाने वाली ट्रेनों में भीड़ कोई नई बात नहीं है, लेकिन बुधवार को जब आगामी 8 नवंबर के टिकट के लिए 120 दिन पहले खिड़की खुली तो काउंटर से कुछ ऐसा जवाब मिला कि लोगों ने कहा अभी से ही ऐसा हाल। ब्रीद के टिकट काउंटर कलर्क के बताया कि इस वक्त हर गाड़ी में वेटिंग मिलेगा।
भारतीय रेलवे की वेबसाइट में वैशाली एक्सप्रेस में लगभग 183 वेटिंग है, सप्त क्रांति में 121 वेटिंग हो चुकी है, शहीद एक्सप्रेस में 20 वेटिंग है और बिहार संपर्क में तो 484 वेटिंग दिखा रहा है। बिहार जाने वाली 8 नवंबर की तमाम ट्रेनों की सीटें चंद मिनटों में ही बुक हो गईं तो कुछ ट्रेनों में तो वेटिंग ही नहीं रिग्रेट भी दिखना शुरू हो गया है।
पूरब की तरफ जाने वाली सारी ट्रेनें हाउसफुल
लगभग हर ट्रेन का यही हाल है। राजधानी, शताब्दी, एक्सप्रेस-मेल दिवाली और छठ के लिए पूरब की तरफ जाने वाली सारी ट्रेनें लगभग भर चुकी हैं, जिनको बिहार जाने वाली रेगुलर ट्रेनों में जगह नहीं मिली उनके लिए रेलवे के पास स्पेशल ट्रेनें भी हैं।
पिछली बार चलाई गईं थीं 550 ट्रेनें
नॉर्दन रेलवे सीपीआरओ नितिन चौधरी ने कहा कि दिवाली और छठ के दौरान पिछले साल हमने करीब 550 ट्रेनें चलाईं थीं। इस बार भी कोशिश है कि इतनी ही ट्रेन चलाई जाएंगी। जरूरत पड़ी तो इससे भी ज्यादा ट्रेनें चलाई जाएंगी और जिनको रेगुलर ट्रेनों में जगह नहीं मिली। उनको यहां अकोमोडेट करने की भरसक कोशिश रहेगी ताकि वो परिवार के पास पूजा में पहुंच पाएं। भारतीय रेलवे और यात्रियों के लिए त्यौहार मनाने से पहले चुनौती तो सही सलामत घर पहुंचने की है।
जानिए भारतीय रेलवे के बारे में
एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है भारतीय रेलवे। 17 जोन और लगभग 73 उप-विभागीय क्षेत्रीय मुख्यालयों में बंटा है भारतीय रेलवे विभाग। उत्तर जोन भारतीय रेलवे का सबसे बड़ा जोन है। भारत में हर दिन करीब ढाई करोड़ लोग रेल से यात्रा करते हैं और ये संख्या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों की आबादी से भी ज्यादा है।